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धरना-प्रदर्शन के बीच भाकियू का हंगामा

Wed, 28 Jun 2017 12:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Wed, 28 Jun 2017 12:13 AM IST
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Bhakiyu's ruckus between demonstration
हंगामा - फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
भाकियू के ज्ञापन के बाद भी कार्रवाई नहीं होने के पर मंगलवार को धरना प्रदर्शन के बीच एसडीएम और भाकियू कार्यकर्ताओं के बीच जमकर तकरार हुई। इसके बाद किसानों ने बंडा कूंच का ऐलान कर दिया। इससे पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। बमुश्किल मामले को शांत कराया जा सका।
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बंडा के गांव हसनापुर के किसान तेजा सिंह और उनके पुत्र करनैल सिंह की जमीन का कर्ज माफ होने के बाद भी जमीन की नीलामी किए जाने और हाईकोर्ट में वाद विचाराधीन होने, शाहजहांपुर के सिविल कोर्ट से स्टे होने के बाद भी एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने 18 जून को छह एकड़ जमीन पर खड़ी फसल जुतवा कर दूसरे पक्ष को कब्जा करा दिया था। इस दौरान तेजा सिंह की पत्नी ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया था। डॉक्टरों ने इलाज कर उन्हें बचा लिया था। भाकियू ने 20 जून को तहसील दिवस में ज्ञापन देकर तेजा सिंह को जमीन वापस दिलाने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर 27 जून से एसडीएम कार्यालय पर आंदोलन की चेतावनी दी थी। 
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मंगलवार को जिलाध्यक्ष अजीत सिंह के नेतृत्व में लगभग तीन सौ किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचकर धरने पर बैठ गए। दोपहर दो बजे एसडीएम अजय कुमार तिवारी ने किसानों से वार्ता की तो दोनों ओर से बात बढ़ने पर जमकर तकरार हुई। इसके बाद किसानों ने वार्ता का बहिष्कार कर दिया और खुद ही गांव सिनापुर जाकर तेजा सिंह को जमीन पर कब्जा करा देने का ऐलान कर दिया। किसान बंडा रवाना हुए तो सीओ सुमित शुक्ला और कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने बमुश्किल किसानों को समझाकर रोका और मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। किसानों के उग्र होने की जानकारी से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर कई थानों की फोर्स के अलावा शाहजहांपुर से क्यूआरटी, पीएएसी, महिला पुलिस, दमकल के वाहन को बुला लिया गया। इससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।
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किसान नेताओं ने भी मामले की जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को दी, तो उन्होंने मंडलायुक्त से वार्ता की। कमिश्नर ने डीएम, एसपी से मामले की जानकारी ली।  इसके बाद एडीएम सर्वेश कुमार, एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य मौके पर पहुंचे। किसानों ने एसडीएम के वार्ता में शामिल होने पर वार्ता का बहिष्कार करने की चेतावनी दी तो सीओ कार्यालय में किसान नेताओं और अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। देर शाम धरना प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया। एडीएम ने बताया कि मंडलायुक्त एक टीम का गठन करेंगे जो 15 दिन में जांच कर रिपोर्ट देगी। इसमें जो भी दोषी होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस बीच जमीन पर यथास्थित रहेगी।
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एसडीएम के खिलाफ जमकर नारेबाजी, निलंबन की मांग
भाकियू नेता सबसे ज्यादा एसडीएम अजय कुमार तिवारी से खफा दिखे। एसडीएम के खिलाफ दो घंटे तक जमकर नारेबाजी की गई। अधिकारियों के आने पर किसान नेताओं ने एसडीएम के निलंबन की मांग उठाई। इस दौरान एसडीएम अपनी कार्रवाई को सही ठहराते रहे। किसानों ने कहा कि आज के मामले का समाधान होने के बाद भी किसान विरोधी एसडीएम को नहीं हटाने  तक उनका विरोध जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान भाकियू के बरेली मुरादाबाद मंडल प्रभारी बिजेंद्र सिंह यादव, पीलीभीत के जिलाध्यक्ष सतेंद्र सिंह, अनिल सिंह यादव, संजीव अवस्थी, श्रीकृष्ण जाटव, मनोज यादव, रंजीत सिंह सहित बरेली, बदायूं के तमाम किसान नेता मौजूद रहे। 

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कई बार बिगड़ा मामला
धरना प्रदर्शन के दौरान एसडीएम से वार्ता विफल होने और जिला मुख्यालय से एडीएम के पहुंचने तक किसान कई बार बंडा जाकर जमीन पर किसान को खुद ही कब्जा दिलाने के लिए र्कई बार चलने को तैयार हुए, इससे स्थिति काफी तनावपूर्ण होती रही, लेकिन सीओ सुमित शुक्ला और कोतवाली प्रभारी अशोक पाल ने हर बार किसानों को शांत कर मामले को बिगड़ने से बचाया। पीएएसी के आने के बाद धरने में शामिल पुरुष और महिलाएं भी डंडे लेकर खड़े हो गए। इससे लगा कि स्थिति बिगड़ सकती है, लेकिन किसान नेताओं ने किसानों को समझाकर शांत किया।
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