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बिहार का डॉक्टर बोला, उसे सम्मोहित किया गया था
Updated Wed, 28 Nov 2018 12:47 AM IST
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शाहजहांपुर। बिहार प्रांत के जिला सीवान के थाना मैरवा अंतर्गत गांव फरचुन्ना के रहने वाले डॉ. उपेंद्र यादव के अपहरण की कहानी में घंटों उलझे रहने के बाद भी आरपीएफ को कोई ठोस क्लू नहीं मिला। बिहार से पहुंचे डॉक्टर के परिवार वाले उसको अपने साथ ले गए। आरपीएफ ने लिखा-पढ़ी करने के बाद उसे परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया। पहले अपहरण की बात कहने वाला डॉक्टर बाद में सम्मोहन की कहानी भी बयां करने लगा। उधर, मंगलवार देर शाम वह सीवान पहुंच गया। वहां मैरवा पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। उसने अपने परिवार वालों को भी सम्मोहित किए जाने की बात बताई।
आरपीएफ ने बिहार के छपरा से आने वाली ट्रेन में सोमवार को बेहोशी की हालत में युवक को बरामद किया था। होश आने पर उसने अपना नाम डॉ. उपेंद्र यादव बताया था। बताया कि सीवान के मैरवा में विजयपुर मोड़ के पास वह क्लीनिक चलाता है। रविवार शाम उसे तीन-चार लोगों ने क्लीनिक से बुलाकर अगवा कर लिया था। जब होश आया तो खुद को ट्रेन में पाया। पूछताछ के बाद आरपीएफ सब इंस्पेक्टर नरवीर सिंह ने उपेंद्र के परिवार वालों से संपर्क साधा। सोमवार रात परिवार वाले यहां पहुंच गए। दोबारा पूछताछ में उसने किसी से किसी तरह की रंजिश होने की बात से इंकार किया और खुद को सम्मोहित किए जाने की बात कही तो आरपीएफ भी उलझ गई। जिस ट्रेन में उपेंद्र मिला वह छपरा से आती है जबकि उपेंद्र का क्लीनिक सीवान के मैरवा में है। दोनों की दूरी करीब सौ किलोमीटर है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर अपहृता उसको सीवान से छपरा तक क्यों लाए। उससे रुपये, मोबाइल आदि भी नहीं लूटा और ट्रेन में बैठा दिया। एसआई नरवीर सिंह का कहना है कि पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। फिलहाल डॉ. उपेंद्र को लिखा पढ़ी करने के बाद उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया है।
इधर, अपने घर पहुंचे डॉ. उपेंद्र से जब फोन पर बात की गई तो उसने कहा कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। शाहजहांपुर से बिहार आते वक्त भी उसका सिर कई बार चकरा गया। घटना के संबंध में मैरवा पुलिस ने भी उससे जानकारी ली। उपेंद्र ने बताया कि शायद उसे सम्मोहित करने के बाद यहां से ले जाया गया था। उसने इससे ज्यादा कुछ कहने से इंकार कर दिया।
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आरपीएफ ने बिहार के छपरा से आने वाली ट्रेन में सोमवार को बेहोशी की हालत में युवक को बरामद किया था। होश आने पर उसने अपना नाम डॉ. उपेंद्र यादव बताया था। बताया कि सीवान के मैरवा में विजयपुर मोड़ के पास वह क्लीनिक चलाता है। रविवार शाम उसे तीन-चार लोगों ने क्लीनिक से बुलाकर अगवा कर लिया था। जब होश आया तो खुद को ट्रेन में पाया। पूछताछ के बाद आरपीएफ सब इंस्पेक्टर नरवीर सिंह ने उपेंद्र के परिवार वालों से संपर्क साधा। सोमवार रात परिवार वाले यहां पहुंच गए। दोबारा पूछताछ में उसने किसी से किसी तरह की रंजिश होने की बात से इंकार किया और खुद को सम्मोहित किए जाने की बात कही तो आरपीएफ भी उलझ गई। जिस ट्रेन में उपेंद्र मिला वह छपरा से आती है जबकि उपेंद्र का क्लीनिक सीवान के मैरवा में है। दोनों की दूरी करीब सौ किलोमीटर है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर अपहृता उसको सीवान से छपरा तक क्यों लाए। उससे रुपये, मोबाइल आदि भी नहीं लूटा और ट्रेन में बैठा दिया। एसआई नरवीर सिंह का कहना है कि पूरा मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। फिलहाल डॉ. उपेंद्र को लिखा पढ़ी करने के बाद उसके परिवार वालों के सुपुर्द कर दिया गया है।
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इधर, अपने घर पहुंचे डॉ. उपेंद्र से जब फोन पर बात की गई तो उसने कहा कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा। शाहजहांपुर से बिहार आते वक्त भी उसका सिर कई बार चकरा गया। घटना के संबंध में मैरवा पुलिस ने भी उससे जानकारी ली। उपेंद्र ने बताया कि शायद उसे सम्मोहित करने के बाद यहां से ले जाया गया था। उसने इससे ज्यादा कुछ कहने से इंकार कर दिया।
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