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चमोली में जल प्रलय से निकली सिल्ट से ढाई घाट पर गंगा हुई मैली
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मिर्जापुर के ढाईघाट में गंगा का जल मटमैला हो गया है। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर/मिर्जापुर। उत्तराखंड के चमोली में दस दिन पहले ग्लेशियर फटने से हुई जल प्रलय में पहाड़ों का मलबा सिल्ट (महीन मटमैली रेत) बनकर गंगा के प्रवाह के साथ नरौरा और बदायूं जनपद होते हुए जलालाबाद क्षेत्र के ढाई घाट तक पहुंचने लगा है। बुधवार शाम तक गंगा जल की रंगत और उसका प्रवाह सामान्य बना रहा लेकिन बृहस्पतिवार सुबह से वहां सिल्ट पहुंचने से गंगाजल मटमैला दिखने लगा है। इससे गंगा तट पर कल्पवास कर रहे साधु-संतों और अन्य श्रद्धालुओं को सिल्ट से प्रदूषित गंगा मेें स्नान को मजबूर होना पड़ रहा है और उनके समक्ष पेयजल का संकट भी पैदा हो गया है। सिंचाई विभाग के अभियंताओं का कहना है कि गंगाजल की सिल्ट बैठने और उसे सामान्य होने में दो से तीन दिन लग सकते हैं।
ढाई घाट पर गंगा तट के समानान्तर माघ मेला करीब दो किमी क्षेत्र में फैलाव लिए हुए है। इस वर्ष कोरोना संकट के कारण जिला पंचायत ने गत वर्षों की तरह बिजली, पानी, सफाई के प्रबंध भी नहीं किए। इसके बावजूद आसपास के जनपदों से आए सैकड़ों साधु-संत और श्रद्धालु वहां अपने टेंट-राउटी आदि लगाकर कल्पवास कर रहे हैं। बाद में उनकी पेयजल सुविधा के लिए जिला पंचायत की और से मेला क्षेत्र में 40 हैंडपंप लगवा दिए गए। इसकेे बावजूद तमाम श्रद्धालु गंगाजल को पीने के लिए प्रयोग करते रहे क्योंकि तब तक नदी मेें स्वच्छ पानी का पर्याप्त प्रवाह बना रहा। चमोली में जल प्रलय की सूचना के बाद प्रदेश सरकार द्वारा गंगा के तटवर्ती जनपदों मेें अलर्ट घोषित किए जाने पर कलान की एसडीएम बरखा सिंह ने तट के आसपास और नदी की दो धाराओं के बीच रेतीले टापू पर टेंट लगाकर भजन कीर्तन में रमे श्रद्धालुओं को तट से दूर हटा दिया था।
जल प्रलय के दो दिन बाद ढाई घाट पर गंगा में पानी बढ़ा, लेकिन बाद में पानी कम होने पर कई साधु एकांत साधना के लिए फिर से टापू जा बसे। बाद में एक सप्ताह तक गंगाजल शुद्ध बना रहा, लेकिन नदी में पानी का प्रवाह कम होने लगा। इस बीच, हरिद्वार और नरौरा बैराज मेें रोके गए मलबा युक्त पानी का बहाव शुरू हुआ तो नदी की रंगत बदलने लगी। कल्पवासियों के अनुसार बुधवार सायं संध्या पूजन और आरती के समय गंगाजल नीला झिलमिलाता दिख रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार की भोर के समय स्नान के लिए नदी मेें उतरने पर सिल्ट और गाद से पानी काफी कम और उसका रंग मटमैला हो चुका था। चूंकि, गंगाजल पीने लायक नहीं रहा, इसलिए तमाम श्रद्धालुओं को हैंडपंपों से पानी लेने के लिए अपने टेंट से काफी दूर जाना पड़ा।
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गंगा समग्र बैठक में होगी पानी छोड़ने की मांग
मिर्जापुर। गंगा समग्र बृज प्रांत के स्वच्छता प्रमुख मैथिलीशरण गुप्ता ने कहा कि गंगा को निर्मल और अविरल रखने के लिए 20 फरवरी को प्रयागराज में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। बैठक में माघ पूर्णिमा से पहले पर्याप्त जल छोड़े जाने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि जिला पंचायत के प्रबंधन में वर्ष 1923 से ढाईघाट गंगातट पर लग रहे माघ मेला रामनगरिया का आयोजन इस वर्ष प्रशासन द्वारा रद्द किए जाने का प्रकरण भी इस बैठक में प्रमुखता से उठाया जायेगा। संवाद
कल्पवासी श्रद्धालुओं की बात
बुधवार से गंगा का जलस्तर घटने के साथ पहाड़ों से आई सिल्ट से गंगाजल मटमैला हो गया है। इससे श्रद्धालुओं को प्रदूषित जल में स्नान करना पड़ रहा है। - मैथिलीशरण गुप्त, स्वच्छता प्रमुख, गंगा समग्र (बृज प्रांत), ग्राम ढाई
गंगा में पहाड़ों की गाद आने और जलस्तर घट जाने से नदी प्रदूषित हो गई है। गंगा में अतिरिक्त जल छोड़ने पर स्नान और पेयजल की समस्या का निदान हो जाएगा। - रमेशचन्द्र औदीच्य, पंडा, ढाईघाट
गंगा में पहाड़ों से मिट्टी मिला जल आने से कल्पवासियों के सामने पेयजल की समस्या है। समस्या के निदान को गंगा में जल का प्रवाह बढ़ाया जाना चाहिए। - अवधेश कुमार औदिच्य, गंगा सेवा समिति, ढाईघाट
माघ मेले में इस बार पेयजल के लिए सिर्फ 40 हैंडपंप लगाए गए हैं, जो कल्पवासियों को देखते बहुत कम हैं। वह मिट्टी मिश्रित गंगाजल से प्यास बुझा रहे हैं। - महंत नरसिंह दास आचार्य, श्यामबाग आश्रम, मेला ढाईघाट
हरिद्वार से प्रयागराज तक माघ मेला श्रद्धालुओं को शुद्ध जल उपलब्ध कराने को सकार प्रयासरत है। पहाड़ से गंगा में बहकर आई सिल्ट से नदी में पानी प्रदूषित होने की क्षेत्रीय सहायक अभियंता से अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि पानी सिल्ट के कारण मटमैला हुआ है तो नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी की निकासी होने पर यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। - सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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ढाई घाट पर गंगा तट के समानान्तर माघ मेला करीब दो किमी क्षेत्र में फैलाव लिए हुए है। इस वर्ष कोरोना संकट के कारण जिला पंचायत ने गत वर्षों की तरह बिजली, पानी, सफाई के प्रबंध भी नहीं किए। इसके बावजूद आसपास के जनपदों से आए सैकड़ों साधु-संत और श्रद्धालु वहां अपने टेंट-राउटी आदि लगाकर कल्पवास कर रहे हैं। बाद में उनकी पेयजल सुविधा के लिए जिला पंचायत की और से मेला क्षेत्र में 40 हैंडपंप लगवा दिए गए। इसकेे बावजूद तमाम श्रद्धालु गंगाजल को पीने के लिए प्रयोग करते रहे क्योंकि तब तक नदी मेें स्वच्छ पानी का पर्याप्त प्रवाह बना रहा। चमोली में जल प्रलय की सूचना के बाद प्रदेश सरकार द्वारा गंगा के तटवर्ती जनपदों मेें अलर्ट घोषित किए जाने पर कलान की एसडीएम बरखा सिंह ने तट के आसपास और नदी की दो धाराओं के बीच रेतीले टापू पर टेंट लगाकर भजन कीर्तन में रमे श्रद्धालुओं को तट से दूर हटा दिया था।
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जल प्रलय के दो दिन बाद ढाई घाट पर गंगा में पानी बढ़ा, लेकिन बाद में पानी कम होने पर कई साधु एकांत साधना के लिए फिर से टापू जा बसे। बाद में एक सप्ताह तक गंगाजल शुद्ध बना रहा, लेकिन नदी में पानी का प्रवाह कम होने लगा। इस बीच, हरिद्वार और नरौरा बैराज मेें रोके गए मलबा युक्त पानी का बहाव शुरू हुआ तो नदी की रंगत बदलने लगी। कल्पवासियों के अनुसार बुधवार सायं संध्या पूजन और आरती के समय गंगाजल नीला झिलमिलाता दिख रहा था, लेकिन बृहस्पतिवार की भोर के समय स्नान के लिए नदी मेें उतरने पर सिल्ट और गाद से पानी काफी कम और उसका रंग मटमैला हो चुका था। चूंकि, गंगाजल पीने लायक नहीं रहा, इसलिए तमाम श्रद्धालुओं को हैंडपंपों से पानी लेने के लिए अपने टेंट से काफी दूर जाना पड़ा।
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गंगा समग्र बैठक में होगी पानी छोड़ने की मांग
मिर्जापुर। गंगा समग्र बृज प्रांत के स्वच्छता प्रमुख मैथिलीशरण गुप्ता ने कहा कि गंगा को निर्मल और अविरल रखने के लिए 20 फरवरी को प्रयागराज में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में शामिल होने जा रहे हैं। बैठक में माघ पूर्णिमा से पहले पर्याप्त जल छोड़े जाने की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि जिला पंचायत के प्रबंधन में वर्ष 1923 से ढाईघाट गंगातट पर लग रहे माघ मेला रामनगरिया का आयोजन इस वर्ष प्रशासन द्वारा रद्द किए जाने का प्रकरण भी इस बैठक में प्रमुखता से उठाया जायेगा। संवाद
कल्पवासी श्रद्धालुओं की बात
बुधवार से गंगा का जलस्तर घटने के साथ पहाड़ों से आई सिल्ट से गंगाजल मटमैला हो गया है। इससे श्रद्धालुओं को प्रदूषित जल में स्नान करना पड़ रहा है। - मैथिलीशरण गुप्त, स्वच्छता प्रमुख, गंगा समग्र (बृज प्रांत), ग्राम ढाई
गंगा में पहाड़ों की गाद आने और जलस्तर घट जाने से नदी प्रदूषित हो गई है। गंगा में अतिरिक्त जल छोड़ने पर स्नान और पेयजल की समस्या का निदान हो जाएगा। - रमेशचन्द्र औदीच्य, पंडा, ढाईघाट
गंगा में पहाड़ों से मिट्टी मिला जल आने से कल्पवासियों के सामने पेयजल की समस्या है। समस्या के निदान को गंगा में जल का प्रवाह बढ़ाया जाना चाहिए। - अवधेश कुमार औदिच्य, गंगा सेवा समिति, ढाईघाट
माघ मेले में इस बार पेयजल के लिए सिर्फ 40 हैंडपंप लगाए गए हैं, जो कल्पवासियों को देखते बहुत कम हैं। वह मिट्टी मिश्रित गंगाजल से प्यास बुझा रहे हैं। - महंत नरसिंह दास आचार्य, श्यामबाग आश्रम, मेला ढाईघाट
हरिद्वार से प्रयागराज तक माघ मेला श्रद्धालुओं को शुद्ध जल उपलब्ध कराने को सकार प्रयासरत है। पहाड़ से गंगा में बहकर आई सिल्ट से नदी में पानी प्रदूषित होने की क्षेत्रीय सहायक अभियंता से अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि पानी सिल्ट के कारण मटमैला हुआ है तो नरौरा बैराज से अतिरिक्त पानी की निकासी होने पर यह समस्या जल्द दूर हो जाएगी। - सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग