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मुआवजा, बीमा क्लेम से नहीं चुक पाएगा मेहनत का मोल

शाहजहांपुर। Updated Tue, 07 Apr 2015 12:01 AM IST
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Compensation, insurance claim will miss not worth the effort

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बेमौसम की बारिश और आंधी से तबाह हुए जिले के किसानों को सरकारी मुआवजा और बीमा क्लेम से भी कोई खास राहत मिलने वाली नहीं। खेतों में बाकी बची बालियों में भी गेहूं का दाना सूख गया है। हाल यह है कि फसल काटने पर प्रति बीघा ढाई-तीन क्विंटल के बजाय सिर्फ 50 किलो गेहूं निकल रहा है। ऐसे में दोनों मदों से मिलने वाली धनराशि से फसल पर लगाई गई लागत भले ही निकल आए, पूरा साल खेतों में खपाने वाले किसानों को अपनी मेहनत का मोल नहीं मिल पाएगा।
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1100 की लागत पर मिल
रहे सिर्फ 725 रुपये
रौसर के उन्नतशील काश्तकार श्याम बाबू दीक्षित के अनुसार गेहूं की उपज लेने के लिए खेत में बीज डालने से लेकर कंबाइन से कटाई तक प्रति एकड़ 6835 रुपये खर्च हुए, अर्थात प्रति बीघा 1094 रुपये खर्च हो गए। बदले में एक बीघा खेत से से बमुश्किल 50 किलो गेहूं निकल रहा है। समर्थन मूल्य के हिसाब से इतना गेहूं सिर्फ 725 रुपये का हुआ। प्रति बीघा गेहूं की सामान्य पैदावार ढाई क्विंटल होने पर किसानों को 3625 रुपये मिलते, जिसमें लागत निकालकर 2532 रुपये मुनाफा मिलता, लेकिन आंधी-पानी ने सब गुड़ गोबर कर दिया। लागत खर्च से 725 रुपये घटा दिए जाएं तो भी प्रति बीघा 400 रुपये किसानों की जेब से निकल गए।



केवल 542 रुपये प्रति
बीघा मिलेगा बीमा क्लेम
अधिकारियों के अनुसार जिले में लागू मौसम आधारित फसल बीमा योजना में तापमान और अतिवृष्टि केदो मानक तय किए गए हैं। दिसंबर में तापमान सामान्य रहने से इस मद में किसानों को कोई राहत नहीं मिलनी तय है। हां, 15 मार्च तक काउंट की गई 40 मिमी बारिश कोदेखते प्रति हेक्टेयर 9101 रुपये क्लेम देने का प्रावधान है। बात बीघा की करें तो किसानों को अधिकतम 542.46 रुपये की बीमा रकम मिल पाएगी।


50 फीसदी क्षति पर मिलेगा
1152 रुपये मुआवजा
अफसरों की भाषा में बात करें तो जिन किसानों को 50 फीसदी और इससे अधिक फसली क्षति उठानी पड़ी, उन्हें प्रति हेक्टयर अधिकतम 18000 रुपये अर्थात प्रति बीघा 1152 रुपये मुआवजा देय होगा। इससे कम फसली नुकसान उठाने वाले किसानों को मिलने वाले मुआवजा की रकम भी घट जाएगी।  



गेहूं उत्पादन लागत (प्रति एकड़)
0 बीज और बुवाई         960.00 रुपये
0 डीएपी एक बोरी       1145.00 रुपये
0 यूरिया दो बोरी          680.00 रुपये
0 सिंचाई चार बार       2000.00 रुपये
0 जुताई-गुड़ाई          1450.00 रुपये
0 फसल कटाई            600.00 रुपये
योग                      6835.00 रुपये


प्रति एकड़ प्राप्तियां (50 फीसदी नुकसान पर)
0 गेहूं उपज            4531.25 रुपये
0 बारिश बीमा क्लेम   3640.40 रुपये
0 मुआवजा धनराशि   7200.00 रुपये
....................................................
योग                15371.65 रुपये


15 मई तक मिलेगा फसली बीमा क्लेम
‘किसानों का फसली बीमा करने वाली एचडीएफसी एग्रो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के अधिकारियों से बात हो गई है। चूंकि, फसलें 30 अप्रैल की अवधि तक बीमित हुई हैं। इसलिए कंपनी के अधिकारियों ने 15 मई तक बीमा क्लेम देने का वायदा किया है। फसली नुकसान के मुआवजे का वितरण शासन से मांगी गई धनराशि मिलने ही शुरू कर दिय जाएगा।’  
-अखिलानंद पांडेय, जिला कृषि अधिकारी

खेतों में बिखरा है तबाही का मंजर
शाहजहांपुर। बेमौसम बरसात और तेज अंधड़ों से फसली तबाही का मंजर चहुंओर बिखरा पड़ा है। जिला मुख्यालय से ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। शहर से बाहर निकलते ही भावलखेड़ा ब्लॉक के गांवों के खेतों की ओर निहारते ही किसानों का कलेजा मुंह को आ जाता है।
गांव दिउरिया के पूर्व प्रधान नईमुद्दीन हों या फिर इसी गांव के उन्नतशील किसान मुनेंद्र सिंह, मौसम की मार ने किसी को भी नहीं बख्शा। बसुलिया केरामानंद दुबे ने पिछले सीजन में मिले घाटे की भरपाई के लिए गन्ना रकबा में कटौती करके गेहूं का क्षेत्रफल बढ़ाया, लेकिन मेहनत का मोल मिलने का वक्त आने से पहले मौसम ने दगा दे दिया। हथौड़िया के श्याम लाल कहते हैं कि अगली फसल के लिए अब लोन लेने के अलावा अन्य कोई रास्ता नहीं बचा। सल्लिया के राजेंद्र सिंह का 12 बीघा और प्यारे लाल का आठ बीघा गेहूं खेत में पलट जाने से उन्हें आगे का रास्ता नहीं सूझ रहा।

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