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गांवों में छुट्टा घूम रहे पशु, टैगिंग कराने में प्रशासन को छूट रहे पसीने
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जैतीपुर के खेड़ा बझेड़ा की गलियों में घूमते आवारा पशु
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। शहर से लेकर गांव-देहात तक सड़कों पर छुट्टा घूमने वाले पशु न केवल किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं, बल्कि राहगीरों के लिए भी हिसंक और जानलेवा साबित हो रहे हैं। ऐसे पशुओं की पहचान कर उन्हें गोवंश आश्रय स्थलों में भेजने के लिए पशु पालन विभाग उनकी टैगिंग करा रहा है।
अधिकारी भी मानते हैं कि पशुओं की टैगिंग के बाद बाकी बचे पशुओं को पकड़ना आसान हो जाएगा, लेकिन इस काम में सबसे बड़ी बाधा पशुओं के विचरण की बनी हुई है, इस वजह से पशुओं की टैगिंग कराने में पसीने छूट रहे हैं।
जनपद में विभिन्न प्रजातियों के पशुओं की संख्या नौ लाख से अधिक है, जिनमें 7.90 लाख गोवंशीय और महिष वंशीय पशु हैं। शहर से लेकर गांवों तक छुट्टा घूमने वाले गोवंशीय पशु जन सामान्य के लिए मुसीबत बने हैं। पशुओं के विचरण से राहगीरों का सड़क पर चलना कठिन हो रहा है और यही पशु गांवों में फसलें भी चट कर रहे हैं। इस समस्या के निराकरण को जिले में चार वृहद गो संरक्षण केंद्र समेत 56 गोवंश आश्रय स्थल स्थापित हैं। वहां 3680 पशु रखे गए हैं जबकि 5044 गोवंशीय पशु पालने के लिए ग्रामीणों को दिए गए हैं। इसके बावजूद आवारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरबी सिंह के अनुसार अभी तक करीब 9000 पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि छुट्टा पशुओं के झुंड एक गांव से खदेड़े जाने पर नजदीक के दूसरे गांव में पहुंच रहे हैं। इसलिए ग्राम स्तरीय अधिकारियों की और कर्मचारियों की रिपोर्ट के आधार पर खंड विकास अधिकारी जिन गांवों में छुट्टा पशु होने की सूचना देते हैं, टैगिंग के लिए वहां जाने पर आवारा पशु दिखाई नहीं देते। उन्होंने बताया कि गांवों में घूमने वाले पशुओं को आश्रय स्थलों तक भिजवाने की जिम्मेदारी बीडीओ को सौंपी गई है।
छुट्टा पशुओं से भयभीत जैतीपुर के ग्रामीण
जैतीपुर। क्षेत्र में आवारा छुट्टा पशुओं की संख्या में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। झुंड में टहल रहे पशु अक्सर आक्रामक हो जाते हैं। बृहस्पतिवार को सांड़ के हमले में कटाया गांव के जयचंद्र के बेटे शिवकुमार (12) की मौत हो गई थी। इसके बाद से ग्रामीणों का डर बढ़ गया है। पुलिस ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया। पिता जयचंद ने बताया कि शुक्रवार शाम तक उसके यहां कोई नेता या अधिकारी नहीं आया जिसने उसे सांत्वना दी होती। सांड़ के हमले में उसके सबसे छोटे बेटे की मौत हुई है। परिवार के लोग बहुत दुखी हैं। सरकार को हादसे का मुआवजा देना चाहिए। क्षेत्र में दो अस्थायी गोशाला संचालित जैतीपुर क्षेत्र में दो अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। प्रत्येक में 30 पशु रखने की क्षमता है। हालांकि अमइपुर संडा में 28 और मरेना में 20 पशु ही हैं। वहीं सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। जैतीपुर थाने के सामने रोजाना शाम को सैकड़ों आवारा पशु खड़े होते हैं। थोड़ी दूर गौहावर गांव में सड़क पर, खेड़ाबझेड़ा में तो छुट्टा पशु बहुतायत में हैं। दो सौ से ज्यादा पशु खेड़ाबझेड़ा नखासा बाजार और बझेड़ा भगवानपुर के देवस्थान पर मिलते हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्थायी गोशाला बनवाने की मांग की है।
छुट्टा पशुओं से होने वाली समस्या के निस्तारण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अभी उन्हें कोई निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं।
सीमारानी, बीडीओ, जैतीपुर
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अधिकारी भी मानते हैं कि पशुओं की टैगिंग के बाद बाकी बचे पशुओं को पकड़ना आसान हो जाएगा, लेकिन इस काम में सबसे बड़ी बाधा पशुओं के विचरण की बनी हुई है, इस वजह से पशुओं की टैगिंग कराने में पसीने छूट रहे हैं।
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जनपद में विभिन्न प्रजातियों के पशुओं की संख्या नौ लाख से अधिक है, जिनमें 7.90 लाख गोवंशीय और महिष वंशीय पशु हैं। शहर से लेकर गांवों तक छुट्टा घूमने वाले गोवंशीय पशु जन सामान्य के लिए मुसीबत बने हैं। पशुओं के विचरण से राहगीरों का सड़क पर चलना कठिन हो रहा है और यही पशु गांवों में फसलें भी चट कर रहे हैं। इस समस्या के निराकरण को जिले में चार वृहद गो संरक्षण केंद्र समेत 56 गोवंश आश्रय स्थल स्थापित हैं। वहां 3680 पशु रखे गए हैं जबकि 5044 गोवंशीय पशु पालने के लिए ग्रामीणों को दिए गए हैं। इसके बावजूद आवारा पशुओं की समस्या जस की तस बनी है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरबी सिंह के अनुसार अभी तक करीब 9000 पशुओं की टैगिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि छुट्टा पशुओं के झुंड एक गांव से खदेड़े जाने पर नजदीक के दूसरे गांव में पहुंच रहे हैं। इसलिए ग्राम स्तरीय अधिकारियों की और कर्मचारियों की रिपोर्ट के आधार पर खंड विकास अधिकारी जिन गांवों में छुट्टा पशु होने की सूचना देते हैं, टैगिंग के लिए वहां जाने पर आवारा पशु दिखाई नहीं देते। उन्होंने बताया कि गांवों में घूमने वाले पशुओं को आश्रय स्थलों तक भिजवाने की जिम्मेदारी बीडीओ को सौंपी गई है।
छुट्टा पशुओं से भयभीत जैतीपुर के ग्रामीण
जैतीपुर। क्षेत्र में आवारा छुट्टा पशुओं की संख्या में अच्छा खासा इजाफा हुआ है। झुंड में टहल रहे पशु अक्सर आक्रामक हो जाते हैं। बृहस्पतिवार को सांड़ के हमले में कटाया गांव के जयचंद्र के बेटे शिवकुमार (12) की मौत हो गई थी। इसके बाद से ग्रामीणों का डर बढ़ गया है। पुलिस ने बच्चे के शव का पोस्टमार्टम कराया। पिता जयचंद ने बताया कि शुक्रवार शाम तक उसके यहां कोई नेता या अधिकारी नहीं आया जिसने उसे सांत्वना दी होती। सांड़ के हमले में उसके सबसे छोटे बेटे की मौत हुई है। परिवार के लोग बहुत दुखी हैं। सरकार को हादसे का मुआवजा देना चाहिए। क्षेत्र में दो अस्थायी गोशाला संचालित जैतीपुर क्षेत्र में दो अस्थायी गोशालाएं संचालित हैं। प्रत्येक में 30 पशु रखने की क्षमता है। हालांकि अमइपुर संडा में 28 और मरेना में 20 पशु ही हैं। वहीं सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु घूमते रहते हैं। जैतीपुर थाने के सामने रोजाना शाम को सैकड़ों आवारा पशु खड़े होते हैं। थोड़ी दूर गौहावर गांव में सड़क पर, खेड़ाबझेड़ा में तो छुट्टा पशु बहुतायत में हैं। दो सौ से ज्यादा पशु खेड़ाबझेड़ा नखासा बाजार और बझेड़ा भगवानपुर के देवस्थान पर मिलते हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने स्थायी गोशाला बनवाने की मांग की है।
छुट्टा पशुओं से होने वाली समस्या के निस्तारण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि अभी उन्हें कोई निर्देश नहीं प्राप्त हुए हैं।
सीमारानी, बीडीओ, जैतीपुर