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ज्योति पर्व पर जगमगाया घर का कोना-कोना
Updated Sat, 21 Oct 2017 12:13 AM IST
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अमर उजाला
- फोटो : अमर उजाला
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शाहजहांपुर। ज्योति पर्व दीपावली पूरे जनपद में सौहार्दपूर्ण वातावरण में हर्षोल्लास और धूमधड़ाके के साथ मनाया गया। पारंपरिक ढंग से घर-घर श्रीगणेश-लक्ष्मी और कुबेर महाराज की पूजा कर सुख-संपन्नता की कामना की गई। प्रतिष्ठान, घर, मोहल्ले दीपकों से सजाए गए। देर रात चली आतिशबाजी से दिशाएं गूंजती रहीं। इस दौरान लागों ने एक-दूसरे के यहां मिष्ठान और उपहार भेजकर त्योहार की बधाई दी और बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया।
दीपावली के दिन लोगों में खासा उत्साह नजर आया। घरों में जहां महिलाओं ने पूजन की तैयारी कर तमाम प्रकार के व्यंजन तैयार किए, वहीं शाम को पूजा स्थल, आंगन और घर के प्रमुख द्वार पर आकर्षक रंगोली भी सजाई गई। पेड़-पौधों भी रंगोली और बिजली की झालरों से सजाए गए। पेड़ों पर टिमटिमाते दीप बहुत आकर्षक लग रहे थे। घर और दुकानों-प्रतिष्ठानों की छतों पर बिजली की झालरें और कंदील से सजाई गईं। बाजार में सुबह से ही रौनक रही। लागों ने गणेश-लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्तियां, दीये, कुचरिया, धूपबत्ती, अगरबत्ती, मिष्ठान, फल, फूल आदि खरीदे। गणेश-लक्ष्मी की श्रृंगार सामग्री और पोशाकों की बिक्री भी खूब हुई। रेडीमेड मालाओं की बिक्री भी जमकर हुई।
वहीं, युवाओं और बच्चों ने आतिशबाजी की जमकर खरीददारी की। घरवालों के मना करने के बावजूद युवाआें और बच्चों ने पटाखे, फुलझड़ी, अनार, बम, रॉकेट खूब खरीदे। तेज आवाज वाले पटाखों की बिक्री भी खूब हुई। शाम होते ही घर-घर पूजन शुरू हो गया। पूजन के लिए आकर्षक रंगोली सजाई गई। घर के मुखिया ने परिवार के सदस्यों के साथ विधि-विधान से गणेश-लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा अर्चना की। मिष्ठान से भोग लगाकर आरती उतारी गई और बाद से सभी ने अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
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पूजन के बाद देर रात तक आतिशबाजी का प्रदर्शन छतों, गलियों और बाजार में होता रहा। रॉकेट, पटाखों, बमों की आवाज से दिशाएं गूंजती रहीं। त्योहार के अवसर पर सभी ने एक साथ भोजन का आनंद लिया।
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दीपावली के दिन लोगों में खासा उत्साह नजर आया। घरों में जहां महिलाओं ने पूजन की तैयारी कर तमाम प्रकार के व्यंजन तैयार किए, वहीं शाम को पूजा स्थल, आंगन और घर के प्रमुख द्वार पर आकर्षक रंगोली भी सजाई गई। पेड़-पौधों भी रंगोली और बिजली की झालरों से सजाए गए। पेड़ों पर टिमटिमाते दीप बहुत आकर्षक लग रहे थे। घर और दुकानों-प्रतिष्ठानों की छतों पर बिजली की झालरें और कंदील से सजाई गईं। बाजार में सुबह से ही रौनक रही। लागों ने गणेश-लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्तियां, दीये, कुचरिया, धूपबत्ती, अगरबत्ती, मिष्ठान, फल, फूल आदि खरीदे। गणेश-लक्ष्मी की श्रृंगार सामग्री और पोशाकों की बिक्री भी खूब हुई। रेडीमेड मालाओं की बिक्री भी जमकर हुई।
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वहीं, युवाओं और बच्चों ने आतिशबाजी की जमकर खरीददारी की। घरवालों के मना करने के बावजूद युवाआें और बच्चों ने पटाखे, फुलझड़ी, अनार, बम, रॉकेट खूब खरीदे। तेज आवाज वाले पटाखों की बिक्री भी खूब हुई। शाम होते ही घर-घर पूजन शुरू हो गया। पूजन के लिए आकर्षक रंगोली सजाई गई। घर के मुखिया ने परिवार के सदस्यों के साथ विधि-विधान से गणेश-लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा अर्चना की। मिष्ठान से भोग लगाकर आरती उतारी गई और बाद से सभी ने अपने से बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
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पूजन के बाद देर रात तक आतिशबाजी का प्रदर्शन छतों, गलियों और बाजार में होता रहा। रॉकेट, पटाखों, बमों की आवाज से दिशाएं गूंजती रहीं। त्योहार के अवसर पर सभी ने एक साथ भोजन का आनंद लिया।