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Shahjahanpur News: उद्योगों को झटका...प्लास्टिक का सामान महंगा
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हेमंत रोहरा, उद्यमी
- फोटो : Samvad
शाहजहांपुर। ईरान-इस्राइल युद्ध ने व्यापारियों और उद्यमियों को मुसीबत में डाल दिया है। प्लास्टिक का दाना महंगा होने के कारण प्लास्टिक इकाइयाें में उत्पादन आधा रह गया है। फ्रूड प्रोसेसिंग इकाइयां भी गैस सिलिंडर के संकट के चलते बंदी के कगार पर पहुंचने लगीं हैं। ज्यादा दिन ऐसे ही हालात रहे तो कई कारखाने बंद हो जाएंगे।
खाड़ी देशों में युद्ध के तनाव भरे माहौल में क्रूड ऑयल महंगाई की आंच से तप रहा है। इसके चलते प्लास्टिक के दाने पर महंगाई का साया नजर आ रहा है। जिले में प्लास्टिक आधारित उत्पाद बनाने वालीं करीब 17 फैक्टरियां हैं, जिनमें प्लास्टिक के पाइप, मैदा पैकिंग वाले बोरे आदि बनाने का कार्य होता है।
इनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य करते हैं। इन उत्पादों का निर्माण एचडीपीई, एलएलडीपीई और पीपी ग्रेड के प्लास्टिक दाने से होता है। खाड़ी देशों में तनाव के बाद प्लास्टिक दाना 60 से 70 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंचने लगी हैं।
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प्लास्टिक दाना महंगा होने के कारण इकाइयाें में उत्पादन घट गया है। उद्यमियों के अनुसार, पहले 24 घंटे इकाइयों को चलाते थे, लेकिन अब 12 घंटे ही चला रहे हैं। इस अवधि में मजदूरों से अन्य कार्य भी करा रहे हैं।
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प्लाईवुड फैक्टरियों पर असर, बासमती की आपूर्ति पर संकट
प्लाईवुड फैक्टरियों में प्रयोग होने वाला केमिकल काफी महंगा हो गया है। इसके चलते उद्यमी खरीदने से किनारा कर रहे हैं। इस वजह से कार्य की गति धीमी हुई है। पुराने ऑर्डर ही पूरे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर यहां से खाड़ी देशों में होने वाली बासमती चावल की आपूर्ति भी ठप हो गई है। चावल को स्थानीय स्तर पर बिक्री की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर प्लास्टिक का दाना महंगा होने के कारण बोरे नहीं मिलने से पैकेजिंग भी नहीं हो पा रही है।
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घरेलू उपयोग वाली प्लास्टिक की चीजें भी महंगी
औद्योगिक इकाइयों पर संकट का असर बाजार में भी दिखने लगा है। घरेलू उपयोग वाली प्लास्टिक के दाम में भी 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में प्लास्टिक की जो साबुनदानी 30 रुपये की मिलती थी, वह अब 50 रुपये की हो गई है। इसी तरह प्लास्टिक की बोतल 70 रुपये से बढ़कर 110 रुपये, लोटा 80 से 120 रुपये तक पहुंच गया है। वाइपर पहले 200 का मिलता था। उस पर भी 50 रुपये बढ़ गए हैं। इसी तरह 30 रुपये वाला मग 55 रुपये और 150 वाली बाल्टी 220 रुपये की हो गई है। व्यापारी ओसामा ने बताया कि गमले के दाम भी बढ़ गए हैं। पिछले दस से 15 दिन में दाम में काफी तेजी आई है।
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महंगाई के चलते फैक्टरी को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। 50 प्रतिशत ही उत्पादन कर रहे हैं। यही स्थिति रही तो कारखाने बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। सरकार को उद्यमियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए।
-गुरजीत सिंह मोंगा, मंडलीय चेयरमैन आईआईए
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फैक्टरी के लिए कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। छोटे व्यापारियों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। एक तरफ माल नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ ऑर्डर मिलना दूभर हो रहा है। संकट भरे समय में जीएसटी, ब्याज में छूट का लाभ मिलना चाहिए।
- हेमंत रोहरा, उपाध्यक्ष, आईआईए
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बाजार में मंदी है। प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से बोरियां बनाना मुश्किल हो रहा है। मांग काफी कम हुई है। पहले डबल शिफ्ट में काम होता था, अब एक ही शिफ्ट चल रही। युद्ध थमने पर ही बाजार में कुछ सुधार हाेने की संभावना है।
-अरुण अग्रवाल, उद्यमी
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बासमती चावल की आपूर्ति खाड़ी देशों में नहीं हो पा रहा है। केवल स्थानीय बाजार में बिक्री की जा रही है। स्टॉक भी कर रहे हैं। दूसरी ओर बारदाना नहीं मिलने से पैकिंग नहीं हो रही है। प्लास्टिक उद्योग में महंगाई से दिक्कत बढ़ी है।
-नवनीत प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष-लघु उद्योग भारती
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युद्ध के कारण उद्योगों के संचालन में दिक्कत आ सकती है। शासन के निर्देशानुसार कार्य किया जा रहा है। सरकार की ओर से उद्योगों को आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रहीं हैं।
- संजय सिंह, उद्योग उपायुक्त
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खाड़ी देशों में युद्ध के तनाव भरे माहौल में क्रूड ऑयल महंगाई की आंच से तप रहा है। इसके चलते प्लास्टिक के दाने पर महंगाई का साया नजर आ रहा है। जिले में प्लास्टिक आधारित उत्पाद बनाने वालीं करीब 17 फैक्टरियां हैं, जिनमें प्लास्टिक के पाइप, मैदा पैकिंग वाले बोरे आदि बनाने का कार्य होता है।
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इनमें बड़ी संख्या में कर्मचारी कार्य करते हैं। इन उत्पादों का निर्माण एचडीपीई, एलएलडीपीई और पीपी ग्रेड के प्लास्टिक दाने से होता है। खाड़ी देशों में तनाव के बाद प्लास्टिक दाना 60 से 70 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। ऐसे में औद्योगिक इकाइयां बंदी की कगार पर पहुंचने लगी हैं।
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प्लास्टिक दाना महंगा होने के कारण इकाइयाें में उत्पादन घट गया है। उद्यमियों के अनुसार, पहले 24 घंटे इकाइयों को चलाते थे, लेकिन अब 12 घंटे ही चला रहे हैं। इस अवधि में मजदूरों से अन्य कार्य भी करा रहे हैं।
प्लाईवुड फैक्टरियों पर असर, बासमती की आपूर्ति पर संकट
प्लाईवुड फैक्टरियों में प्रयोग होने वाला केमिकल काफी महंगा हो गया है। इसके चलते उद्यमी खरीदने से किनारा कर रहे हैं। इस वजह से कार्य की गति धीमी हुई है। पुराने ऑर्डर ही पूरे किए जा रहे हैं। दूसरी ओर यहां से खाड़ी देशों में होने वाली बासमती चावल की आपूर्ति भी ठप हो गई है। चावल को स्थानीय स्तर पर बिक्री की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर प्लास्टिक का दाना महंगा होने के कारण बोरे नहीं मिलने से पैकेजिंग भी नहीं हो पा रही है।
घरेलू उपयोग वाली प्लास्टिक की चीजें भी महंगी
औद्योगिक इकाइयों पर संकट का असर बाजार में भी दिखने लगा है। घरेलू उपयोग वाली प्लास्टिक के दाम में भी 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। पूर्व में प्लास्टिक की जो साबुनदानी 30 रुपये की मिलती थी, वह अब 50 रुपये की हो गई है। इसी तरह प्लास्टिक की बोतल 70 रुपये से बढ़कर 110 रुपये, लोटा 80 से 120 रुपये तक पहुंच गया है। वाइपर पहले 200 का मिलता था। उस पर भी 50 रुपये बढ़ गए हैं। इसी तरह 30 रुपये वाला मग 55 रुपये और 150 वाली बाल्टी 220 रुपये की हो गई है। व्यापारी ओसामा ने बताया कि गमले के दाम भी बढ़ गए हैं। पिछले दस से 15 दिन में दाम में काफी तेजी आई है।
महंगाई के चलते फैक्टरी को ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। 50 प्रतिशत ही उत्पादन कर रहे हैं। यही स्थिति रही तो कारखाने बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। सरकार को उद्यमियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए।
-गुरजीत सिंह मोंगा, मंडलीय चेयरमैन आईआईए
फैक्टरी के लिए कच्चा माल नहीं मिल पा रहा है। छोटे व्यापारियों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। एक तरफ माल नहीं मिल रहा, दूसरी तरफ ऑर्डर मिलना दूभर हो रहा है। संकट भरे समय में जीएसटी, ब्याज में छूट का लाभ मिलना चाहिए।
- हेमंत रोहरा, उपाध्यक्ष, आईआईए
बाजार में मंदी है। प्लास्टिक दाने के दाम बढ़ने से बोरियां बनाना मुश्किल हो रहा है। मांग काफी कम हुई है। पहले डबल शिफ्ट में काम होता था, अब एक ही शिफ्ट चल रही। युद्ध थमने पर ही बाजार में कुछ सुधार हाेने की संभावना है।
-अरुण अग्रवाल, उद्यमी
बासमती चावल की आपूर्ति खाड़ी देशों में नहीं हो पा रहा है। केवल स्थानीय बाजार में बिक्री की जा रही है। स्टॉक भी कर रहे हैं। दूसरी ओर बारदाना नहीं मिलने से पैकिंग नहीं हो रही है। प्लास्टिक उद्योग में महंगाई से दिक्कत बढ़ी है।
-नवनीत प्रकाश गुप्ता, जिलाध्यक्ष-लघु उद्योग भारती
युद्ध के कारण उद्योगों के संचालन में दिक्कत आ सकती है। शासन के निर्देशानुसार कार्य किया जा रहा है। सरकार की ओर से उद्योगों को आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रहीं हैं।
- संजय सिंह, उद्योग उपायुक्त

हेमंत रोहरा, उद्यमी- फोटो : Samvad

हेमंत रोहरा, उद्यमी- फोटो : Samvad

हेमंत रोहरा, उद्यमी- फोटो : Samvad

हेमंत रोहरा, उद्यमी- फोटो : Samvad