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दहेज हत्या में पति को दस साल के कारावास की सजा
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शाहजहांपुर। तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश अहसान हुसैन ने दहेज हत्या के एक मुकदमे में पति को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। 15 सौ रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है।
सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला और नीलिमा सक्सेना के अनुसार हरदोई के कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम महादेव पुरवा निवासी परमेश्वर ने अपनी बेटी रिंकी देवी की शादी सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव महमदपुर निवासी राममिलन से की थी। वादी परमेश्वर के मुताबिक शादी के बाद से पुत्री के ससुराल वाले दहेज में बाइक, सोने की लर की मांग करने लगे थे। उसकी बेटी की विदाई नहीं कराई।
करीब डेढ़ माह बाद सोने की लर की जगह अंगूठी देने पर ससुराल के लोग विदा कराकर ले गए। तीन मई 2014 को मोबाइल पर सूचना मिली कि उसकी बेटी को पति राममिलन, जेठ रामबख्स, देवर विपिन व जेठानी ने पीट-पीटकर मार डाला है। वादी पिता अपने परिजनों के साथ मौके पर गया। पुत्री के शरीर पर चोटों के निशान देखकर थाने पर सूचना दी। पुलिस ने सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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विवेचना के उपरांत राममिलन के अलग रहने के कारण शेष आरोपियों की नामजदगी गलत पाई गई। राममिलन के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया। अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकीलों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने राममिलन को दोषी पाया। उसे दस वर्ष के कारावास, 15 सौ रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया।
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सरकारी वकील विनोद कुमार शुक्ला और नीलिमा सक्सेना के अनुसार हरदोई के कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम महादेव पुरवा निवासी परमेश्वर ने अपनी बेटी रिंकी देवी की शादी सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव महमदपुर निवासी राममिलन से की थी। वादी परमेश्वर के मुताबिक शादी के बाद से पुत्री के ससुराल वाले दहेज में बाइक, सोने की लर की मांग करने लगे थे। उसकी बेटी की विदाई नहीं कराई।
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करीब डेढ़ माह बाद सोने की लर की जगह अंगूठी देने पर ससुराल के लोग विदा कराकर ले गए। तीन मई 2014 को मोबाइल पर सूचना मिली कि उसकी बेटी को पति राममिलन, जेठ रामबख्स, देवर विपिन व जेठानी ने पीट-पीटकर मार डाला है। वादी पिता अपने परिजनों के साथ मौके पर गया। पुत्री के शरीर पर चोटों के निशान देखकर थाने पर सूचना दी। पुलिस ने सभी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली।
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विवेचना के उपरांत राममिलन के अलग रहने के कारण शेष आरोपियों की नामजदगी गलत पाई गई। राममिलन के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय भेजा गया। अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकीलों के तर्क सुनने के बाद अदालत ने राममिलन को दोषी पाया। उसे दस वर्ष के कारावास, 15 सौ रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया।