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अल्हागंज डाकघर घोटाला : अब तक 12 पीड़ितों के बयान दर्ज
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अल्हागंज। अल्हागंज उपडाकघर में लाखों रुपये के घोटाले को लेकर विभागीय अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। पांच दिन बीत जाने के बाद भी न तो विभागीय रिपोर्ट पुलिस को सौंपी गई है और न ही उपभोक्ताओं को कोई भरोसेमंद सूचना या आश्वासन दिया गया है। अभी तक 12 लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं।
शनिवार को उपडाकघर में पहुंचे जमाकर्ताओं ने हंगामा किया था। उनका कहना था कि उन्होंने लाखों रुपये डाकघर में जमा किए थे लेकिन उनकी रसीदें फर्जी बताई जा रहीं हैं। उपभोक्ताओं ने एक पोस्टमैन पर घोटाले का आरोप लगाया था। घोटाले के उजागर होने के बाद से ही डाक विभाग के उच्च अधिकारियों ने जांच का भरोसा दिलाया था। उपडाकपाल नवीन कुमार को हटाकर जिला मुख्यालय तलब किया गया और लाखन सिंह को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बावजूद पांच दिनों में न कोई प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी गई और न ही घोटाले की धनराशि या दोषियों को लेकर कोई आधिकारिक विवरण सामने आया है।
जांच अधिकारी डाक निरीक्षक अमरपाल ने बताया कि जांच प्रक्रिया प्रगति पर है। अब तक 12 प्रभावित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, तथ्यों का संकलन किया जा रहा है। इसके बाद विभागीय रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों व संबंधित पुलिस को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच को जल्दबाजी में निपटाने की बजाय तथ्यों के साथ निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
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उपभोक्ताओं की चिंता कायम, राहत की प्रतीक्षा
हालांकि जांच अधिकारी की यह सफाई आई है, लेकिन उपभोक्ताओं में अभी भी असंतोष और चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि बयान दर्ज होने के बावजूद उनके खातों की सुरक्षा या धन वापसी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर जांच की स्थिति को सार्वजनिक रूप से साझा करते रहें तो न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल होगा बल्कि अफवाहों और अविश्वास की स्थिति पर भी अंकुश लगेगा।
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शनिवार को उपडाकघर में पहुंचे जमाकर्ताओं ने हंगामा किया था। उनका कहना था कि उन्होंने लाखों रुपये डाकघर में जमा किए थे लेकिन उनकी रसीदें फर्जी बताई जा रहीं हैं। उपभोक्ताओं ने एक पोस्टमैन पर घोटाले का आरोप लगाया था। घोटाले के उजागर होने के बाद से ही डाक विभाग के उच्च अधिकारियों ने जांच का भरोसा दिलाया था। उपडाकपाल नवीन कुमार को हटाकर जिला मुख्यालय तलब किया गया और लाखन सिंह को अस्थायी रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बावजूद पांच दिनों में न कोई प्राथमिक रिपोर्ट सौंपी गई और न ही घोटाले की धनराशि या दोषियों को लेकर कोई आधिकारिक विवरण सामने आया है।
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जांच अधिकारी डाक निरीक्षक अमरपाल ने बताया कि जांच प्रक्रिया प्रगति पर है। अब तक 12 प्रभावित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। उनके अनुसार, तथ्यों का संकलन किया जा रहा है। इसके बाद विभागीय रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों व संबंधित पुलिस को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच को जल्दबाजी में निपटाने की बजाय तथ्यों के साथ निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
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उपभोक्ताओं की चिंता कायम, राहत की प्रतीक्षा
हालांकि जांच अधिकारी की यह सफाई आई है, लेकिन उपभोक्ताओं में अभी भी असंतोष और चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि बयान दर्ज होने के बावजूद उनके खातों की सुरक्षा या धन वापसी को लेकर अब तक कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर जांच की स्थिति को सार्वजनिक रूप से साझा करते रहें तो न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल होगा बल्कि अफवाहों और अविश्वास की स्थिति पर भी अंकुश लगेगा।