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मिलावटी खाद्य तेल के धंधेबाजों पर अब चलेगा ‘हथौड़ा’
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शाहजहांपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) खान-पान की वस्तुओं में मिलावट के धंधेबाजों के खिलाफ चौतरफा हमला बोलने की तैयारी कर रहा है। विगत दिनों मिठाई, नमकीन, किराना, सौंफ आदि के जो नमूने फेल हुए हैं, उनसे संबंधित निर्माताओं और विक्रेताओं पर मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा चुकी है। इसी कड़ी में भारत सरकार से मिले दिशानिर्देश में जिले के खाद्य तेल के कई बड़े कारोबारियों के गोदामों और प्रतिष्ठानों से अगस्त माह में लिए गए नमूने की जांच रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की शुरुआत की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद पहले कार्रवाई करने के बजाय भारत सरकार को भेजा जाएगा। अधिकारियों के अनुसार देश के सभी राज्यों के प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापा कार्रवाई के लिए तिथि का निर्धारण भारत सरकार करेगी।
मलेशियन पाम आयल पर रोक से बढ़ी मिलावट
गत वर्ष दिवाली केे दौरान मलयेशिया सरकार से कुछ मुद्दों पर राजनयिक संबंध प्रभावित होने पर भारत सरकार ने मलेशियन पाम आयल का आयात प्रतिबंधित किया तो खाद्य तेल में मिलावट और उनकी पैकेजिंग में गड़बड़ी का खेल शुरू हो गया। धंधेबाजों ने रिफाइंड जैसे दिखने वाले सस्ते नेपाली तेल का आयात कर उसमें रासायनिक अखाद्य रंग और एसेंस (सुगंध) मिलाकर उसकी पाम आयल और सरसों के तेल के तौर पर बिक्री शुरू कर दी थी। इस धंधे पर रोक लगाने के लिए एफएसडीए ने छापेमारी शुरू कर दी। इस दौरान केरूगंज तेल मंडी और मिश्रीपुर के एक तेल गोदाम समेत बहादुरगंज गल्ला मंडी में कई दुकानों से तेल के पांच-छह नमूने लिए थे। इनमें से कई नमूने अधोमानक पाए जाने पर संबंधितों पर जुर्माना की कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद तेल में मिलावट का खेल नहीं थमा क्योंकि बाद में लिए तेल के कई नमूनों में भी मिलावट पाई गई।
पुवायां में छापेमारी पर सहना पड़ा विरोध
मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ चलाए गए गत वर्ष चलाए गए अभियान के तहत एफएसडीए अधिकारियों की टीम को सुराग लगा कि पुवायां में तेल के कुछ बड़े धंधेबाजों ने कच्चा माल (नेपाली तेल) रखने के लिए गोदामों मेें भूमिगत टैंक बना रखे हैं। इन गोदामों की तलाश में विभागीय टीम ने पुवायां के कुछ प्रतिष्ठानों पर दस्तक देने के साथ पूछताछ शुरू की तो वहां के कुछ व्यापारियों ने छापा कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। नतीजतन, टीम को दुकानों से तेल के दो नमूने लेकर लौटना पड़ा, लेकिन मिलावटी तेल के गोदामों की लोकेशन नहीं मिल सकी। इस पूरे प्रकरण से अधिकारी इसी नतीजे पर पहुंचे कि पुवायां क्षेत्र में बिक रहे खाद्य तेलों में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।
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एफएसएसएआई को जाएगी आठ नमूनों की रिपोर्ट
अधिकारियों के अनुसार प्रवर्तन कार्रवाई के विरोध से जुड़े ऐसे कई मामले विभिन्न राज्यों में भी सामने आने पर भारतीय मानक एवं खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उन्हें गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्तर पर मिलावटी तेल के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्णय किया है। भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय के माध्यम से एफएसएसएआई से मिले दिशानिर्देशों के अनुसार गत 25 और 26 अगस्त को जिले में तेल के विभिन्न प्रतिष्ठानों और गोदामों से आठ नमूने लिए गए थे। इनमें सरसों तेल, राइस ब्रान आयल और सोयाबीन रिफाइंड आदि तेल के नमूने शामिल हैं। इन नमूनों की जांच संबंधितों पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग सिर्फ अपने लिए इस मकसद से करा रहा है कि भविष्य में प्रवर्तन कार्रवाई के लिए मिलावटी तेल के ठिकानों की पहचान की जा सके। इन नमूनों की रिपोर्ट एफएसएसएआई को भेजे जाने के बाद भारत सरकार तय करेगी कि छापा कार्रवाई कब और किस तरह शुरू की जाए।
भारत सरकार ने सर्वे कराया है कि देश में बिकने वाले खुले और विभिन्न ब्रांड के खाद्य तेलों की गुणवत्ता कैसी है। इसी सर्वे के तहत गत माह तेल के जो नमूने लिए गए, उनकी जांच रिपोर्ट विभागीय आयुक्त के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा। बाद में एफएसएसएआई छापा कार्रवाई के लिए जो भी रणनीति तय करेगा, उसी के अनुसार जरूरी कदम उठाए जाएंगे। अभी यह बता पाना संभव नहीं है कि तेल प्रतिष्ठानों पर कब से छापे पड़ेंगे।
- विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी (एफएसडीए)
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मलेशियन पाम आयल पर रोक से बढ़ी मिलावट
गत वर्ष दिवाली केे दौरान मलयेशिया सरकार से कुछ मुद्दों पर राजनयिक संबंध प्रभावित होने पर भारत सरकार ने मलेशियन पाम आयल का आयात प्रतिबंधित किया तो खाद्य तेल में मिलावट और उनकी पैकेजिंग में गड़बड़ी का खेल शुरू हो गया। धंधेबाजों ने रिफाइंड जैसे दिखने वाले सस्ते नेपाली तेल का आयात कर उसमें रासायनिक अखाद्य रंग और एसेंस (सुगंध) मिलाकर उसकी पाम आयल और सरसों के तेल के तौर पर बिक्री शुरू कर दी थी। इस धंधे पर रोक लगाने के लिए एफएसडीए ने छापेमारी शुरू कर दी। इस दौरान केरूगंज तेल मंडी और मिश्रीपुर के एक तेल गोदाम समेत बहादुरगंज गल्ला मंडी में कई दुकानों से तेल के पांच-छह नमूने लिए थे। इनमें से कई नमूने अधोमानक पाए जाने पर संबंधितों पर जुर्माना की कार्रवाई भी हुई। इसके बावजूद तेल में मिलावट का खेल नहीं थमा क्योंकि बाद में लिए तेल के कई नमूनों में भी मिलावट पाई गई।
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पुवायां में छापेमारी पर सहना पड़ा विरोध
मिलावटी खाद्य तेल के खिलाफ चलाए गए गत वर्ष चलाए गए अभियान के तहत एफएसडीए अधिकारियों की टीम को सुराग लगा कि पुवायां में तेल के कुछ बड़े धंधेबाजों ने कच्चा माल (नेपाली तेल) रखने के लिए गोदामों मेें भूमिगत टैंक बना रखे हैं। इन गोदामों की तलाश में विभागीय टीम ने पुवायां के कुछ प्रतिष्ठानों पर दस्तक देने के साथ पूछताछ शुरू की तो वहां के कुछ व्यापारियों ने छापा कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया। नतीजतन, टीम को दुकानों से तेल के दो नमूने लेकर लौटना पड़ा, लेकिन मिलावटी तेल के गोदामों की लोकेशन नहीं मिल सकी। इस पूरे प्रकरण से अधिकारी इसी नतीजे पर पहुंचे कि पुवायां क्षेत्र में बिक रहे खाद्य तेलों में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है।
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एफएसएसएआई को जाएगी आठ नमूनों की रिपोर्ट
अधिकारियों के अनुसार प्रवर्तन कार्रवाई के विरोध से जुड़े ऐसे कई मामले विभिन्न राज्यों में भी सामने आने पर भारतीय मानक एवं खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने उन्हें गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रीय स्तर पर मिलावटी तेल के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्णय किया है। भारत सरकार के खाद्य मंत्रालय के माध्यम से एफएसएसएआई से मिले दिशानिर्देशों के अनुसार गत 25 और 26 अगस्त को जिले में तेल के विभिन्न प्रतिष्ठानों और गोदामों से आठ नमूने लिए गए थे। इनमें सरसों तेल, राइस ब्रान आयल और सोयाबीन रिफाइंड आदि तेल के नमूने शामिल हैं। इन नमूनों की जांच संबंधितों पर कार्रवाई करने के बजाय विभाग सिर्फ अपने लिए इस मकसद से करा रहा है कि भविष्य में प्रवर्तन कार्रवाई के लिए मिलावटी तेल के ठिकानों की पहचान की जा सके। इन नमूनों की रिपोर्ट एफएसएसएआई को भेजे जाने के बाद भारत सरकार तय करेगी कि छापा कार्रवाई कब और किस तरह शुरू की जाए।
भारत सरकार ने सर्वे कराया है कि देश में बिकने वाले खुले और विभिन्न ब्रांड के खाद्य तेलों की गुणवत्ता कैसी है। इसी सर्वे के तहत गत माह तेल के जो नमूने लिए गए, उनकी जांच रिपोर्ट विभागीय आयुक्त के माध्यम से भारत सरकार को भेजा जाएगा। बाद में एफएसएसएआई छापा कार्रवाई के लिए जो भी रणनीति तय करेगा, उसी के अनुसार जरूरी कदम उठाए जाएंगे। अभी यह बता पाना संभव नहीं है कि तेल प्रतिष्ठानों पर कब से छापे पड़ेंगे।
- विजय कुमार वर्मा, अभिहीत अधिकारी (एफएसडीए)