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अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती करने को तैयार नहीं घरवाले
शाहजहांपुर
Updated Sun, 05 Apr 2015 11:34 PM IST
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पोषण पुनर्वास केंद्र में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कराने के लिए अभिभावक तैयार नहीं हैं। इसके लिए गांवों में गए डॉक्टरों को भी अभिभावकों ने मना कर दिया है। केंद्र के चार बेड अभी खाली पड़े हैं।
कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए डीएम के आदेश पर जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया गया है। इसमें 10 बेड की सुविधा है, जिसमें काफी दिनों से चार बेड खाली पड़े हैं। इन बेडों पर भर्ती होने के लिए अतिकुपोषित बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। केंद्र प्रभारी डॉ. एके सिंह ने जिला अस्पताल के अन्य डॉक्टरों के साथ ददरौल ब्लाक के दिउरिया गांव में जाकर अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को केंद्र में भर्ती कराने के लिए कहा। इस पर कुपोषित बच्चे की मां ने ऐसा करने से मना कर दिया।
डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सभी नगर निकायों के वार्ड मेंबरों और ग्राम प्रधानों से कुपोषण के खिलाफ जंग में साथ देने के लिए कहा था, तब सभी जनप्रतिनिधियों ने इसमें समर्थन देने की बात भी कही थी। इसके दो माह बीतने के बाद शायद जनप्रतिनिधि भी अपने वायदे भूल गए हैं। उनका सहयोग न मिलने की वजह से अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती नहीं कराया जा सका है।
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कुपोषित बच्चों को पोषित करने के लिए डीएम के आदेश पर जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया गया है। इसमें 10 बेड की सुविधा है, जिसमें काफी दिनों से चार बेड खाली पड़े हैं। इन बेडों पर भर्ती होने के लिए अतिकुपोषित बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। केंद्र प्रभारी डॉ. एके सिंह ने जिला अस्पताल के अन्य डॉक्टरों के साथ ददरौल ब्लाक के दिउरिया गांव में जाकर अतिकुपोषित बच्चों के अभिभावकों को केंद्र में भर्ती कराने के लिए कहा। इस पर कुपोषित बच्चे की मां ने ऐसा करने से मना कर दिया।
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डीएम शुभ्रा सक्सेना ने सभी नगर निकायों के वार्ड मेंबरों और ग्राम प्रधानों से कुपोषण के खिलाफ जंग में साथ देने के लिए कहा था, तब सभी जनप्रतिनिधियों ने इसमें समर्थन देने की बात भी कही थी। इसके दो माह बीतने के बाद शायद जनप्रतिनिधि भी अपने वायदे भूल गए हैं। उनका सहयोग न मिलने की वजह से अतिकुपोषित बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती नहीं कराया जा सका है।
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