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विपिन हत्याकांड के तीनों नामजद जेल भेजे गए

Thu, 02 Jul 2015 11:15 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Thu, 02 Jul 2015 11:15 PM IST
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All three were sent to prison massacre named Bipin
पौंकी गांव के विपिन सिंह की हत्या में नामजद तीनों अभियुक्तों को हिरासत में लेने के बावजूद उन्हें निर्दोष बताकर जेल नहीं भेजने पर अड़े अफसर बृहस्पतिवार को उस वक्त बैकफुट पर आ गए, जब छह दिन से आमरण अनशन पर परिवार के साथ डटी मृतक की मां मिथिलेश ने आरोपियों को जेल नहीं भेजे जाने पर शुक्रवार को आत्मदाह कर लेने की चेतावनी दी। अफसरों ने कटरा थाने में पकड़कर बिठाए गए तीनों आरोपियों का चालान काटकर उन्हें आनन-फानन मुख्यालय पर बुलाया और जेल भेज दिया। मृतक की मां को अफसरों ने जूस पिलाने के साथ परिवार का अनशन खत्म कराया और मामले की विवेचना मदनापुर पुलिस से कराने की मांग भी स्वीकार कर ली।
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यह था पूरा मामला
विपिन का गत आठ जून को पाैंकी गांव में एक युवती से प्रेम संबंधों के शक को लेकर गांव के ही सोलंकी और उसके भाई नीरेश से झगड़ा हुआ था। दो दिन बाद ही दोनों भाई विपिन को प्राइवेट नौकरी दिलाने का झांसा देकर घर से बुला ले गए थे। उस वक्त बदायूं जिले के दातागंज थानांतर्गत गांव धनौरा निवासी सोलंकी का बहनोई राजेश भी मौजूद था। दो दिन बाद विपिन की लाश फरीदपुर पुलिस ने तातारपुर गांव के पास रेलवे लाइन के किनारे से बरामद की थी।
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इसलिए घरवालों का भड़का गुस्सा
विपिन की मां मिथिलेश ने बेटे की हत्या में सोलंकी, उसके भाई और बहनोई के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन सत्ता पक्ष के एक नेता से आरोपियों की नजदीकी देख पुलिस उनकी गिरफ्तारी से बचती रही। इसी के विरोध में मिथिलेश सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने गत 27 जून से कलक्ट्रेट में आमरण अनशन शुरू कर दिया। कटरा पुलिस पर दबाव बना तो उसने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने में बिठा लिया, लेकिन जीडी पर उनकी गिरफ्तारी नहीं दर्शाई।
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अफसरों के उत्पीड़न ने आग में डाला घी
इसके विपरीत अफसरों ने पीड़ित परिवार पर बिना शर्त अनशन खत्म करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। मंगलवार की रात एसडीएम (सदर) की मौजूदगी में महिला पुलिस ने अनशन पर बैठीं मिथिलेश और परिवार की अन्य महिलाओं पर घूंसे-थप्पड़ बरसाते हुए उन्हें कलक्ट्रेट से खदेड़ दिया। मिथिलेश ने परिवार समेत पूरी रात सड़क पर गुजारी और बुधवार को फिर से कलक्ट्रेट में अनशन जारी रखा, लेकिन कटरा पुलिस आरोपियों को जेल नहीं भेजने की जिद पर अड़ी रही।


वकीलों और अफसरों
के बीच हुई नोकझोंक
अनशन को बलपूर्वक खत्म कराने के इरादे से बृहस्पतिवार को सुबह तिलहर के सीओ विजय शंकर मिश्रा और कटरा थाने के एसओ नरेंद्र यादव फोर्स लेकर कलक्ट्रेट जा धमके। पुलिस अफसरों ने पीड़ित परिवार को हड़काना शुरू किया तो वहां तमाम लोगों का जमावड़ा लग गया। भीड़ में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शर्मा और रफत जहां बेगम ने पीड़ितों से हमदर्दी जताते हुए नामजद अभियुक्त जेल नहीं भेजे जाने की वजह पूछी तो सीओ ने साफ कह दिया कि पूछताछ में आरोपी निर्दोष साबित होने के कारण थाने से छोड़ दिए गए।



आत्मदाह की चेतावनी
से नरम पड़े अफसर
सीओ की इस स्वीकारोक्ति को वकीलों ने विधि विरुद्ध बताते हुए सवालों की झड़ी लगाई तो पुलिस अफसर सिटी मजिस्ट्रेट के कक्ष में जाकर बैठ गए। इसी बीच, मिथिलेश ने बृहस्पतिवार को भी अनशन जारी रखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को डीएम के नाम ज्ञापन देकर शुक्रवार को आत्मदाह कर लेने की चेतावनी दी तो अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। सीओ के निर्देश पर कटरा थाने के सिपाही तीनों आरोपियों को लेकर मुख्यालय पर हाजिर हुए। पीड़ित परिवार को उन्हें जेल भेजे जाने का भरोसा नहीं हुआ तो पुलिस वाले मृतक के चाचा रनवीर को भी जेल तक साथ ले गए। प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट ने पीड़ित परिवार की मांग पर शस्त्र लाइसेंस के लिए विपिन के पिता ध्रु्वपाल से आवेदन मांगा है।
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