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बेखौफ मुस्तैद हैं खाकी वर्दी में अपराजिताएं

Wed, 22 Jul 2020 02:08 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2020 02:08 AM IST
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Bekhauf Mustaid is a criminal in a khaki uniform
शाहजहांपुर। कोरोना काल में महिला पुलिस कर्मी बेखौफ होकर दिन-रात मुस्तैदी से ड्यूटी कर रही हैं। उनके लगन और बुलंद हौसलों से समाज में इनकी अलग छवि भी निखर कर सामने आई है। ये महिला पुलिसकर्मी हमारे समाज की अपराजिता हैं, जिनके प्रति सभी को सम्मान की भावना रखनी चाहिए।
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कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मिलने के बाद जिन क्षेत्रों को कंटेन्मेंट जोन बनाया जाता है वहां अधिकतर महिला पुलिसकर्मियों को कभी आठ तो कभी 12 घंटे की ड्यूटी पर भेजा जाता है। ऐसे में कंटेन्मेंट जोन में पुरुष जाने से घबराते हैं तब महिला पुलिसकर्मियों ने बिना किसी भय के मोर्चा संभाला। कंटेन्मेंट जोन में तो आज भी किसी भी गली-कूंचे में उन्हें ड्यूटी करते देखा जा सकता है।
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पुलिस की इन अपराजिताओं ने दिखा दिया है कि विषम परिस्थितियों में वह कहीं भी, कभी भी पीछे रहने वाली नहीं हैं। बता दें कि पुलिसकर्मियों में बड़ी संख्या में युवतियां हैं, जो निर्भीक होकर समाज में हमारी सुरक्षा के लिए मैदान में डटी हैं। वह कहती भी हैं कि जब वर्दी पहनी है, तो डर कैसा। कोरोना पर भी विजय पाकर ही दम लेंगे।
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कर्तव्यनिष्ठा साबित करने का समय
लोगों का डर भगाने के लिए ही तो पुलिस में आई हूं। घर से निकलने का तो समय निर्धारित होता है, लेकिन वापसी का नहीं। पुलिस का दायित्व समाज में बड़ा है, इसलिए सभी को समझना पड़ेगा और विश्वास भी करना होगा। रात-दिन ड्यूटी करना मुश्किल जरूर है, लेकिन यही कर्तव्यनिष्ठा भी है।
- मंजू कुमारी, सब इंस्पेक्टर, थाना सदर बाजार
डरने वाली तो कोई बात ही नहीं
वर्ष 2019 बैच की हिमानी का हौसला देखते ही बनता है। वह कहती हैं कि कंटेन्मेंट जोन में ड्यूटी कठिन होती है, लेकिन आसान तब हो जाती है, जब लोगों का सहयोग मिलता है। सुबह आठ से रात आठ बजे तक कंटेन्मेंट जोन ड्यूटी की है, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं।
- हिमानी, पुलिसकर्मी, थाना सदर बाजार
इससे सख्त ड्यूटी कभी नहीं की
बीस साल हो गए नौकरी करते, अब डरने की सोचती भी नहीं हूं। यह अभी तक का सबसे कठिन दौर है, इससे पहले इतनी सख्त ड्यूटी कभी नहीं की। जब घर से बाहर निकले हैं और नौकरी कर रहे हैं, तो डर कैसा। कंटेन्मेंट जोन में भी नहीं डरती हूं। यह हमारी जिम्मेदारी है।

- उमेश तिवारी, होमगार्ड
कठिन दौर जरूर है, डरें क्यों?
कोरोना महामारी ने सभी के सामने एक चुनौती पेश की है, इसमें धैर्य की परीक्षा है, जिसने अपने को संभाल लिया, वही पास होगा। आम आदमी से लेकर पुलिस, स्वास्थ्यकर्मी सभी जिम्मेदारी उठा रहे हैं, उसी में हमलोग भी शामिल हैं। अगर हम लोग डरने लगेंगे, तो समाज को कौन संभालेगा।
- ललित प्रभा, होमगार्ड
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