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भाजपा के सामने किला बचाने की चुनौती, बसपा-सपा को बेहतर प्रदर्शन की आस

Mon, 10 Jan 2022 12:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jan 2022 12:21 AM IST
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Challenge to save fort before BJP, BSP-SP hope for better performance
शाहजहांपुर। 2017 के विधानसभा चुनाव में अभूतपूर्व प्रदर्शन कर जिले की छह में से पांच सीटों पर कब्जा करने वाली भाजपा इस बार एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास कर रही है। वहीं बसपा 2007 और सपा 2012 के बेहतर प्रदर्शन को दोहराना चाहते हैं। कांग्रेस का 2002 के बाद से कोई विधायक जिले में नहीं बन पाया है। 2002 में तिलहर सीट से वीरेंद्र सिंह मुन्ना कांग्रेस से विधायक बने थे। वर्तमान में उनके बेटे वीर विक्रम सिंह प्रिंस भाजपा से कटरा सीट से विधायक हैं।
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सपा-कांग्रेस ने मिलकर पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था। छह सीटों में से पांच पर भाजपा ने जीत हासिल की थी, जबकि सपा के खाते में केवल जलालाबाद सीट गई थी। शेष पांच स्थानों पर सपा दूसरे नंबर पर रही थी। नगर विधानसभा सीट में भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना को 100734 वोट मिले थे, जबकि सपा के तनवीर खां 81531 वोट पा सके थे। ददरौल विधानसभा सीट पर भाजपा के मानवेंद्र सिंह ने 86435 मत पाए थे। 69037 वोट पाकर सपा के राममूर्ति सिंह वर्मा दूसरे नंबर पर रहे थे। कटरा सीट पर भाजपा के वीर विक्रम सिंह को 76509 वोट मिले थे। दूसरे स्थान पर रहे सपा के राजेश यादव को 59779 वोट मिले थे।
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सबसे कड़ा मुकाबला तिलहर सीट पर हुआ था। यहां से भाजपा के उम्मीदवार रोशलाल वर्मा को 81770 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस-सपा के संयुक्त उम्मीदवार जितिन प्रसाद ने 76055 वोट हासिल किए थे। हार-जीत का अंतर महज 5715 वोट था। जलालाबाद में सपा प्रत्याशी शरदवीर सिंह को भाजपा के मनोज कश्यप ने कड़ी टक्कर दी थी। शरदवीर सिंह को 75326 वोट मिले थे, जबकि मनोज कश्यप 66029 वोट पाकर 9, 297 वोटों से चूक गए थे।
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सबसे बड़ी जीत पुवायां सीट पर भाजपा को मिली थी। भाजपा के चेतराम को 126635 वोट मिले थे, जबकि सपा की प्रत्याशी शकुंतला देवी महज 54218 वोट पा सकीं थीं। चेतराम ने 72417 वोटों से जीत हासिल की थी। कुल मिलाकर 2017 का चुनाव भाजपा बनाम सपा होकर रह गया था। कांग्रेस ने महज एक सीट पर प्रत्याशी खड़ा किया था। बसपा कहीं पर दूसरे नंबर पर नहीं आ सकी थी।
जबकि 2012 के विधानसभा चुनाव में परिदृश्य एकदम अलग था। नगर सीट से भाजपा के सुरेश कुमार खन्ना के अजेय इतिहास को छोड़ दिया जाए तो किसी भी सीट पर भाजपा दूसरे नंबर पर भी नहीं आ सकी थी। शेष पांच सीटों पर बसपा और सपा ही पहले-दूसरे नंबर पर लड़ते दिखाई दिए थे। सपा के खाते में ददरौल, कटरा, पुवायां सीट गई थीं, जबकि बसपा ने तिलहर और जलालाबाद में जीत हासिल की थी। भाजपा को सिर्फ शहर सीट से संतोष करना पड़ा था। तब बसपा के विधायक बने नीरज मौर्य और रोशन लाल वर्मा फिलहाल भाजपा में हैं।

रोशनलाल वर्मा तिलहर से विधायक हैं तो नीरज मौर्य जलालाबाद से टिकट चाह रहे हैं। 2007 के विधानसभा चुनाव में भी नगर विधानसभा को छोड़कर भाजपा किसी सीट पर दूसरे नंबर पर भी नहीं आ सकी थी। ददरौल से बसपा के अवधेश वर्मा, निगोही से रोशनलाल वर्मा, जलालाबाद से नीरज मौर्य विधायक बने थे। वहीं कटरा से सपा के राजेश यादव और पुवायां से मिथलेश कुमार जीते थे। हालांकि बाद में मिथलेश कुमार के सांसद बनने पर खाली हुई पुवायां सीट से उपचुनाव में बसपा के धीरेंद्र प्रसाद विधायक बने थे। तब कांग्रेस के चेतराम दूसरे नंबर पर आए थे। (संवाद)
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