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Ramleela: सुहेल बनते हैं जनक-विश्वामित्र, पैट्रिक दास दशरथ, सद्भाव का संदेश देती है ओसीएफ की रामलीला

Sat, 20 Sep 2025 04:36 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहांपुर Published by: मुकेश कुमार Updated Sat, 20 Sep 2025 04:36 PM IST
सार

शाहजहांपुर में ऑर्डिनेंस क्लोदिंग फैक्टरी (ओसीएफ) की रामलीला सौहार्द का संदेश देती है। इस रामलीला में जाति-धर्म से ऊपर उठकर सभी वर्गों के लोग मंचन करते हैं। 

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artists from Muslim and Christian communities also play roles in OCF Ramlila in Shahjahanpur
ओसीएफ में रामलीला के मंचन के लिए अभ्यास करते कलाकार। - फोटो : संवाद

विस्तार

शाहजहांपुर में ऑर्डिनेंस क्लोदिंग फैक्टरी (ओसीएफ) के मैदान पर हर वर्ष होने वाली रामलीला को 59 वर्ष पूरे हो चुके हैं। रामलीला में हिंदू के साथ ही मुस्लिम, ईसाई और सिख समुदाय से जुड़े लोग भी विभिन्न पात्र निभाते हैं। रोहित सक्सेना मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तो सुहेल मोहम्मद जनक और विश्वामित्र, अरशद आजाद भगवान परशुराम का रोल करते हैं। ईसाई धर्म मानने वाले पैट्रिक दास दशरथ के रूप में मंच पर उतरकर तालियां बटोरते हैं।

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निर्देशक अंकित सक्सेना ने बताया कि ओसीएफ की रामलीला का इतिहास वर्षों पुराना है। वर्ष 1966 में ओसीएफ के जनरल मैनेजर रहे एसएन गुप्ता के संरक्षण में रामलीला प्रारंभ हुई थी। उस समय बल्लियों का मंच बनाकर 15 दिन तक रामलीला की जाती थी। उसके बाद मेला भी लगने लगा। 
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कुछ समय के बाद ही ओसीएफ की रामलीला की ख्याति दूर तक फैली। 90 के दशक के बाद रामलीला में काफी परिवर्तन आया। उसके बाद मंचन में सौहार्द के फूल खिले और हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के कलाकार भी जुड़ गए। अच्छे कलाकारों ने किरदारों को जीवंत कर मंचन को बेहतर बना दिया।

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रामचरितमानस की चौपाइयां हैं याद 
वरिष्ठ रंगकर्मी सुहेल मोहम्मद पिछले वर्ष से रामलीला का सह-निर्देशन करते आए हैं। वह राजा जनक और विश्वामित्र का रोल भी करते हैं। निर्देशक अंकित सक्सेना ने उन्हें वर्ष 2019 से मंचन से जोड़ा था। उन्हें रामचरितमानस की चौपाइयां याद हैं।  

अरशद निभाते हैं परशुराम का किरदार
प्राइवेट नौकरी करने वाले अरशद आजाद वर्ष 1997 से भगवान परशुराम व मारीच का रोल करते आ रहे हैं। उन्हें वरिष्ठ रंगकर्मी चंद्रमोहन महेंद्रू मंचन में लेकर आए थे। अरशद बताते हैं कि रंगकर्मी होने के नाते उन्हें कभी मंच पर दिक्कत नहीं हुई।  

मंचन का सह निर्देशन भी किया
आयुध वस्त्र फैक्टरी में कार्यरत रहे पैट्रिक दास ईसाई समुदाय से आते हैं। वह पूर्व में कई साल तक रामलीला मंचन का सह निर्देशन करते आए हैं। वह भगवान श्रीराम के पिता दशरथ का रोल करते हैं। वर्तमान में वह रोजाना ही पूर्वाभ्यास में जाते हैं। 

अगस्त्य मुनि से सुखलाल ने छोड़ी छाप             
सिख समुदाय के सुखलाल सिंह भी करीब 15 वर्षों से रामलीला मंचन से जुड़े हैं। वह अगस्त्य मुनि समेत कई ऋषियों का रोल करते हैं। पूर्वाभ्यास के दौरान वाद्य यंत्रों पर कलाकारों का पूर्वाभ्यास में हाथ बंटाते हैं। पूरी तरह रामलीला मंचन में जुटे रहते हैं।  

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