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बिदेसिया को भायी कोलकाता वाली मेम
शाहजहांपुर।
Updated Fri, 05 Jun 2015 11:54 PM IST
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अथर्व ग्रुप के तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय रंग उत्सव में दूसरी प्रस्तुति रही प्रख्यात नाटककार भिखारी ठाकुर की बिदेसिया। गांधी भवन में खेले गए नाटक मेें कलाकारों ने ख्यातिलब्ध निदेशक संजय उपाध्याय की मेहनत को सार्थक करते हुए मंच को धन्यता प्रदान की।
निर्माण कला मंच पटना के कलाकारों ने लेखक भिखारी ठाकुर की कहानी के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि विदेश जाकर युवा किस तरह भटक जाते हैं और अपना परिवार छोड़ वहां की युवतियों के प्रेम जाल में फंस जाते हैं। ऐसा ही एक युवक शादी के बाद नई-नवेली पत्नी को छोड़कर कोलकाता चला जाता है।
काफी अरसे बाद भी जब वह वापस नहीं आता तो बटोही बाबा उसे ढूंढने के लिए कोलकाता जाते हैं। वहां पता चलता है युवक ने दूसरी शादी कर ली है और दो बच्चे भी हैं। बटोही के समझाने पर युवक दूसरी पत्नी को छोड़ घर लौट आता है। कुछ दिन बाद दूसरी पत्नी भी दोनों बच्चों के साथ उसके घर आ धमकती है। इससे पूर्व नाटककार इंजीनियर राजेश कुमार को मोहन राकेश और संजय उपाध्याय को ब.व. कारंत सम्मान से नवाजा गया।
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नाटक में शुभ्रो भट्टाचार्य, सुमन कुमार, शारदा सिंह, कुमार उदय, संतोष मेहरा, अभिषेक आनंद, स्वरम उपाध्याय, अभिषेक चौहान, सत्य प्रकाश, साहित्य मिश्रा, रूबी खातून, पप्पू ठाकुर, विवेक कुमार तथा संगीत-मंच आदि व्यवस्थाओं में राजेश रंजन, संतोष टुन्नी, मो. जॉनी, अनिल मिश्र, रजनीकांत पांडेय, प्रबोध विश्वकर्मा, विनय राज, जय कुमार भारती, धनंजय नारायण सिंह, डॉ. शैलेंद्र आदि का योगदान रहा।
संचालन गीतकार डॉ. इंदु अजनबी ने किया। कार्यक्रम आयोजन योगेश पांडेय ने बताया कि शनिवार को शाम साढ़े छह बजे 'संवाद अहसास और सच नामक नाटक का मंचन होगा।
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निर्माण कला मंच पटना के कलाकारों ने लेखक भिखारी ठाकुर की कहानी के माध्यम से यह बताने की कोशिश की कि विदेश जाकर युवा किस तरह भटक जाते हैं और अपना परिवार छोड़ वहां की युवतियों के प्रेम जाल में फंस जाते हैं। ऐसा ही एक युवक शादी के बाद नई-नवेली पत्नी को छोड़कर कोलकाता चला जाता है।
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काफी अरसे बाद भी जब वह वापस नहीं आता तो बटोही बाबा उसे ढूंढने के लिए कोलकाता जाते हैं। वहां पता चलता है युवक ने दूसरी शादी कर ली है और दो बच्चे भी हैं। बटोही के समझाने पर युवक दूसरी पत्नी को छोड़ घर लौट आता है। कुछ दिन बाद दूसरी पत्नी भी दोनों बच्चों के साथ उसके घर आ धमकती है। इससे पूर्व नाटककार इंजीनियर राजेश कुमार को मोहन राकेश और संजय उपाध्याय को ब.व. कारंत सम्मान से नवाजा गया।
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नाटक में शुभ्रो भट्टाचार्य, सुमन कुमार, शारदा सिंह, कुमार उदय, संतोष मेहरा, अभिषेक आनंद, स्वरम उपाध्याय, अभिषेक चौहान, सत्य प्रकाश, साहित्य मिश्रा, रूबी खातून, पप्पू ठाकुर, विवेक कुमार तथा संगीत-मंच आदि व्यवस्थाओं में राजेश रंजन, संतोष टुन्नी, मो. जॉनी, अनिल मिश्र, रजनीकांत पांडेय, प्रबोध विश्वकर्मा, विनय राज, जय कुमार भारती, धनंजय नारायण सिंह, डॉ. शैलेंद्र आदि का योगदान रहा।
संचालन गीतकार डॉ. इंदु अजनबी ने किया। कार्यक्रम आयोजन योगेश पांडेय ने बताया कि शनिवार को शाम साढ़े छह बजे 'संवाद अहसास और सच नामक नाटक का मंचन होगा।