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एक हफ्ते बाद भी जहां की तहां ठहरी जांच
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शाहजहांपुर। राजकीय मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में कपड़ा छूटने के मामले में प्राचार्य ने तीन सदस्यीय टीम बनाई थी। इसको एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी टीम ने पीड़ित से कोई संपर्क नहीं किया।
वहीं लखनऊ केजीएमयू में पिछले सात दिन से महिला वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
सोमवार को जानकारी मिली कि तीन सदस्यीय टीम में शामिल विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना मिश्रा से राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद तीन सदस्यीय टीम में फेरबदल कर डॉ. रितु रस्तोगी, डॉ. सरोज को शामिल किया गया।
नीलम के पिता राधेश्याम ने बताया कि 15 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू में आंत का आपरेशन होने के बाद से बेटी की हालत गंभीर बनी हुई है। वह पिछले सात दिन से वेंटिलेटर पर है। हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हालांकि केजीएमयू के डॉक्टरों ने काफी मेहनत की है। सोमवार की रात बेटी नीलम की छुट्टी कराकर घर ले आएंगे। जिस डॉक्टर ने बेटी को इस हाल में पहुंचाया, उसको सजा दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। अब तक किसी अधिकारी या तीन सदस्यीय टीम का फोन उनके पास नहीं पहुंचा है।
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जांच रिपोर्ट देने के लिए तीन सदस्यीय टीम को एक सप्ताह का समय दिया था। लेकिन इसी बीच टीम में शामिल स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना मिश्रा से संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए टीम में डॉ. रितु रस्तोगी और डॉ. सरोज को बढ़ा दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम को भेज दी जाएगी।
-डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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वहीं लखनऊ केजीएमयू में पिछले सात दिन से महिला वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है।
सोमवार को जानकारी मिली कि तीन सदस्यीय टीम में शामिल विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना मिश्रा से राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों का संपर्क नहीं हो पाया। इसके बाद तीन सदस्यीय टीम में फेरबदल कर डॉ. रितु रस्तोगी, डॉ. सरोज को शामिल किया गया।
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नीलम के पिता राधेश्याम ने बताया कि 15 जुलाई को लखनऊ के केजीएमयू में आंत का आपरेशन होने के बाद से बेटी की हालत गंभीर बनी हुई है। वह पिछले सात दिन से वेंटिलेटर पर है। हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा है। हालांकि केजीएमयू के डॉक्टरों ने काफी मेहनत की है। सोमवार की रात बेटी नीलम की छुट्टी कराकर घर ले आएंगे। जिस डॉक्टर ने बेटी को इस हाल में पहुंचाया, उसको सजा दिलाने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे। अब तक किसी अधिकारी या तीन सदस्यीय टीम का फोन उनके पास नहीं पहुंचा है।
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जांच रिपोर्ट देने के लिए तीन सदस्यीय टीम को एक सप्ताह का समय दिया था। लेकिन इसी बीच टीम में शामिल स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना मिश्रा से संपर्क नहीं हो पाया है। इसलिए टीम में डॉ. रितु रस्तोगी और डॉ. सरोज को बढ़ा दिया गया है। रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम को भेज दी जाएगी।
-डॉ.राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज