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एक महीने में दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई थी 20-25 साल चलने वाली बेयरिंग

Wed, 01 Dec 2021 05:22 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 01 Dec 2021 05:22 PM IST
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Bearings that lasted 20-25 years were damaged again in a month
शाहजहांपुर। कोलाघाट पुल का सात नंबर पिलर लगातार संकेत दे रहा था कि उसकी खराबी किसी दिन बड़ी घटना का सबब बनेगी। 29 नवंबर को ऐसा ही हुआ। बताया जा रहा है कि पुल की जो बेयरिंग आसानी से 20-25 साल चल जाती है वह कुछ दिन में ही क्षतिग्रस्त हो गई थी। इससे इंजीनियरिंग एक्सपर्ट को लगने लगा था कि पिलर में कोई बड़ी गड़बड़ी है। सूत्रों के अनुसार इसी के मद्देनजर टीम गठित की गई थी, जो सोमवार को जांच के लिए जाने वाली थी लेकिन उससे पहले पूरा पिलर पुल के बड़े हिस्से समेत जमीन में धंस गया।
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रामगंगा और बहगुल नदी पर बना 1800 मीटर लंबा कोलाघाट पुल मिर्जापुर-कलान को जलालाबाद व जिला मुख्यालय से जोड़ता है। इस पर 60 पिलर पर पुल निर्मित हैं। इसे 2009 में सेतु निगम ने बनाने के बाद पीडब्लूडी को हैंडओवर कर दिया था। लोक निर्माण विभाग हर साल मानसून से पहले पूरे पुल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करता है। पिछले दो सालों से पुल की रोड पर सरिया निकलने या सड़क उखड़ने की शिकायतें आ रहीं थीं। पीडब्ल्यूडी इनकी मरम्मत करा देता था। इस मानसून में भी पुल का पूरा निरीक्षण किया गया था। पुल में न कोई दरार या पिलर का कोई टिल्ट (झुकाव) नजर आया था। रिपोर्ट ओके होने के बाद अक्तूबर में पुल की बेयरिंग क्षतिग्रस्त देखकर पीडब्लूडी ने पिलर नंबर सात की बेयरिंग को बदल दिया। इसमें 20 दिन का समय लगा था। अनुमान है कि चार-पांच लाख रुपये खर्च हुए। दरअसल, बेयरिंग की उमर कम से कम 20-25 साल होती है। ऐसे में इसका समय से पहले खराब होना इंजीनियरिंग एक्सपर्ट के लिए चौंकाने वाला था। मगर इंजीनियरों को लगा कि हो सकता है कि भारी वाहनों के बोझ के कारण बेयरिंग समय से पहले 12 साल में ही खराब हो गई हो। अभी एक महीना ही बीता था कि फिर से बेयरिंग में खराबी की शिकायत पीडब्ल्यूडी को मिली। यह हैरान करने वाली बात थी। यह साफ संकेत था कि पुल के पिलर में कोई बड़ी खराबी है जिसे तुरंत खोजकर सही करना बहुत जरूरी है। इंजीनियरों ने इसकी जानकारी प्रशासन को दी। पीडब्लूडी और सेतु निगम की टीम ने 29 नवंबर को निरीक्षण का कार्यक्रम तय किया लेकिन इससे पहले ही हादसा हो गया। इंजीनियरिंग एक्सपर्ट के मुताबिक बेयरिंग के बार-बार क्षतिग्रस्त होने की वजह पिलर का धीरे-धीरे धंसना रहा होगा। जिसे इंजीनियर पहले हैवी ट्रैफिक का असर समझते रहे। पुल गिरने की प्रथमदृष्टया वजह यह सामने आ रही है कि 22 मीटर नीचे जहां पर पिलर का बेस बनाया गया था वहां पर जमीन की हार्ड स्ट्रेटा (कठोर परत) धीरे-धीरे कर मुलायम पड़ी और वह पुल का बोझ नहीं उठा सकी। (संवाद)
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आज आएगी सेतु निगम की टीम
कोलाघाट पुल का निर्माण सेतु निगम ने किया था। पुल की देखरेख की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। पुल का एक हिस्सा ढहने की गूंज शासन तक पहुंच गई है। शासन के निर्देश पर जोनल मुख्यालय बरेली और मुख्यालय लखनऊ की संयुक्त टीम बुधवार को निरीक्षण करने के लिए जलालाबाद के कोलाघाट पुल पर पहुंचेगी। जांच लंबी चलने की उम्मीद है क्योंकि पुल के वेल (कुएं) की गहराई 22 मीटर है। ऐसे में जमीन के अंदर की जांच मशीनों से कराई जाएगी कि हादसे की वजह क्या रही। कई चरण में जांच पूरी होने की उम्मीद है। टीम यह भी देखेगी कि पिलर ढहने की वजह निर्माण के समय बरती गई लापरवाही रही या देखरेख में कमी या फिर यह महज एक प्राकृतिक आपदा है।
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ये है पुल में बेयरिंग का कार्य
पुल के बेयरिंग का प्रयोग अधिरचना से उपरचना तक बल के स्थानांतरण के लिए किया जाता है। भार का यह स्थानांतरण अधिरचना की गतिविधि के लंबवत और क्षैतिज दिशाओं में विस्थापन की अनुमति देता है। तापमान भिन्नता (संकोचन और विस्तार) के कारण गॉर्डर को मुक्त गतिविधि की अनुमति देता है। यदि कोई सेतुबंध थोड़ा भी धंसता है तो पुल को अत्यधिक क्षति से बचाए।
कोलाघाट पुल की प्रोफाइल
- 2005-06 में पुल का निर्माण शुरू हुआ
- 42.77 करोड़ रुपये में पुल और अप्रोच रोड बनकर तैयार हुआ
--2009 में आवागमन के लिए खोला गया
-60 पिलर पर तैैयार किया गया है 18 सौ मीटर लंबा पुल
-29 नवंबर को पिलर नंबर सात पूरा जमीन पर धंस गया जिससे पुल का दो सौ मीटर हिस्सा गिर गया
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