{"_id":"61955365048676419a31d962","slug":"court-dicision-shahjahanpur-news-bly4664781149","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैर इरादतन हत्या में पिता-पुत्रों समेत चार को दस साल कैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैर इरादतन हत्या में पिता-पुत्रों समेत चार को दस साल कैद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शाहजहांपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने गैर इरादतन हत्या के एक मुकदमे में पड़ोसी पिता, चाचा और दो सगे भाइयों समेत चार दोषियों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों पर दस-दस हजार रुपये की जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला और नीलिमा सक्सेना ने बताया कि तिलहर क्षेत्र के ग्राम धनेली पलटू की रहने वाली वेदवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19 अप्रैल 2013 की दोपहर उसके बच्चे गांव में ही गेंद खेल रहे थे। उसके बच्चे की गेंद अचानक राजेश के घर में चली गई। इसी बात से नाराज राजेश, भाई रंजीत, पिता रामबहादुर और चाचा रामप्रसाद अपने घर से गुस्से से बाहर निकले और उसके बच्चों को मारने लगे।
इसी दौरान उसके पति गंगाप्रसाद झगड़ा रोकने का प्रयास करने लगे। तभी वे चारों लोग घर से लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर निकल आए। राजेश ने उसके पति को कुल्हाड़ी मार दी। पति बुरी तरह से घायल होकर मौके पर गिर गए। वेदवती पति गंगा प्रसाद को लेकर तिलहर के अस्पताल गईं जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में पति की कपसेड़ा के पास मौत हो गई।
विज्ञापन
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकीलों के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने राजेश, रंजीत, रामबहादुर और रामप्रसाद को आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषी पाया। चारों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
विज्ञापन
सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला और नीलिमा सक्सेना ने बताया कि तिलहर क्षेत्र के ग्राम धनेली पलटू की रहने वाली वेदवती ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 19 अप्रैल 2013 की दोपहर उसके बच्चे गांव में ही गेंद खेल रहे थे। उसके बच्चे की गेंद अचानक राजेश के घर में चली गई। इसी बात से नाराज राजेश, भाई रंजीत, पिता रामबहादुर और चाचा रामप्रसाद अपने घर से गुस्से से बाहर निकले और उसके बच्चों को मारने लगे।
विज्ञापन
इसी दौरान उसके पति गंगाप्रसाद झगड़ा रोकने का प्रयास करने लगे। तभी वे चारों लोग घर से लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर निकल आए। राजेश ने उसके पति को कुल्हाड़ी मार दी। पति बुरी तरह से घायल होकर मौके पर गिर गए। वेदवती पति गंगा प्रसाद को लेकर तिलहर के अस्पताल गईं जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रास्ते में पति की कपसेड़ा के पास मौत हो गई।
विज्ञापन
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकीलों के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने राजेश, रंजीत, रामबहादुर और रामप्रसाद को आईपीसी की धारा 304 के तहत दोषी पाया। चारों को दस-दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाते हुए दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।