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रेलवे की जमीन पर पुलिस का कब्जा, बनाए गए थाना और चौकी
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शाहजहांपुर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सक्रिय रेल प्रशासन ने रेलवे की जमीन पर कब्जा करने वालों को नोटिस जारी करना शुरू किया तो ऐसे लोगों में खलबली मच गई। इसके बाद भी रेलवे की जमीन पर चल रही दो पुलिस चौकी और थाना का कोई पुरसाहाल नहीं है। रेलवे इसे दो विभागों का मामला बता रहा है।
शहर में गर्रा पुल के पास राजघाट और मोहल्ला बहादुरगंज में गल्ला मंडी के ठीक पीछे रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी बनी हुई है, वहीं रोजा में थाना बना हुआ है। जोकि पिछले 33 सालों से चल रहा है। बताया जाता है कि लगभग 33 साल पहले रोजा थाना बनाने के लिए रेलवे ने दो आवास आवंटित किए थे। दो आवासों से थाना चलता रहा, धीरे-धीरे इंस्पेक्टर और एसएसआई का ऑफिस तैयार किया गया। इसके बाद खाना बनाने का कमरा और फिर सभी अधिकारी एक जगह पर बैठें और ज्यादा से ज्यादा फरियादी उन अधिकारियों के सामने समस्याओं को रख सकें, इसके लिए एक बड़ा हॉल बनाया गया। सभी ऑफिसों में एसी लगवाई गई, बस एक कमी जरूर छोड़ दी कि अगर रेलवे कोई सवाल उठाता है तो उसका जवाब दिया जाएगा कि, लिंटर नहीं डाला गया है। इसलिए इसे अवैध कब्जा नहीं कहा जाएगा। गर्रा पुल के पास बनी राजघाट चौकी पहले जहां एक कमरे में चलती थी, वहां अब पूरा भवन तैयार हो गया है और बहादुरगंज चौकी एक कमरे में संचालित हो रही है।
दो सरकारी विभागों का मामला, बाद में देखेंगे
रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी और थाना बनाए जाने के मामले में रेल अधिकारियों का कहना है कि यह दो सरकारी विभागों के बीच का मामला है। इसको बाद में देखा जाएगा। फिलहाल पब्लिक को टारगेट करके उनके पक्के निर्माण को हटवाया जाना है।
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रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी बनी होने के मामले में एसपी को लेटर लिखा गया है। चौकियों को हटवाने को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जाएगा। यह दो विभागों के बीच का मामला है। - रॉकी तुअर, सहायक मंडल अभियंता, रेलवे
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शहर में गर्रा पुल के पास राजघाट और मोहल्ला बहादुरगंज में गल्ला मंडी के ठीक पीछे रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी बनी हुई है, वहीं रोजा में थाना बना हुआ है। जोकि पिछले 33 सालों से चल रहा है। बताया जाता है कि लगभग 33 साल पहले रोजा थाना बनाने के लिए रेलवे ने दो आवास आवंटित किए थे। दो आवासों से थाना चलता रहा, धीरे-धीरे इंस्पेक्टर और एसएसआई का ऑफिस तैयार किया गया। इसके बाद खाना बनाने का कमरा और फिर सभी अधिकारी एक जगह पर बैठें और ज्यादा से ज्यादा फरियादी उन अधिकारियों के सामने समस्याओं को रख सकें, इसके लिए एक बड़ा हॉल बनाया गया। सभी ऑफिसों में एसी लगवाई गई, बस एक कमी जरूर छोड़ दी कि अगर रेलवे कोई सवाल उठाता है तो उसका जवाब दिया जाएगा कि, लिंटर नहीं डाला गया है। इसलिए इसे अवैध कब्जा नहीं कहा जाएगा। गर्रा पुल के पास बनी राजघाट चौकी पहले जहां एक कमरे में चलती थी, वहां अब पूरा भवन तैयार हो गया है और बहादुरगंज चौकी एक कमरे में संचालित हो रही है।
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दो सरकारी विभागों का मामला, बाद में देखेंगे
रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी और थाना बनाए जाने के मामले में रेल अधिकारियों का कहना है कि यह दो सरकारी विभागों के बीच का मामला है। इसको बाद में देखा जाएगा। फिलहाल पब्लिक को टारगेट करके उनके पक्के निर्माण को हटवाया जाना है।
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रेलवे की जमीन पर पुलिस चौकी बनी होने के मामले में एसपी को लेटर लिखा गया है। चौकियों को हटवाने को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा। इसके बाद ही कुछ निर्णय लिया जाएगा। यह दो विभागों के बीच का मामला है। - रॉकी तुअर, सहायक मंडल अभियंता, रेलवे