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‘धर्मनिरपेक्षता के नाम पर चल रहा षडयंत्र’
शाहजहांपुर
Updated Wed, 25 Feb 2015 11:54 PM IST
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एसएस कॉलेज के स्वर्ण जयंती और संस्थापक स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती महाराज के अर्द्ध शताब्दी महानिर्वाण महोत्सव धूमधाम से शुरू हो गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि गोरक्षपीठाधीश्वर महंत एवं सांसद आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में संन्यास परंपरा कर्म में विश्वास रखती है। कर्म से विरत रहने के लिए कोई संन्यास नहीं कहता।
आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदू धर्मांवलंबियों को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धर्म से अलग करने का षडयंत्र चल रहा है। हिंदू हित की बात करने पर छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी पानी पी-पीकर कोसते हैं और वही लोग आईएसआईएस के अत्याचारों पर खामोश हो जाते हैं। हिंदू मानस ही दुनिया को बताता है कि श्रद्धा से साथ परंपराएं कैसे चलती हैं। देश की सनातन हिंंदू परंपरा अत्यंत उदार रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि सेना हट जाए तब हम दिखा देंगे, उन लोगों को समझ लेना चाहिए कि अब हिंदू कमजोर नहीं है।
जगद्गुरु शंकराचार्य शारदा पीठाधीश्वर राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि साधुता वैराग्य में ही नहीं, गृहस्थ में भी संभव है। आज साधुता को व्यवसायिकता से जोड़ा जा रहा है। समाज के प्रति सेवा हमें कई ऋणों से मुक्त करती है। इसलिए साधु-संतों को दंभ और अहंकार से नहीं अपितु विनम्रता तथा सरसता का व्यवहार करना चाहिए। इस मौके पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री हंसदेवाचार्य, स्वामी हरिनारायण, महामंडलेश्वर निर्वाण पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद पुरी, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन कार्यक्रम अध्यक्ष एवं मुमुक्षु आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने किया।
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स्वामी शुकदेवानंद के जीवन पर लिखी पुस्तक का विमोचन
महोत्सव के प्रथम दिन शंकराचार्यों ने एसएस कॉलेज के संस्थापक स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘सारस्वत साधना के प्रतिनिधि संत’ का विमोचन भी किया। स्वामी शुकदेवानंद महाराज के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तक को महाविद्यालय के ही प्रवक्ता डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने लिखी है।
सर्वधर्म समभाव के लिए किया सम्मानित
महोत्सव के प्रथम दिन विभिन्न मंदिरों और गुरुद्वारों के पुजारियों तथा पंथियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया। यह परंपरा आगे दिनों में चलती रहेगी। पहले दिन सम्मानित होने वालों में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की प्रधान कमलेश कौर माटा, जुझार सिंह मोगा, ज्ञानी सुरजीत सिंह, कस्तूरी लाल, दिनेश गोगिया, सोहनलाल ग्रोवर, सीमा शर्मा, मधु, सुशील नारंग, हरवंश आदि शामिल रहे।
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आदित्यनाथ ने कहा कि हिंदू धर्मांवलंबियों को धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धर्म से अलग करने का षडयंत्र चल रहा है। हिंदू हित की बात करने पर छद्म धर्मनिरपेक्षतावादी पानी पी-पीकर कोसते हैं और वही लोग आईएसआईएस के अत्याचारों पर खामोश हो जाते हैं। हिंदू मानस ही दुनिया को बताता है कि श्रद्धा से साथ परंपराएं कैसे चलती हैं। देश की सनातन हिंंदू परंपरा अत्यंत उदार रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि जो लोग यह कहते हैं कि सेना हट जाए तब हम दिखा देंगे, उन लोगों को समझ लेना चाहिए कि अब हिंदू कमजोर नहीं है।
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जगद्गुरु शंकराचार्य शारदा पीठाधीश्वर राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि साधुता वैराग्य में ही नहीं, गृहस्थ में भी संभव है। आज साधुता को व्यवसायिकता से जोड़ा जा रहा है। समाज के प्रति सेवा हमें कई ऋणों से मुक्त करती है। इसलिए साधु-संतों को दंभ और अहंकार से नहीं अपितु विनम्रता तथा सरसता का व्यवहार करना चाहिए। इस मौके पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री हंसदेवाचार्य, स्वामी हरिनारायण, महामंडलेश्वर निर्वाण पीठाधीश्वर स्वामी विशोकानंद पुरी, शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस सत्र का संचालन कार्यक्रम अध्यक्ष एवं मुमुक्षु आश्रम के मुख्य अधिष्ठाता स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने किया।
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स्वामी शुकदेवानंद के जीवन पर लिखी पुस्तक का विमोचन
महोत्सव के प्रथम दिन शंकराचार्यों ने एसएस कॉलेज के संस्थापक स्वामी शुकदेवानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘सारस्वत साधना के प्रतिनिधि संत’ का विमोचन भी किया। स्वामी शुकदेवानंद महाराज के जीवन चरित्र पर आधारित पुस्तक को महाविद्यालय के ही प्रवक्ता डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने लिखी है।
सर्वधर्म समभाव के लिए किया सम्मानित
महोत्सव के प्रथम दिन विभिन्न मंदिरों और गुरुद्वारों के पुजारियों तथा पंथियों को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया। यह परंपरा आगे दिनों में चलती रहेगी। पहले दिन सम्मानित होने वालों में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की प्रधान कमलेश कौर माटा, जुझार सिंह मोगा, ज्ञानी सुरजीत सिंह, कस्तूरी लाल, दिनेश गोगिया, सोहनलाल ग्रोवर, सीमा शर्मा, मधु, सुशील नारंग, हरवंश आदि शामिल रहे।