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कोर्ट के आदेश के बाद भी आरोपियों को नहीं मिली कोस डायरी
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शाहजहांपुर। चार्जशीट दाखिल होने के दो सप्ताह बाद भी आरोपियों को केस डायरी की कॉपी बुधवार शाम तक नहीं मिल पाई। जबकि कोर्ट की ओर से विवेचक को केस डायरी उपलब्ध कराने का आदेश दिया जा चुका है। केस डायरी न मिलने से आरोपियों के अधिवक्ता आगे कानूनी लड़ाई की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
वकील ओम सिंह की ओर से 25 अगस्त को छात्रा और उसके तीन दोस्त संजय, सचिन और विक्रम के खिलाफ चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये फिरौती मांगने की रिपोर्ट चौक कोतवाली में दर्ज कराई गई थी। इस मामले में दूसरी रिपोर्ट चिन्मयानंद के खिलाफ छात्रा के पिता ने 27 अगस्त लिखाई थी। हाईकोर्ट की निगरानी में इन दोनों मामलों की विवेचना एसआईटी ने की थी। अधिवक्ता ओम सिंह की ओर से लिखाए गए मुकदमे के विवेचक एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर सुरेंद्र कटियार और सह विवेचक दरोगा संजय शुक्ला रहे। जबकि छात्रा के पिता की ओर से लिखाए गए मुकदमे में विवेचक एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर पूनम और सह विवेचक दरोगा दलवीर सिंह हैं। एसआईटी ने दोनों मामलों की विवेचना पूरी करने के बाद छह नवंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने 18 नवंबर को चिन्मयानंद की पेशी के दौरान सीजेएम कोर्ट से एसआईटी की ओर से दाखिल केस डायरी की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की थी। जिस कोर्ट ने केस डायरी देने का आदेश भी दिया था। वहीं छात्रा के दोस्तों के वकील प्रमोद तिवारी की ओर से संजय, सचिन, विक्रम के खिलाफ दर्ज मामले में केस डायरी की मांग की है। इस पर भी कोर्ट की ओर से केस डायरी उपलब्ध कराने का आदेश दे चुका है। बावजूद इसके आरोपियों को केस डायरी नहीं मिल पाई है। कानून के जानकारों के मुताबिक चार्जशीट दाखिल होने तुरंत बाद आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी मुहैया करा दी जाती है, लेकिन कापी एक-दो दिन में देने की बात कही गई थी ।
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वकील ओम सिंह की ओर से 25 अगस्त को छात्रा और उसके तीन दोस्त संजय, सचिन और विक्रम के खिलाफ चिन्मयानंद से पांच करोड़ रुपये फिरौती मांगने की रिपोर्ट चौक कोतवाली में दर्ज कराई गई थी। इस मामले में दूसरी रिपोर्ट चिन्मयानंद के खिलाफ छात्रा के पिता ने 27 अगस्त लिखाई थी। हाईकोर्ट की निगरानी में इन दोनों मामलों की विवेचना एसआईटी ने की थी। अधिवक्ता ओम सिंह की ओर से लिखाए गए मुकदमे के विवेचक एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर सुरेंद्र कटियार और सह विवेचक दरोगा संजय शुक्ला रहे। जबकि छात्रा के पिता की ओर से लिखाए गए मुकदमे में विवेचक एसआईटी में शामिल इंस्पेक्टर पूनम और सह विवेचक दरोगा दलवीर सिंह हैं। एसआईटी ने दोनों मामलों की विवेचना पूरी करने के बाद छह नवंबर को चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर दी थी। चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने 18 नवंबर को चिन्मयानंद की पेशी के दौरान सीजेएम कोर्ट से एसआईटी की ओर से दाखिल केस डायरी की कॉपी उपलब्ध कराने की मांग की थी। जिस कोर्ट ने केस डायरी देने का आदेश भी दिया था। वहीं छात्रा के दोस्तों के वकील प्रमोद तिवारी की ओर से संजय, सचिन, विक्रम के खिलाफ दर्ज मामले में केस डायरी की मांग की है। इस पर भी कोर्ट की ओर से केस डायरी उपलब्ध कराने का आदेश दे चुका है। बावजूद इसके आरोपियों को केस डायरी नहीं मिल पाई है। कानून के जानकारों के मुताबिक चार्जशीट दाखिल होने तुरंत बाद आरोपियों को चार्जशीट की कॉपी मुहैया करा दी जाती है, लेकिन कापी एक-दो दिन में देने की बात कही गई थी ।
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