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चौक सर्राफा मार्केट बंद रखकर व्यापारियों ने दिया धरना
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 10 Feb 2016 08:33 PM IST
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संबंधी आदेश वापस नहीं लिए जाने के विरोध में चौक सर्राफा के कारोबारियों
ने बुधवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। साथ ही केंद्र सरकार के खिलाफ
प्रदर्शन करके धरना दिया और कलक्ट्रेट जाकर सिटी मजिस्ट्रेट नरेंद्र सिंह
को वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
इस मुद्दे को लेकर शहर की विभिन्न सर्राफा यूनियनें पहले भी कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन दे चुकी हैं। इसके बावजूद सरकार के स्तर से कोई राहत नहीं मिलने पर चौक सर्राफा मार्केट के कारोबारी आंदोलन के मूड में आ गए। वहां की सर्राफा यूनियन के अध्यक्ष जवाहर लाल रस्तोगी और संरक्षक सुरेंद्र सिंह सेठ के नेतृत्व में कारोबारी सुबह इकठ्ठा हुए और प्रतिष्ठानों के ताले नहीं खोलने का निर्णय किया।
प्रदर्शन के बाद धरना स्थल पर हुई बैठक में वक्ताओं ने पैन कार्ड की अनिवार्यता को अव्यवहारिक और सर्राफा कारोबार को चोट पहुंचाने वाला बताया। वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि प्रधान देश में खेती से होने वाली आय करमुक्त रखी गई है। इस कारण 123 करोड़ की आबादी में केवल 4.25 करोड़ लोग आयकर रिटर्न, जेवरों में निवेश करने वाली अधिकांश ग्रामीण महिलाओं के पास पैन कार्ड नहीं हैं। ऐसे में यह बाध्यता वापस नहीं लिए जाने पर व्यवसाय प्रभावित होगा।
इस मुद्दे को लेकर शहर की विभिन्न सर्राफा यूनियनें पहले भी कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के नाम ज्ञापन दे चुकी हैं। इसके बावजूद सरकार के स्तर से कोई राहत नहीं मिलने पर चौक सर्राफा मार्केट के कारोबारी आंदोलन के मूड में आ गए। वहां की सर्राफा यूनियन के अध्यक्ष जवाहर लाल रस्तोगी और संरक्षक सुरेंद्र सिंह सेठ के नेतृत्व में कारोबारी सुबह इकठ्ठा हुए और प्रतिष्ठानों के ताले नहीं खोलने का निर्णय किया।
प्रदर्शन के बाद धरना स्थल पर हुई बैठक में वक्ताओं ने पैन कार्ड की अनिवार्यता को अव्यवहारिक और सर्राफा कारोबार को चोट पहुंचाने वाला बताया। वित्त मंत्री अरुण जेटली को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कृषि प्रधान देश में खेती से होने वाली आय करमुक्त रखी गई है। इस कारण 123 करोड़ की आबादी में केवल 4.25 करोड़ लोग आयकर रिटर्न, जेवरों में निवेश करने वाली अधिकांश ग्रामीण महिलाओं के पास पैन कार्ड नहीं हैं। ऐसे में यह बाध्यता वापस नहीं लिए जाने पर व्यवसाय प्रभावित होगा।