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इंस्पेक्टर को हटाने की मांग कर न्यायिक कार्य से विरत रहे वकील
Updated Mon, 11 Sep 2017 06:23 PM IST
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इंस्पेक्टर को हटाने की मांग कर वकीलों ने नहीं किया काम
अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। वकील के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने और वकील की तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से अधिवक्ताओं में नाराजगी है। आरोपी इंस्पेक्टर को हटाए जाने की मांग को लेकर वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कार्य नहीं किया।
सोमवार को सिविल बार संघ से जुडे़ वकीलों की बैठक कृष्णानंद सिंह राठौर की अध्यक्षता में हुई। इसमें बताया गया कि अधिवक्ता अमित दीक्षित के ऊपर आठ अगस्त को जान से मारने की नीयत से हमला किया गया था। पुवायां पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जबकि अमित दीक्षित के खिलाफ दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि पुवायां के कोतवाली को प्रभारी को तत्काल हटाया जाए और अमित दीक्षित की तहरीर पर बंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। वकीलों ने कहा कि इस संबंध में सीओ पुवायां को भी पत्र दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विरोध में सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्य नहीं करने का फैसला किया और कहा कि कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की अगली रणनीति जल्द तय की जाएगी। प्रस्ताव पर कृष्णानंद सिंह राठौर, अनिल सिंह, ओमपाल यादव सहित तमाम वकीलों के हस्ताक्षर हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
पुवायां। वकील के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किए जाने और वकील की तहरीर पर कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से अधिवक्ताओं में नाराजगी है। आरोपी इंस्पेक्टर को हटाए जाने की मांग को लेकर वकीलों ने सोमवार को न्यायिक कार्य नहीं किया।
सोमवार को सिविल बार संघ से जुडे़ वकीलों की बैठक कृष्णानंद सिंह राठौर की अध्यक्षता में हुई। इसमें बताया गया कि अधिवक्ता अमित दीक्षित के ऊपर आठ अगस्त को जान से मारने की नीयत से हमला किया गया था। पुवायां पुलिस को तहरीर दी गई, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जबकि अमित दीक्षित के खिलाफ दी गई तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि पुवायां के कोतवाली को प्रभारी को तत्काल हटाया जाए और अमित दीक्षित की तहरीर पर बंडा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। वकीलों ने कहा कि इस संबंध में सीओ पुवायां को भी पत्र दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विरोध में सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्य नहीं करने का फैसला किया और कहा कि कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की अगली रणनीति जल्द तय की जाएगी। प्रस्ताव पर कृष्णानंद सिंह राठौर, अनिल सिंह, ओमपाल यादव सहित तमाम वकीलों के हस्ताक्षर हैं।
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