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किसी ने 450 किमी साइकिल चलाई, कोई पैदल ही नाप चुका मीलों रास्ता
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बस में बैंठने जाते प्रवासी श्रमिक । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजाहंपुर। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा से प्रवासी मजदूरों के आने का सिलसिला जारी। हाइवे से पैदल, साइकिल और वाहनों से दिन-रात गुजर रहे लोगों को बस अपनी मंजिल तक पहुंचने की चाहत है। उन्हें इस बात की कोई फिक्र नहीं है कि इस तरह घर तक सही सलामत कैसे पहुंचेंगे। बस घर वापसी की उम्मीद में जो भी साधन मिल रहा है, बस दौड़े जा रहे हैं।
शनिवार को भी बरेली मोड स्थित एनएच-24 से ट्रक, डीसीएम, मोटर साइकिल, साइकिल और पैदल सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर गुजरे, जिनमें पुरुषों के साथ ही महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। कोई पैदल चला आ रहा था, किसी के पास साइकिल थी जिसे वह अब तक सैकड़ों किमी खींच चुका था। छोटे और बड़े वाहनों में जिसे जहां जगह मिली सवार हो लिया। हालांकि दूसरे राज्यों से यहां आने वालों को अपने घर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से बसों की व्यवस्था की गई। इस बीच डीएम-एसपी ने भी हाईवे पर पहुंचकर बाहर से आने-जाने वालों का लिया जायजा। डीएम इंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों व पड़ोसी जिलों को जाने वाले मजदूरों को जिले की सीमा तक छोड़ने के लिए बसों से भेजा गया।
साइकिल से 450 किमी की यात्रा करके यहां पहुंचने वाले रामधीरज, मनीराम, मातादयाल, विनय कुमार, राजिंदर, सचिन और रोहित ने बताया कि वह लोग पंजाब के जिला मानशा में पत्थर फिटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन लगने के बाद काम बंद हो गया और वे लोग खाली हो गए। लॉकडाउन लगने से पहले मेहनत मजदूरी कर मिले रुपये जब खर्च हो गए, तो वापस घर लौटने के अलावा कोई ठिकाना नहीं बचा और बिना कुछ सोचे समझे 13 मई को अपनी-अपनी साइकिलों से फैजाबाद के लिए चल दिए। शनिवार को सुबह यहां पहुंचे, जहां प्रशासन की ओर से आगे जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। उसी से अपने गंतव्य तक रवाना होंगे।
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शनिवार को भी बरेली मोड स्थित एनएच-24 से ट्रक, डीसीएम, मोटर साइकिल, साइकिल और पैदल सैकड़ों की संख्या में प्रवासी मजदूर गुजरे, जिनमें पुरुषों के साथ ही महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। कोई पैदल चला आ रहा था, किसी के पास साइकिल थी जिसे वह अब तक सैकड़ों किमी खींच चुका था। छोटे और बड़े वाहनों में जिसे जहां जगह मिली सवार हो लिया। हालांकि दूसरे राज्यों से यहां आने वालों को अपने घर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन की ओर से बसों की व्यवस्था की गई। इस बीच डीएम-एसपी ने भी हाईवे पर पहुंचकर बाहर से आने-जाने वालों का लिया जायजा। डीएम इंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों व पड़ोसी जिलों को जाने वाले मजदूरों को जिले की सीमा तक छोड़ने के लिए बसों से भेजा गया।
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साइकिल से 450 किमी की यात्रा करके यहां पहुंचने वाले रामधीरज, मनीराम, मातादयाल, विनय कुमार, राजिंदर, सचिन और रोहित ने बताया कि वह लोग पंजाब के जिला मानशा में पत्थर फिटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन लगने के बाद काम बंद हो गया और वे लोग खाली हो गए। लॉकडाउन लगने से पहले मेहनत मजदूरी कर मिले रुपये जब खर्च हो गए, तो वापस घर लौटने के अलावा कोई ठिकाना नहीं बचा और बिना कुछ सोचे समझे 13 मई को अपनी-अपनी साइकिलों से फैजाबाद के लिए चल दिए। शनिवार को सुबह यहां पहुंचे, जहां प्रशासन की ओर से आगे जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। उसी से अपने गंतव्य तक रवाना होंगे।
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