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गाड़ी की किस्त जमा नहीं कर सका तो खुद को गोली से उड़ाया
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शाहजहांपुर। लॉकडाउन के दौरान गाड़ी खड़ी रहने से एक युवक लोन की किस्तें जमा नहीं कर सका। आरोप है कि फाइनेंस कंपनी वाले फोन करके किस्तें जमा करने के लिए दबाव बनाते रहे। इससे मानसिक तनाव में आए एक युवक ने शुक्रवार रात तमंचे से खुद को गोली मार दी, जिससे उसी मौके पर मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
रोजा थाना क्षेत्र के नौगवां गांव निवासी जयकुमार उर्फ जैसुख दूसरे की गाड़ी चलाता था। बड़े भाई सरजू ने बताया कि पिछले साल जैसुख ने अपनी गाड़ी खरीदने का मन बनाया। उसने सोचा कि खुद की गाड़ी होगी तो आमदनी बढ़ जाएगी। 28 दिसंबर 2019 को जैसुख ने एक लाख रुपये जमा करके टाटा मैजिक (लोडर) फाइनेंस करा ली। वह गाड़ी की दो किस्तें जमा कर पाया, इसके बाद लॉकडाउन लगने से तीन महीने तक गाड़ी घर में खड़ी रही। इसके बाद जैसुख को घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया, जिससे गाड़ी की किस्तें जमा नहीं कर पाया। लॉकडाउन खुलने पर फाइनेंस कंपनी वाले बार-बार फोन करके किस्तें जमा करने को दबाव बना रहे थे। इससे जैसुख मानसिक तनाव में था।
शुक्रवार रात करीब दस बजे जैसुख चुपचाप कमरे में गया और तमंचे से कनपटी पर गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर परिवार को लोग दौड़कर पहुंचे तो जैसुख खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। परिजन अस्पताल ले जाते इससे पहले उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर जा पहुंची। शनिवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजन के सुपुर्द कर दिया।
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लॉकडाउन में गाड़ी खड़ी रहने से किस्त जमा नहीं कर पाया था। पिछले छह महीने से उसकी किडनी में भी दिक्कत थी। जिसका इलाज भी चल रहा था। इससे वह काम नहीं कर पा रहा था। हालांकि गाड़ी कहा से फाइनेंस थी, इसकी जानकारी परिवार वाले नहीं दे पा रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है। - राजेंद्र बहादुर सिंह, प्रभारी निरीक्षक, रोजा
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रोजा थाना क्षेत्र के नौगवां गांव निवासी जयकुमार उर्फ जैसुख दूसरे की गाड़ी चलाता था। बड़े भाई सरजू ने बताया कि पिछले साल जैसुख ने अपनी गाड़ी खरीदने का मन बनाया। उसने सोचा कि खुद की गाड़ी होगी तो आमदनी बढ़ जाएगी। 28 दिसंबर 2019 को जैसुख ने एक लाख रुपये जमा करके टाटा मैजिक (लोडर) फाइनेंस करा ली। वह गाड़ी की दो किस्तें जमा कर पाया, इसके बाद लॉकडाउन लगने से तीन महीने तक गाड़ी घर में खड़ी रही। इसके बाद जैसुख को घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो गया, जिससे गाड़ी की किस्तें जमा नहीं कर पाया। लॉकडाउन खुलने पर फाइनेंस कंपनी वाले बार-बार फोन करके किस्तें जमा करने को दबाव बना रहे थे। इससे जैसुख मानसिक तनाव में था।
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शुक्रवार रात करीब दस बजे जैसुख चुपचाप कमरे में गया और तमंचे से कनपटी पर गोली मार ली। फायर की आवाज सुनकर परिवार को लोग दौड़कर पहुंचे तो जैसुख खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। परिजन अस्पताल ले जाते इससे पहले उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर जा पहुंची। शनिवार को पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजन के सुपुर्द कर दिया।
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लॉकडाउन में गाड़ी खड़ी रहने से किस्त जमा नहीं कर पाया था। पिछले छह महीने से उसकी किडनी में भी दिक्कत थी। जिसका इलाज भी चल रहा था। इससे वह काम नहीं कर पा रहा था। हालांकि गाड़ी कहा से फाइनेंस थी, इसकी जानकारी परिवार वाले नहीं दे पा रहे हैं। मामले की जांच की जा रही है। - राजेंद्र बहादुर सिंह, प्रभारी निरीक्षक, रोजा