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अमईखेड़ा गोशाला में एक हफ्ते में मरी दो गाय, चार दिन से एक तड़प रही
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जैतीपुर के अमईखेड़ा गांव की गोशाला में मरणासन्न हालत में जमीन पर पड़ी गाय।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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जैतीपुर। ब्लॉक मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर क्षेत्र की ग्राम पंचायत अमईपुर सड़ा में बनी गोशाला अव्यवस्था की शिकार है। गोशाला में गायों की दुर्दशा देख किसी को भी दुख पहुंच सकता है, लेकिन जिम्मदारों को उफ तक नहीं होती। कहने के लिए गोशाला बनी है पर गायों के लिए केवल टीनशेड डालकर नीचे खाने की चन्निया बना दी गई हैं। उसमें सड़ा भूसा डाल दिया जाता है, जबकि क्षेत्र में हरे चारे की भरमार है। बुधवार को अमर उजाला ने अमईखेड़ा गोशाला देखी। जहां इसका बहुत बुरा हाल दिखा।
गोशाला में 30 गायें हैं, जिनको हरा चारा तो दूर की बात दाना के नाम पर एक चुटकी गेहूं का आटा भी नहीं मिलता है। आलम यह है कि पिछले हफ्ते यहां दो गायों की बीमारी से तड़पकर मौत हो चुकी है अभी भी पिछले चार दिन से एक गाय तड़प रही है, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं आता। यहां जानकारी की तो पता चला कि न तो यहां डॉक्टर आते हैं न कोई अधिकारी या प्रतिनिधि, केवल गोशाला के नाम से कार्यवाही चलती रहती है। गायों के लिए पानी पीने का भी है कहने के लिए सरकारी हैंडपंप लगा हुआ है, लेकिन मोटर न होने के कारण गोसेवकों को दो समय का पानी नल से पिलाने में पसीना छूट जाता है। बारिश होने पर ही गाय नहाती है। गोशाला में दो सेवक लगे हैं, उनका काम गायों को चारा खिलाना, गोबर उठाना और पानी पिलाने के साथ ही बीमार गायों की सेवा करना है।
अभी गेहूं की कटाई को ज्यादा समय नहीं बीता प्रत्येक किसान के खेत में भूसा हुआ और बेचा भी गया, लेकिन यहां गायों को काला हो चुका सड़ा हुआ भूसा खिलाया जा रहा है। जिसमें हरा चारा मिलाया जाता है और न ही दाना, जिस कारण गाय मन से नहीं खातीं। नतीजा यह है कि सभी गाय बहुत कमजोर हैं, कुछ गाय तो ऐसी हैं जो रात को बैठ जाती हैं तो सुबह गोसवकों द्वारा रस्सी और बल्लियों के सहारे खड़ा किया जाता है।
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गोशाला में जो खराब काला भूसा है, वो बाहर से दान में मिला था। गो पलकों से गायों को अच्छा भूसा खिलाने को कहा गया है। अब गाय अच्छा भूसा खा रहीं हैं। बारिश हुई है चारा की बुवाई कराई जाएगी। बीमार गायों को डॉक्टर देख रहे हैं। - मनीष कुमार, ग्राम सचिव अमईपुर सड़ा
अमईपुर सड़ा गौशाला में गायों की बीमारी का कारण कमजोरी है। गायों को हरा चारा और दाना नहीं मिल पा रहा है, इसलिए उनकी एनर्जी माइनस में आ रही है। पानी लगा हुआ भूसा है, जो अच्छा नहीं है। हरा चारा और दाना गायों को मिले तो सही हो जाएंगी। बीमार गायों का इलाज किया जा रहा है। - डॉ. सर्वेनश कुमार, पशु चिकित्सा अधिकरी, जैतीपुर
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गोशाला में 30 गायें हैं, जिनको हरा चारा तो दूर की बात दाना के नाम पर एक चुटकी गेहूं का आटा भी नहीं मिलता है। आलम यह है कि पिछले हफ्ते यहां दो गायों की बीमारी से तड़पकर मौत हो चुकी है अभी भी पिछले चार दिन से एक गाय तड़प रही है, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं आता। यहां जानकारी की तो पता चला कि न तो यहां डॉक्टर आते हैं न कोई अधिकारी या प्रतिनिधि, केवल गोशाला के नाम से कार्यवाही चलती रहती है। गायों के लिए पानी पीने का भी है कहने के लिए सरकारी हैंडपंप लगा हुआ है, लेकिन मोटर न होने के कारण गोसेवकों को दो समय का पानी नल से पिलाने में पसीना छूट जाता है। बारिश होने पर ही गाय नहाती है। गोशाला में दो सेवक लगे हैं, उनका काम गायों को चारा खिलाना, गोबर उठाना और पानी पिलाने के साथ ही बीमार गायों की सेवा करना है।
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अभी गेहूं की कटाई को ज्यादा समय नहीं बीता प्रत्येक किसान के खेत में भूसा हुआ और बेचा भी गया, लेकिन यहां गायों को काला हो चुका सड़ा हुआ भूसा खिलाया जा रहा है। जिसमें हरा चारा मिलाया जाता है और न ही दाना, जिस कारण गाय मन से नहीं खातीं। नतीजा यह है कि सभी गाय बहुत कमजोर हैं, कुछ गाय तो ऐसी हैं जो रात को बैठ जाती हैं तो सुबह गोसवकों द्वारा रस्सी और बल्लियों के सहारे खड़ा किया जाता है।
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गोशाला में जो खराब काला भूसा है, वो बाहर से दान में मिला था। गो पलकों से गायों को अच्छा भूसा खिलाने को कहा गया है। अब गाय अच्छा भूसा खा रहीं हैं। बारिश हुई है चारा की बुवाई कराई जाएगी। बीमार गायों को डॉक्टर देख रहे हैं। - मनीष कुमार, ग्राम सचिव अमईपुर सड़ा
अमईपुर सड़ा गौशाला में गायों की बीमारी का कारण कमजोरी है। गायों को हरा चारा और दाना नहीं मिल पा रहा है, इसलिए उनकी एनर्जी माइनस में आ रही है। पानी लगा हुआ भूसा है, जो अच्छा नहीं है। हरा चारा और दाना गायों को मिले तो सही हो जाएंगी। बीमार गायों का इलाज किया जा रहा है। - डॉ. सर्वेनश कुमार, पशु चिकित्सा अधिकरी, जैतीपुर