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चावल खरीद पर अपनाई जा रही दोहरी नीति
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 18 Oct 2015 08:50 PM IST
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राइस मिलर्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चावल खरीद में भारतीय खाद्य निगम की दोहरी नीति अपनाए जाने का आरोप लगाया है। पत्र के माध्यम से मिलर्स को उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने की गुहार लगाई गई है।
एसोसिएशन अध्यक्ष रमाकांत मोदी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि भारतीय खाद्य निगम के तानाशाहीपूर्ण रवैया से भयभीत होकर चावल मिल मालिक कस्टम मिलिंग कार्य से कतराने लगे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में सरकारी योजना का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं लगता और चावल उद्योगों के सामने भारी संकट खड़ा हो रहा है। मोदी ने कहा कि भारत सरकार ने चावल की लेवी खत्म कर दी है, इसलिए अब कस्टम मिलिंग से सरकार चावल ले रही है। निगम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की नीयत से अनावश्यक आपत्तियां लगाकर कस्टम मिल्स राइस की लाट वापस कर रही है।
उन्होंने बताया कि नए सर्कुलर के तहत चावल का वजन केवल 10 प्रतिशत तौल कर ही तकपट्टी के आधार किया जाएगा और धर्मकांटा नहीं कराया जाएगा। जबकि हमेशा ही धर्मकांटा तौल के आधार पर ही चावल स्वीकारा जाता रहा है। नए नियम से मिलर्स का शोषण होगा। निगम द्वारा कुल वजन से 665 ग्राम वारदाना काटकर चावल का वजन लिखा जाता है और वारदाना कम वजन होने का पैसा अलग से काट लिया जाता है। इस तरह चावल अधिक चला जाता है। चूंकि वारदाना जूट का होता है, इसलिए दो-तीन बार कट्टा विभिन्न कारणों से फट जाता है और चावल गिरता रहता है, कुछ चावल नमी होने केे कारण सूख की श्रेणी में आ जाता है। ऐसी अवस्था में ढाई सौ ग्राम से अधिक वजन भी कम हो सकता है। ऐसी दशा में पूरी लाट वापस करना घोर अन्याय है।
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अध्यक्ष ने कहा कि निगम चावल को दस प्रतिशत तौल कर भंडारित करेगा और एजेंसियों को इशू शत प्रतिशत धर्मकांटा तौल पर करेगी। इस प्रकार की दोहरी नीति अपनाना किसी भी नियम-कानून में मान्य नहीं है। इसलिए इस नियम में बदलाव किया जाए।
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एसोसिएशन अध्यक्ष रमाकांत मोदी ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बताया कि भारतीय खाद्य निगम के तानाशाहीपूर्ण रवैया से भयभीत होकर चावल मिल मालिक कस्टम मिलिंग कार्य से कतराने लगे हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में सरकारी योजना का लक्ष्य पूरा होना संभव नहीं लगता और चावल उद्योगों के सामने भारी संकट खड़ा हो रहा है। मोदी ने कहा कि भारत सरकार ने चावल की लेवी खत्म कर दी है, इसलिए अब कस्टम मिलिंग से सरकार चावल ले रही है। निगम भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की नीयत से अनावश्यक आपत्तियां लगाकर कस्टम मिल्स राइस की लाट वापस कर रही है।
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उन्होंने बताया कि नए सर्कुलर के तहत चावल का वजन केवल 10 प्रतिशत तौल कर ही तकपट्टी के आधार किया जाएगा और धर्मकांटा नहीं कराया जाएगा। जबकि हमेशा ही धर्मकांटा तौल के आधार पर ही चावल स्वीकारा जाता रहा है। नए नियम से मिलर्स का शोषण होगा। निगम द्वारा कुल वजन से 665 ग्राम वारदाना काटकर चावल का वजन लिखा जाता है और वारदाना कम वजन होने का पैसा अलग से काट लिया जाता है। इस तरह चावल अधिक चला जाता है। चूंकि वारदाना जूट का होता है, इसलिए दो-तीन बार कट्टा विभिन्न कारणों से फट जाता है और चावल गिरता रहता है, कुछ चावल नमी होने केे कारण सूख की श्रेणी में आ जाता है। ऐसी अवस्था में ढाई सौ ग्राम से अधिक वजन भी कम हो सकता है। ऐसी दशा में पूरी लाट वापस करना घोर अन्याय है।
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अध्यक्ष ने कहा कि निगम चावल को दस प्रतिशत तौल कर भंडारित करेगा और एजेंसियों को इशू शत प्रतिशत धर्मकांटा तौल पर करेगी। इस प्रकार की दोहरी नीति अपनाना किसी भी नियम-कानून में मान्य नहीं है। इसलिए इस नियम में बदलाव किया जाए।