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बूंदाबांदी और बारिश के साथ ठंडी हवा से दिन में हुई रात जैसी ठंडक
सार
उत्तर-पश्चिम विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी बना रहा।दिन में रात जैसी ठंडक ने गर्मी गायब कर दी, लेकिन हवा के तेज झोंके चलने से खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलों को क्षति पहुंची है।इसके अलावा कई खेतों में धान कटने को तैयार खड़ा हे।
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विस्तार
शाहजहांपुर। उत्तर-पश्चिम विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी बना रहा। दिन में रात जैसी ठंडक ने गर्मी गायब कर दी, लेकिन हवा के तेज झोंके चलने से खेतों में खड़ी धान और गन्ने की फसलों को क्षति पहुंची है।
बूंदाबांदी से पारा चार डिग्री लुढ़क चुका है। रात में बूंदाबांदी के साथ हवा चली तो न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस हो गया। बारिश से वातावरण में आर्द्रता बढ़ने और नम हवा चलने से तापमान में कमी आना स्वाभाविक है। दो दिन की तुलना में दिन के तापमान में 5.5 डिग्री की गिरावट उन लोगों को भी असहज करने लगी है जो दो दिन पहले तक गर्मी और उमस से परेशान थे।
यही वजह रही कि आज का दिन इतना ठंडा रहा कि लोगों को घरों और प्रतिष्ठानों में पंखे बंद करके काम करने से काफी सुकून मिला। हालांकि, सुबह से बूंदाबांदी शुरू हो गई और इस कारण शहर में कई निचले स्थानों की सड़कों पर जमा बरसाती पानी से कीचड़ और फिसलन पैदा हो गई। इस दौरान ठंडी हवा के तेज झोंके जनजीवन को सुकून देते रहे लेकिन इससे खेतों में पकने को तैयार धान और लंबाई पकड़ रहे गन्ना की फसल को हानि हो रही है। धान के जिन पौधों में बालियां पड़ चुकी हैं या फिर उनके फूल उभर रहे हैं, उन्हें तेज हवा से बचाना कठिन हो रहा है।
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गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार दिन में तापमान में गिरावट सामान्य से अधिक इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि 20 से 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चल रही है। परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह का कहना है कि वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं हुआ तो शुक्रवार को सुबह से हल्के बादल छाएंगे, लेकिन हवा चलने से दोपहर तक धूप निकलेगी और मौसम सामान्य बना रहेगा।
बारिश के साथ तेज हवा से फसलों को नुकसान
पुवायां। बुधवार रात से मौसम खराब होने के बाद बारिश शुरू हो गई। बारिश ज्यादा नहीं हुई है, लेकिन बारिश के साथ चली तेज हवा ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। तेज हवा के साथ बारिश से बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को राहत तो जरूरी मिली लेकिन किसानों के माथे पर चिंता बढ़ गई।
पुवायां क्षेत्र में धान की रोपाई काफी अगेती कर दी गई थी। लगभग सौ एकड़ क्षेत्रफल में धान कट भी चुका है। इसके अलावा कई खेतों में धान कटने को तैयार खड़ा हे। तेज हवा से धान की फसल खेत में गिर जाने से समस्या बढ़ गई है। अगर बारिश ज्यादा हुई तो गिरा धान काला पड़ जाएगा और पूरी तरह से खराब भी हो सकता है। तिल्ली की फसल भी गिरने से किसान परेशान हो उठे हैं। किसान रामचंद्र, रमेश कुमार, गिरजाशंकर आदि ने बताया कि बारिश से नुकसान नहीं है, लेकिन हवा चली तो उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। सूखे में बमुश्किल धान, गन्ना तैयार हुआ है, वह भी गिर गया है। किसानों को फसलों के नष्ट होने की चिंता सताने लगी है।
गन्ना की बंधाई कर फसल गिरने से बचाएं किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी का कहना है कि तेज बारिश होने ओर हवा चलने पर भी अगले दिन धूप निकलने की दशा में फसलें गिरने से बच जाती हैं क्योंकि हवा के साथ धूप लगने से खेतों की मिट्टी से वाष्पन की तेज प्रक्रिया से सूखने लगती है। ऐसी स्थिति में पौधों की जड़ें भी मिट्टी नहीं छोड़ती, लेकिन दो दिन या इससे अधिक समय तक बूंदाबांदी और बारिश से खेतों की मृदा मुलायम पड़ जाती है। ऐसे में हवा तेज चलने पर पौधे उखड़ने लगते हैं। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार जिन पौधों में बालियां पड़ गई हैं, उनके गिरने पर फसल को बचाना संभव नहीं होगा। गन्ना किसानों से दो माह पहले से कहा जा रहा है कि वह अगस्त तक गन्ना की बंधाई कर दें। जिन किसानों ने इस काम में लापरवाही की, वह तत्काल गन्ना बांधें, अन्यथा थपेड़े तेज होने पर गन्ना फसल को नुकसान बढ़ जाएगा।
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बूंदाबांदी से पारा चार डिग्री लुढ़क चुका है। रात में बूंदाबांदी के साथ हवा चली तो न्यूनतम तापमान 0.7 डिग्री घटकर 25.3 डिग्री सेल्सियस हो गया। बारिश से वातावरण में आर्द्रता बढ़ने और नम हवा चलने से तापमान में कमी आना स्वाभाविक है। दो दिन की तुलना में दिन के तापमान में 5.5 डिग्री की गिरावट उन लोगों को भी असहज करने लगी है जो दो दिन पहले तक गर्मी और उमस से परेशान थे।
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यही वजह रही कि आज का दिन इतना ठंडा रहा कि लोगों को घरों और प्रतिष्ठानों में पंखे बंद करके काम करने से काफी सुकून मिला। हालांकि, सुबह से बूंदाबांदी शुरू हो गई और इस कारण शहर में कई निचले स्थानों की सड़कों पर जमा बरसाती पानी से कीचड़ और फिसलन पैदा हो गई। इस दौरान ठंडी हवा के तेज झोंके जनजीवन को सुकून देते रहे लेकिन इससे खेतों में पकने को तैयार धान और लंबाई पकड़ रहे गन्ना की फसल को हानि हो रही है। धान के जिन पौधों में बालियां पड़ चुकी हैं या फिर उनके फूल उभर रहे हैं, उन्हें तेज हवा से बचाना कठिन हो रहा है।
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गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार दिन में तापमान में गिरावट सामान्य से अधिक इसलिए महसूस हो रही है क्योंकि 20 से 25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवा चल रही है। परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह का कहना है कि वायुदाब में कोई परिवर्तन नहीं हुआ तो शुक्रवार को सुबह से हल्के बादल छाएंगे, लेकिन हवा चलने से दोपहर तक धूप निकलेगी और मौसम सामान्य बना रहेगा।
बारिश के साथ तेज हवा से फसलों को नुकसान
पुवायां। बुधवार रात से मौसम खराब होने के बाद बारिश शुरू हो गई। बारिश ज्यादा नहीं हुई है, लेकिन बारिश के साथ चली तेज हवा ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। तेज हवा के साथ बारिश से बीते कई दिनों से उमस भरी गर्मी से परेशान लोगों को राहत तो जरूरी मिली लेकिन किसानों के माथे पर चिंता बढ़ गई।
पुवायां क्षेत्र में धान की रोपाई काफी अगेती कर दी गई थी। लगभग सौ एकड़ क्षेत्रफल में धान कट भी चुका है। इसके अलावा कई खेतों में धान कटने को तैयार खड़ा हे। तेज हवा से धान की फसल खेत में गिर जाने से समस्या बढ़ गई है। अगर बारिश ज्यादा हुई तो गिरा धान काला पड़ जाएगा और पूरी तरह से खराब भी हो सकता है। तिल्ली की फसल भी गिरने से किसान परेशान हो उठे हैं। किसान रामचंद्र, रमेश कुमार, गिरजाशंकर आदि ने बताया कि बारिश से नुकसान नहीं है, लेकिन हवा चली तो उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। सूखे में बमुश्किल धान, गन्ना तैयार हुआ है, वह भी गिर गया है। किसानों को फसलों के नष्ट होने की चिंता सताने लगी है।
गन्ना की बंधाई कर फसल गिरने से बचाएं किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी एवं वरिष्ठ शस्य वैज्ञानिक डॉ. एनसी त्रिपाठी का कहना है कि तेज बारिश होने ओर हवा चलने पर भी अगले दिन धूप निकलने की दशा में फसलें गिरने से बच जाती हैं क्योंकि हवा के साथ धूप लगने से खेतों की मिट्टी से वाष्पन की तेज प्रक्रिया से सूखने लगती है। ऐसी स्थिति में पौधों की जड़ें भी मिट्टी नहीं छोड़ती, लेकिन दो दिन या इससे अधिक समय तक बूंदाबांदी और बारिश से खेतों की मृदा मुलायम पड़ जाती है। ऐसे में हवा तेज चलने पर पौधे उखड़ने लगते हैं। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार जिन पौधों में बालियां पड़ गई हैं, उनके गिरने पर फसल को बचाना संभव नहीं होगा। गन्ना किसानों से दो माह पहले से कहा जा रहा है कि वह अगस्त तक गन्ना की बंधाई कर दें। जिन किसानों ने इस काम में लापरवाही की, वह तत्काल गन्ना बांधें, अन्यथा थपेड़े तेज होने पर गन्ना फसल को नुकसान बढ़ जाएगा।