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सुभाषनगर में रेलवे के डॉट वाले पुल तक पहुंचा गर्रा, आवागमन किया बंद
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शाहजहांपुर के परौर के ग्राम मोहनपुर की बाजार में भरा रामगंगा की बाढ़ का पानी। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। बांधों और बैराजों से लगातार पानी छोड़े जाने से जिले से होकर बहने वाली नदियों में रविवार को छठे दिन उफान और बढ़ गया। शहर सटकर बहने वाली गर्रा का जलस्तर रविवार को 35 सेमी बढ़कर 148.50 मीटर हो गया। इससे शहर में सुभाषनगर से नगरिया मोड़ और रेलवे मालगोदाम की ओर जाने वाले रास्ते पर रेलवे के डॉट वाले पुराने पुल तक गर्रा का पानी पहुंच गया, जिससे आवागमन बंद हो गया। उधर, जलालाबाद और कलान तहसील में गंगा-रामगंगा में आई बाढ़ से आसपास के तमाम गांव टापू बन गए हैं। परौर क्षेत्र के नारायण नगला में भूमि कटान शुरू हो गया है।
नदियां चढ़ने की शुरुआत होने पर शहर के समीप गर्रा की तुलना में खन्नौत में पानी तेजी से बढ़ा था। इस कारण लोधीपुर से लेकर बिसरात घाट और आगे दलेलगंज तक खन्नौत के तटवर्ती क्षेत्रों में बने मकानों तक बाढ़ का पानी दस्तक देने लगा, लेकिन गर्रा में उफान सीमित बना रहा। बीती रात करीब दस बजे से गर्रा में पानी बढ़ना शुरू हुआ तो वह शहबाजनगर-किला की पुरानी रेलवे लाइन के लिए बनाए गए डॉट वाले पुल के नीचे से होकर सुभाषनगर के आबादी क्षेत्र में पहुंचने लगा। सुबह लोग सोकर उठे तो उन्हें मालगोदाम की ओर बढ़ते ही बाढ़ मेें डूबे आसपास के खेत तालाब बने नजर आए।
सुभाषनगर-मालगोदाम रोड पर बाढ़ के खतरे को देेखते प्रशासन ने डॉट वाले पुल से पहले मजार के पास बनी पुलिया पर स्लाइडिंग बैरियर लगाकर यातायात रोक दिया है। वहां ड्यूटी दे रहे होमगार्ड के जवान वीरेंद्र पाल सिंह ने लोगों को डूबे मार्ग पर आगे जाने से रोका। इसके बावजूद कई लोग पानी में होकर बाइकों और साइकिलों से निकलते रहे। वहां कुसुम वाटिका में जिन जमीनों की कुछ दिन पहले तक तेजी से प्लाटिंग हो रही थी, वह क्षेत्र भी बाढ़ में डूब गया। सुभाषनगर के खेतों में भरा पानी नाला चोक होने के कारण आगे बढ़ने के बजाय रेलवे लाइनों की ओर सिमट रहा है।
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आसपास के लोगों ने बताया कि एक कालोनाइजर ने तालाब खरीदकर उसे पाट दिया और इसी वजह से बाढ़ का पानी पूरे इलाके को जलमग्न कर रहा है। गर्रा के किनारे सुभाषनगर से लेकर ककरा, जियाखेल और बाला तिराही तक जिन खेतों में लौकी, बैंगन, करेला, कद्दू, तोरई, गोभी, मूली आदि सब्जियों की फसलें की गईं, वह सभी बाढ़ में डूब गई हैं। यही नहीं, शहर के गर्रा पुल से लेकर बरेली मोड़ बाईपास वाले पुल तक गर्रा के किनारे अमरूद के बाग भी जलमग्न हो गए।
तिलहर क्षेत्र के तमाम गांव गर्रा की बाढ़ से घिरे
तिलहर। तिलहर-निगोही मार्ग पर गांव जिकरीपुर और चितीबोझी बाढ़ से घिरकर टापू बन गए हैं। रविवार को विधायक रोशनलाल वर्मा नाव पर बैठकर इन गांवों में पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। गर्रा के तटवर्ती गांव ईश्वरा, बरहा मोहब्बतपुर, ढकिया बरहा, अहिया मोहनपुर, आजमाबाद,बिहारीपुर, रटा, बरैंचा, धन्यौरा आदि गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन सभी गांवों में एक सप्ताह से बिजली नहीं आ रही है। खेतों में फसलें जलमग्न हैं। भाजपा विधायक ने जिकरीपुर और चितीबोझी में सैकड़ों परिवारों को राहत सामग्री वितरित की।जिकरीपुर गांव के रामकुमार का पुत्र अमित, वीरेश की पत्नी रजनी देवी, कृपाल सिंह की पत्नी श्याम वती, गांव के वयोवृद्ध वेदपाल सहित तमाम लोग बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन कोई भी स्वास्थ्य टीम इन गांवों में नहीं पहुंच सकी है।प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांव जिकरीपुर और चितीबोझी में प्रशासन ने एक-एक नाव भेज दी है। इन नावों के सहारे लोग तिलहर मुख्यालय और आसपास गांव में आ जा रहे हैं।
गंगा-रामगंगा ने कटरी इलाके में मचाया हाहाकार
गंगा-रामगंगा में उफान बढ़ने से मिर्जापुर और परौर के कटरी क्षेत्र में बसे गांवों में हाहाकार मचा है। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर पहले से पानी चल रहा है और अब बीघापुर-सिठौली मार्ग भी जलमग्न हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बदायूं-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे पर शरण लिए हैं। गंगा-रामगंगा एकधार हो जाने से खरीफ की अधिकांश फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गईं। लोगों का कहना है कि इस तरह की बाढ़ वर्ष 2010 और 2011 में आई थी। जब लगभग 20 किमी के फासले से बहने वाली दोनो नदियां मिलकर एकधार हो गईं थीं। रामगंगा से बीघापुर, सिठौली, कसारी, चिकटिया, बहेरिया, मिर्जापुर का मोहल्ला कुतुलूपुर, भरतापुर, कीलापुर, माधौपुर, औरंगाबाद, अतरी, नवादा, पहरुआ, हरिहरपुर, मौजमपुर, देवनगर, रामनगर, जरीनपुर आदि गांव जलमग्न हो गए। इन गांवों के रास्तों में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। मिर्जापुर थाने से लगभग 50 मीटर आगे मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर बाढ़ का पानी आ गया है। थाने के सामने धर्मजीत सिंह इंटर कालेज भी जलमग्न हो गया है। रामगंगा पुल के पास बाढ़ के पानी के तेज बहाव से बदायूं-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया है।
परौर में रामगंगा में विलीन हुआ रामताल
परौर। रामगंगा की बाढ़ रामताल को अपने आगोश में लेने के बाद अब यहां की पूर्व रियासत के राजमहल के पीछे पहुंच गया है। परौर कसबे में पानी आने के साथ क्षेत्र के बिचपुरी, मोहनपुर, दहेलिया आदि गांव चारों ओर पानी से घिर गए हैं। बाढ़ और बारिश में फसलें गंवा चुके नारायणनगर पश्चिमी के किसानों की उपजाऊ जमीनें फिर कटने लगी हैं। मोहनपुर से बाढ़ वहां के तालाब के जरिए आगे दूसरे तालाब में पहुंचने से मोहन पुर भी दोनों तरफ से घिर गया है।
फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे के किनारे भरा पानी
रामगंगा की बाढ़ ने शनिवार रात से जलालाबाद से सटे इलाको में भी दस्तक दे दी है। गांव एलमनगर से नूरपुर करही को जाने वाली रोड के ऊपर से पानी गुजरने लगा है। कोलाघाट पुल से पहले गांव कसारी के पास कोला-बदायूं मार्ग पर मिट्टी धंस जान से रोड के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। कोला पुल से पहले बहगुल और रामगंगा नदियां एक हो गई हैं। गांवकसारी के पास मिट्टी बह जाने से रोड धंसने के कगार पर है। प्रशासन ने वहां मिट्टी से भरी बोरियां लगाकर रोड वनवे कर दिया है। जलालाबाद के तहसीलदार चमन लाल ने बताया कि क्षेत्र के प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। पूर्व विधायक नीरज कुशवाहा ने डीएम को पत्र भेजकर आपदाग्रस्त क्षेत्र में हुए फसली व आवासीय नुकसान का सर्वे करवाकर पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा राशि वितरित करवाए जाने की मांग की है।
अल्हागंज नगर पंचायत कार्यालय तक पहुंचा पानी
अल्हागंज। रामगंगा से क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप शुरू हो गया है। गांव भरथौली, दहेना, मनिहार, मऊ रसूलपुर, गोरा महुआ गाड, चंपतपुर, मऊ शाहजहांपुर आदि एक दर्जन गांवों से पानी टकरा रहा है। कटरा-बिल्हौर हाईवे के करीब भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जो कि तेजी से पुलिया से निकल रहा है। चंपतपुर- जेरा रहीमपुर के बीच संपर्क मार्ग भी पानी के बहाव से कट रहा है। कस्बे के मोहल्ला अंधुई तालाब में बाढ़ का पानी पहुंचकर पुलिया से निकल रहा है। एसडीएम जलालाबाद, एसओ प्रदीप सहरावत और राजस्व विभाग बाढ़ पर अपनी निगाह रखे हुए हैं। नदी के किनारे के गांवों में अलर्ट कराया जा चुका है। संवाद
सेहरामऊ दक्षिणी के कई गांवों का आवागमन ठप
सेहरामऊ दक्षिणी। जनपद मुख्यालय से कस्बा होते हुए रौरा फरीदापुर जाने वाले मार्ग पर नागरपाल गांव के समीप अभी हाल ही में पुल का निर्माण हुआ था। इस पुल से चांदापुर, पसगवां, चौहनापुर, सरोरा, सरोरी, सिसनई, कुतुआपुर, भरगवां, कासिमगंज, नौगवां, गुर्रा, बरेंग, कैलहा, कांकर, हंसुआ जाजू, भमौली आदि गांवों के लोग नदी पार जाते थे। खन्नौत व गर्रा नदी में आई बाढ़ से पानी रोड के ऊपर से निकलने लगा। इससे रोड भी जगह-जगह कटने लगी है।
बाढ़ से चारों ओर से घिर जाने से गांव के लोग बहुत भयभीत है। एक सप्ताह से घरों में रखा राशन खत्म हो रहा है। कुछ लोग एक दूसरे से राशन मांग कर काम चला रहे हैं। पीने के लिए नलों से आने वाला पानी पी रहे हैं। गांव की काफी लोग बीमार है। मेरा कई बीघा धान बाढ़ में डूब गया है।
- पातीराम, जिकरीपुर (तिलहर)
मेरा बेटा अमित कई दिन से बुखार से पीड़ित है, लेकिन चारों ओर पानी भरा होने से इलाज नहीं मिल रहा है। घर का राशन भी खत्म हो गया है। कल नाव पर बैठकर गेहूं दूसरे गांव से पिसाकर कर लाए थे। बहुत परेशानी हो रही है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए।
- रामकुमार, जिकरीपुर (तिलहर)
बाढ़ से गांव घिरे हुए एक सप्ताह हो गया है। आज विधायक राहत सामग्री लाए हैं। इससे पहले कोई भी यहां नहीं आया है। मेरी पत्नी रजनी देवी को बुखार आ रहा है, लेकिन दवाई भी नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-वीरेश कुमार, जिकरीपुर (तिलहर)
मेरी उम्र 70 साल हो गई है, लेकिन गांव में बाढ़ का ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। 15 साल पहले भी बाढ़ आई थी, लेकिन तब इतनी दिक्कत नहीं हुई। गांव की सड़क नीची बना देने से वह पानी में डूब गई है। मुझे भी बुखार आ रहा है, लेकिन मजबूर हूं क्योंकि दवाई नहीं मिल रही है।
- वेदपाल, जिकरीपुर (तिलहर)
जिन किसानों की फसलों का बीमा है, उन लोगों को बीमा का लाभ दिया जाएगा। गैर बीमित फसलों वाले किसानों को आपदा राहत कोष से लाभ दिया जाएगा। इसकी जांच पड़ताल के लिए बाढ़ प्रभावित ग्रामों में हल्का लेखपालों को लगा दिया गया है। वहीं सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिस पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - सौरभ भट्ट, प्रभारी एसडीएम, कलान
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नदियां चढ़ने की शुरुआत होने पर शहर के समीप गर्रा की तुलना में खन्नौत में पानी तेजी से बढ़ा था। इस कारण लोधीपुर से लेकर बिसरात घाट और आगे दलेलगंज तक खन्नौत के तटवर्ती क्षेत्रों में बने मकानों तक बाढ़ का पानी दस्तक देने लगा, लेकिन गर्रा में उफान सीमित बना रहा। बीती रात करीब दस बजे से गर्रा में पानी बढ़ना शुरू हुआ तो वह शहबाजनगर-किला की पुरानी रेलवे लाइन के लिए बनाए गए डॉट वाले पुल के नीचे से होकर सुभाषनगर के आबादी क्षेत्र में पहुंचने लगा। सुबह लोग सोकर उठे तो उन्हें मालगोदाम की ओर बढ़ते ही बाढ़ मेें डूबे आसपास के खेत तालाब बने नजर आए।
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आसपास के लोगों ने बताया कि एक कालोनाइजर ने तालाब खरीदकर उसे पाट दिया और इसी वजह से बाढ़ का पानी पूरे इलाके को जलमग्न कर रहा है। गर्रा के किनारे सुभाषनगर से लेकर ककरा, जियाखेल और बाला तिराही तक जिन खेतों में लौकी, बैंगन, करेला, कद्दू, तोरई, गोभी, मूली आदि सब्जियों की फसलें की गईं, वह सभी बाढ़ में डूब गई हैं। यही नहीं, शहर के गर्रा पुल से लेकर बरेली मोड़ बाईपास वाले पुल तक गर्रा के किनारे अमरूद के बाग भी जलमग्न हो गए।
तिलहर क्षेत्र के तमाम गांव गर्रा की बाढ़ से घिरे
तिलहर। तिलहर-निगोही मार्ग पर गांव जिकरीपुर और चितीबोझी बाढ़ से घिरकर टापू बन गए हैं। रविवार को विधायक रोशनलाल वर्मा नाव पर बैठकर इन गांवों में पहुंचे और बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी। गर्रा के तटवर्ती गांव ईश्वरा, बरहा मोहब्बतपुर, ढकिया बरहा, अहिया मोहनपुर, आजमाबाद,बिहारीपुर, रटा, बरैंचा, धन्यौरा आदि गांव भी बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इन सभी गांवों में एक सप्ताह से बिजली नहीं आ रही है। खेतों में फसलें जलमग्न हैं। भाजपा विधायक ने जिकरीपुर और चितीबोझी में सैकड़ों परिवारों को राहत सामग्री वितरित की।जिकरीपुर गांव के रामकुमार का पुत्र अमित, वीरेश की पत्नी रजनी देवी, कृपाल सिंह की पत्नी श्याम वती, गांव के वयोवृद्ध वेदपाल सहित तमाम लोग बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन कोई भी स्वास्थ्य टीम इन गांवों में नहीं पहुंच सकी है।प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित गांव जिकरीपुर और चितीबोझी में प्रशासन ने एक-एक नाव भेज दी है। इन नावों के सहारे लोग तिलहर मुख्यालय और आसपास गांव में आ जा रहे हैं।
गंगा-रामगंगा ने कटरी इलाके में मचाया हाहाकार
गंगा-रामगंगा में उफान बढ़ने से मिर्जापुर और परौर के कटरी क्षेत्र में बसे गांवों में हाहाकार मचा है। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर पहले से पानी चल रहा है और अब बीघापुर-सिठौली मार्ग भी जलमग्न हो गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग बदायूं-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे पर शरण लिए हैं। गंगा-रामगंगा एकधार हो जाने से खरीफ की अधिकांश फसलें बाढ़ की भेंट चढ़ गईं। लोगों का कहना है कि इस तरह की बाढ़ वर्ष 2010 और 2011 में आई थी। जब लगभग 20 किमी के फासले से बहने वाली दोनो नदियां मिलकर एकधार हो गईं थीं। रामगंगा से बीघापुर, सिठौली, कसारी, चिकटिया, बहेरिया, मिर्जापुर का मोहल्ला कुतुलूपुर, भरतापुर, कीलापुर, माधौपुर, औरंगाबाद, अतरी, नवादा, पहरुआ, हरिहरपुर, मौजमपुर, देवनगर, रामनगर, जरीनपुर आदि गांव जलमग्न हो गए। इन गांवों के रास्तों में पानी भर जाने से आवागमन बंद हो गया है। मिर्जापुर थाने से लगभग 50 मीटर आगे मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे पर बाढ़ का पानी आ गया है। थाने के सामने धर्मजीत सिंह इंटर कालेज भी जलमग्न हो गया है। रामगंगा पुल के पास बाढ़ के पानी के तेज बहाव से बदायूं-शाहजहांपुर स्टेट हाईवे कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया है।
परौर में रामगंगा में विलीन हुआ रामताल
परौर। रामगंगा की बाढ़ रामताल को अपने आगोश में लेने के बाद अब यहां की पूर्व रियासत के राजमहल के पीछे पहुंच गया है। परौर कसबे में पानी आने के साथ क्षेत्र के बिचपुरी, मोहनपुर, दहेलिया आदि गांव चारों ओर पानी से घिर गए हैं। बाढ़ और बारिश में फसलें गंवा चुके नारायणनगर पश्चिमी के किसानों की उपजाऊ जमीनें फिर कटने लगी हैं। मोहनपुर से बाढ़ वहां के तालाब के जरिए आगे दूसरे तालाब में पहुंचने से मोहन पुर भी दोनों तरफ से घिर गया है।
फर्रुखाबाद-बरेली हाईवे के किनारे भरा पानी
रामगंगा की बाढ़ ने शनिवार रात से जलालाबाद से सटे इलाको में भी दस्तक दे दी है। गांव एलमनगर से नूरपुर करही को जाने वाली रोड के ऊपर से पानी गुजरने लगा है। कोलाघाट पुल से पहले गांव कसारी के पास कोला-बदायूं मार्ग पर मिट्टी धंस जान से रोड के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। कोला पुल से पहले बहगुल और रामगंगा नदियां एक हो गई हैं। गांवकसारी के पास मिट्टी बह जाने से रोड धंसने के कगार पर है। प्रशासन ने वहां मिट्टी से भरी बोरियां लगाकर रोड वनवे कर दिया है। जलालाबाद के तहसीलदार चमन लाल ने बताया कि क्षेत्र के प्रभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। पूर्व विधायक नीरज कुशवाहा ने डीएम को पत्र भेजकर आपदाग्रस्त क्षेत्र में हुए फसली व आवासीय नुकसान का सर्वे करवाकर पीड़ितों को शीघ्र मुआवजा राशि वितरित करवाए जाने की मांग की है।
अल्हागंज नगर पंचायत कार्यालय तक पहुंचा पानी
अल्हागंज। रामगंगा से क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप शुरू हो गया है। गांव भरथौली, दहेना, मनिहार, मऊ रसूलपुर, गोरा महुआ गाड, चंपतपुर, मऊ शाहजहांपुर आदि एक दर्जन गांवों से पानी टकरा रहा है। कटरा-बिल्हौर हाईवे के करीब भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जो कि तेजी से पुलिया से निकल रहा है। चंपतपुर- जेरा रहीमपुर के बीच संपर्क मार्ग भी पानी के बहाव से कट रहा है। कस्बे के मोहल्ला अंधुई तालाब में बाढ़ का पानी पहुंचकर पुलिया से निकल रहा है। एसडीएम जलालाबाद, एसओ प्रदीप सहरावत और राजस्व विभाग बाढ़ पर अपनी निगाह रखे हुए हैं। नदी के किनारे के गांवों में अलर्ट कराया जा चुका है। संवाद
सेहरामऊ दक्षिणी के कई गांवों का आवागमन ठप
सेहरामऊ दक्षिणी। जनपद मुख्यालय से कस्बा होते हुए रौरा फरीदापुर जाने वाले मार्ग पर नागरपाल गांव के समीप अभी हाल ही में पुल का निर्माण हुआ था। इस पुल से चांदापुर, पसगवां, चौहनापुर, सरोरा, सरोरी, सिसनई, कुतुआपुर, भरगवां, कासिमगंज, नौगवां, गुर्रा, बरेंग, कैलहा, कांकर, हंसुआ जाजू, भमौली आदि गांवों के लोग नदी पार जाते थे। खन्नौत व गर्रा नदी में आई बाढ़ से पानी रोड के ऊपर से निकलने लगा। इससे रोड भी जगह-जगह कटने लगी है।
बाढ़ से चारों ओर से घिर जाने से गांव के लोग बहुत भयभीत है। एक सप्ताह से घरों में रखा राशन खत्म हो रहा है। कुछ लोग एक दूसरे से राशन मांग कर काम चला रहे हैं। पीने के लिए नलों से आने वाला पानी पी रहे हैं। गांव की काफी लोग बीमार है। मेरा कई बीघा धान बाढ़ में डूब गया है।
- पातीराम, जिकरीपुर (तिलहर)
मेरा बेटा अमित कई दिन से बुखार से पीड़ित है, लेकिन चारों ओर पानी भरा होने से इलाज नहीं मिल रहा है। घर का राशन भी खत्म हो गया है। कल नाव पर बैठकर गेहूं दूसरे गांव से पिसाकर कर लाए थे। बहुत परेशानी हो रही है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए।
- रामकुमार, जिकरीपुर (तिलहर)
बाढ़ से गांव घिरे हुए एक सप्ताह हो गया है। आज विधायक राहत सामग्री लाए हैं। इससे पहले कोई भी यहां नहीं आया है। मेरी पत्नी रजनी देवी को बुखार आ रहा है, लेकिन दवाई भी नहीं मिल पा रही है। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
-वीरेश कुमार, जिकरीपुर (तिलहर)
मेरी उम्र 70 साल हो गई है, लेकिन गांव में बाढ़ का ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। 15 साल पहले भी बाढ़ आई थी, लेकिन तब इतनी दिक्कत नहीं हुई। गांव की सड़क नीची बना देने से वह पानी में डूब गई है। मुझे भी बुखार आ रहा है, लेकिन मजबूर हूं क्योंकि दवाई नहीं मिल रही है।
- वेदपाल, जिकरीपुर (तिलहर)
जिन किसानों की फसलों का बीमा है, उन लोगों को बीमा का लाभ दिया जाएगा। गैर बीमित फसलों वाले किसानों को आपदा राहत कोष से लाभ दिया जाएगा। इसकी जांच पड़ताल के लिए बाढ़ प्रभावित ग्रामों में हल्का लेखपालों को लगा दिया गया है। वहीं सर्वे कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, जिस पर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। - सौरभ भट्ट, प्रभारी एसडीएम, कलान