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भूकंप में पूर्णागिरि धाम में फंसे भक्त लौटे
पुवायां (शाहजहांपुर)
Updated Wed, 29 Apr 2015 11:28 PM IST
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पूर्णागिरि धाम गए पुवायां के कई भक्त भूकंप के समय माता के दर्शन कर रहे थे। अचानक पहाड़ हिलना शुरू हुआ। पुलिस के जवान और पुजारी ने बताया कि भूकंप आ गया है। लोग घबरा गए और मां के नाम का जयकारा लगाने लगे।
गांव सिरखिड़ी निवासी कवि डॉ. रामबाबू शुक्ला अपने साथी दवा व्यवसायी मोहल्ला गढ़ी निवासी पवन मिश्रा और वकील राघवेंद्र शुक्ला, गांव ढकिया के पूर्व माध्यमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जाह्नवी नंदन के साथ पूर्णागिरि धाम गए थे। शनिवार को जब पहला भूकंप आया तो सभी लोग मां के दरबार में मत्था टेक रहे थे। जिस पहाड़ पर मां का मंदिर वह अचानक हिलने लगा। डॉ. रामबाबू बताते हैं कि पहले तो उन्हें वहम हुआ। इस बीच मंदिर के पुजारी और वहां तैनात सिपाही सीढ़ियों की ओर बढ़ चले और बताया कि सभी लोग सावधान हो जाएं, भूकंप आ गया है। इस बीच पवन मिश्रा ने कहा कि जो होना है होगा, इसे कोई नहीं बदल सकता तो बेवजह परेशान क्यों हुआ जाए। पवन की जिंदादिली से सभी साथियों की हिम्मत बंधी और सभी लोग मां का जयकारा लगाने लगे।
कुछ ही देर में भूकंप के झटके शांत हो गए और माता रानी की कृपा से किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ। इसके बाद सभी लोग नीचे उतर आए। महेंद्रनगर जाने के लिए टनकपुर पहुंचे तो नेपाल से तमाम लोगों की भीड़ भारत की ओर आ रही थी। नेपाल के लोगों ने बताया कि भूकंप से नेपाल में भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद सभी ने सिद्धबाबा के दर्शन का विचार त्याग दिया और घरों को लौट आए।
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गांव सिरखिड़ी निवासी कवि डॉ. रामबाबू शुक्ला अपने साथी दवा व्यवसायी मोहल्ला गढ़ी निवासी पवन मिश्रा और वकील राघवेंद्र शुक्ला, गांव ढकिया के पूर्व माध्यमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जाह्नवी नंदन के साथ पूर्णागिरि धाम गए थे। शनिवार को जब पहला भूकंप आया तो सभी लोग मां के दरबार में मत्था टेक रहे थे। जिस पहाड़ पर मां का मंदिर वह अचानक हिलने लगा। डॉ. रामबाबू बताते हैं कि पहले तो उन्हें वहम हुआ। इस बीच मंदिर के पुजारी और वहां तैनात सिपाही सीढ़ियों की ओर बढ़ चले और बताया कि सभी लोग सावधान हो जाएं, भूकंप आ गया है। इस बीच पवन मिश्रा ने कहा कि जो होना है होगा, इसे कोई नहीं बदल सकता तो बेवजह परेशान क्यों हुआ जाए। पवन की जिंदादिली से सभी साथियों की हिम्मत बंधी और सभी लोग मां का जयकारा लगाने लगे।
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कुछ ही देर में भूकंप के झटके शांत हो गए और माता रानी की कृपा से किसी का बाल भी बांका नहीं हुआ। इसके बाद सभी लोग नीचे उतर आए। महेंद्रनगर जाने के लिए टनकपुर पहुंचे तो नेपाल से तमाम लोगों की भीड़ भारत की ओर आ रही थी। नेपाल के लोगों ने बताया कि भूकंप से नेपाल में भारी नुकसान हुआ है। इसके बाद सभी ने सिद्धबाबा के दर्शन का विचार त्याग दिया और घरों को लौट आए।
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