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Shahjahanpur News: रामगंगा के बाद अब गंगा ने खतरे का निशान किया पार
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जलालाबाद में खेत में भरे पानी को देखता बेबस ग्रामीण। संवाद
- फोटो : संवाद
शाहजहांपुर। पहाड़ से लेकर मैदानों तक हो रही भारी बारिश और बांधों-बैराजों से अतिरिक्त पानी की निकासी जारी रहने से बुधवार को कलान के भैंसार बांध पर गंगा भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गई।
मंगलवार को खतरे के निशान पर पहुंच चुकी रामगंगा का जलस्तर बढ़ जाने से मिर्जापुर और परौर से लेकर जलालाबाद व अल्हागंज तक दाेनों नदियों के तटों पर बसे करीब 48 गांव चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों को आवागमन के लिए मोटर बोट और नावें उपलब्ध कराई हैं। बाढ़ से घिरे गांवों की हजारों बीघा फसलें डूब जाने से उनके नष्ट हो जाने का खतरा बढ़ गया है। पशुओं के लिए हरा चारा का संकट भी पैदा हो गया है।
जलालाबाद। रामगंगा व उसकी सहायक बहगुल नदी में पानी बढ़ने से बुधवार की सुबह से क्षेत्र के दो दर्जन गांवाें में बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया। तिकोला पुल के एप्रोच रोड पर चार फुट से ज्यादा पानी आ जाने के कारण प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए वहां नाव की व्यवस्था कराई है। नदी के किनारे बसे कसारी गांव का संपर्क मार्ग भी डूब गया है। वहां करीब पांच फुट तक पानी आ जाने से मार्ग बंद हो गया है।
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संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव से कई जगह कट जाने से वाहनों के आवागमन लायक नहीं रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति ठप होने के साथ चारों ओर पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन स्वास्थ्य टीम उदासीन बनी हुई है। खेतों में कई फुट पानी भरा होने से धान, तिल, मैंथा आदि फसलें खराब होते देख किसानों की नींद उड़ गई है। पशुओं के लिए हरा चारा का संकट भी पैदा हो गया है।
प्रशासन ने तिकोला पुल पर आवागमन के लिए नाव सुलभ करा दी है, लेकिन नदी पार बसे एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों के लिए इकलौती नाव पर्याप्त नहीं है। आने-जाने वालाें को तपती धूप में खड़े होकर नाव का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग जान जोखिम में डालकर पैदल या बाइक से डूबे मार्ग पर आ-जा रहे हैं, जबकि वहां पानी का बहाव बहुत तेज है। सबसे ज्यादा परेशान वह छात्र-छात्राएं हैं, जो जलालाबाद के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने जाती-आती हैं। एसडीएम प्रभात राय ने बताया कि देर रात तक रामगंगा में पानी कम होने की संभावना है, फिर भी राहत से जुड़ी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने भूमि कटान का लिया जायजा
परौर। सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड अधीक्षण अभियंता नीलेश कुमार जैन सीतापुर से बुधवार को नारायणनगर पश्चिमी पहुंचे। उन्होंने वहां रामगंगा से हो रहे भूमि कटान का जायजा लिया और कटान रोकने के लिए विभागीय अभियंताओं को हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। फिलहाल, वहां बांस-बल्लियों के तिपाए बनाकर उनमें बालू की बोरियां फंसाकर डाली जा रहीं हैं।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने एसई से कहा कि पहले की तरह जब तक जिओ ट्यूब की ठोकरें नहीं लगेंगी, कटान रोकना संभव नहीं होगा। वर्ष 2020-21 में मोहनपुर एवं बाजार मोहल्ला के पास भूमि कटान होने पर लगाए गए जिओ ट्यूब भी खराब हो चुके हैं। इस वजह से रामगंगा की धारा गांव की ओर बढ़ रही है। मोहनपुर गांव भी रामगंगा के निशाने पर है। एसई, जैन ने बताया कि कटान रोकने के लिए फौरी उपाय किए जा रहे हैं। बाढ़ उतरने पर प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराकर सभी आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। इस दौरान अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर, सहायक अभियंता नेहा वर्मा, जेई मोहित कुमार, बृजेश कुमार, सुबोध कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
गंगा की बाढ़ में डूबे हेतमपुर-ढाई मार्ग समेत कई रास्ते
कलान। गंगा में उफान बढ़ जाने से बुधवार को करीब दर्जन तटवर्ती गांवों में आने-जाने के सभी रास्ते जलमग्न हो गए हैं। जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे और मिर्जापुर-जरियनपुर-ढाई मार्ग पर तीसरे दिन भी यातायात प्रतिबंधित रहा। हाईवे पर फर्रुखाबाद के चौरा गांव से लेकर बसोला गांव तक तीन किमी दायरे मेंं तीन फुट से ज्यादा पानी बह रहा है।
बुधवार को हेतमपुर-ढाई मार्ग पर पानी भर जाने से उसे भी बंद कर दिया गया। बाढ़ से घिरे गांवों के ग्रामीणों को रोजमर्रा की चीजें लाने में कठिनाई हो रही है। पैलानी उत्तर, बीघापुर सिठौली, मोती नगला, मोहकमपुर, महोलिया, लोहार नगला, पंखिया नगला, पकड़िया नगला, धोबीनगला, भरतपुर आदि गांवों के आसपास पानी भर जाने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस बीच, एसडीएम अभिषेक कुमार सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कई गांवों में अस्थायी बाढ़ चौकियां बनाने के निर्देश दिए हैं। संवाद
बाढ़ से 27 गांव प्रभावित
प्रशासन के अनुसार, गंगा और रामगंगा की बाढ़ से 27 गांव प्रभावित हैं। इसमें 12 गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है। बाकी गांवों में कृषि क्षेत्र प्रभावित है। बाढ़ राहत बचाव के लिए तीन मोटर बोट, 12 नाव, एक एसडीआरएफ की टीम और 12 बाढ़ चौकियां बनाई गईं हैं।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने लिया जायजा
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता नवीन जैन ने गंगा नदी पर भैसार बांध का निरीक्षण किया। इसके अलावा रामगंगा नदी में बाढ़ग्रस्त क्षेत्राें का जायजा लिया। एक्सईएन सुनील भास्कर ने बताया कि अधीक्षण अभियंता ने बाढ़ से सुरक्षा के लिए आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने शहर में अजीजगंज में गर्रा नदी की स्थिति को देखा नदी किनारे साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए।
बाढ़ क्षेत्र में निगरानी के लिए टीमें लगी हुईं हैं। लोगों से राहत शिविर में आने के लिए अपील की जा रही है। गांव में नाव और मोटर बोट भेजकर उनको निकाला जा रहा है। शरणालय में खाने की व्यवस्था कर दी गई है। बृहस्पतिवार से राहत किट का वितरण किया जाएगा। - अरविंद कुमार, एडीएम एफआर
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मंगलवार को खतरे के निशान पर पहुंच चुकी रामगंगा का जलस्तर बढ़ जाने से मिर्जापुर और परौर से लेकर जलालाबाद व अल्हागंज तक दाेनों नदियों के तटों पर बसे करीब 48 गांव चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गए हैं। प्रशासन ने ग्रामीणों को आवागमन के लिए मोटर बोट और नावें उपलब्ध कराई हैं। बाढ़ से घिरे गांवों की हजारों बीघा फसलें डूब जाने से उनके नष्ट हो जाने का खतरा बढ़ गया है। पशुओं के लिए हरा चारा का संकट भी पैदा हो गया है।
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जलालाबाद। रामगंगा व उसकी सहायक बहगुल नदी में पानी बढ़ने से बुधवार की सुबह से क्षेत्र के दो दर्जन गांवाें में बाढ़ का प्रकोप बढ़ गया। तिकोला पुल के एप्रोच रोड पर चार फुट से ज्यादा पानी आ जाने के कारण प्रशासन ने ग्रामीणों के लिए वहां नाव की व्यवस्था कराई है। नदी के किनारे बसे कसारी गांव का संपर्क मार्ग भी डूब गया है। वहां करीब पांच फुट तक पानी आ जाने से मार्ग बंद हो गया है।
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संपर्क मार्ग पानी के तेज बहाव से कई जगह कट जाने से वाहनों के आवागमन लायक नहीं रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति ठप होने के साथ चारों ओर पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन स्वास्थ्य टीम उदासीन बनी हुई है। खेतों में कई फुट पानी भरा होने से धान, तिल, मैंथा आदि फसलें खराब होते देख किसानों की नींद उड़ गई है। पशुओं के लिए हरा चारा का संकट भी पैदा हो गया है।
प्रशासन ने तिकोला पुल पर आवागमन के लिए नाव सुलभ करा दी है, लेकिन नदी पार बसे एक दर्जन गांवों के ग्रामीणों के लिए इकलौती नाव पर्याप्त नहीं है। आने-जाने वालाें को तपती धूप में खड़े होकर नाव का घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कई लोग जान जोखिम में डालकर पैदल या बाइक से डूबे मार्ग पर आ-जा रहे हैं, जबकि वहां पानी का बहाव बहुत तेज है। सबसे ज्यादा परेशान वह छात्र-छात्राएं हैं, जो जलालाबाद के विभिन्न स्कूलों में पढ़ने जाती-आती हैं। एसडीएम प्रभात राय ने बताया कि देर रात तक रामगंगा में पानी कम होने की संभावना है, फिर भी राहत से जुड़ी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने भूमि कटान का लिया जायजा
परौर। सिंचाई विभाग शारदा नहर खंड अधीक्षण अभियंता नीलेश कुमार जैन सीतापुर से बुधवार को नारायणनगर पश्चिमी पहुंचे। उन्होंने वहां रामगंगा से हो रहे भूमि कटान का जायजा लिया और कटान रोकने के लिए विभागीय अभियंताओं को हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए। फिलहाल, वहां बांस-बल्लियों के तिपाए बनाकर उनमें बालू की बोरियां फंसाकर डाली जा रहीं हैं।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने एसई से कहा कि पहले की तरह जब तक जिओ ट्यूब की ठोकरें नहीं लगेंगी, कटान रोकना संभव नहीं होगा। वर्ष 2020-21 में मोहनपुर एवं बाजार मोहल्ला के पास भूमि कटान होने पर लगाए गए जिओ ट्यूब भी खराब हो चुके हैं। इस वजह से रामगंगा की धारा गांव की ओर बढ़ रही है। मोहनपुर गांव भी रामगंगा के निशाने पर है। एसई, जैन ने बताया कि कटान रोकने के लिए फौरी उपाय किए जा रहे हैं। बाढ़ उतरने पर प्रभावित क्षेत्र का सर्वे कराकर सभी आवश्यक कार्य कराए जाएंगे। इस दौरान अधिशासी अभियंता सुनील कुमार भास्कर, सहायक अभियंता नेहा वर्मा, जेई मोहित कुमार, बृजेश कुमार, सुबोध कुमार आदि मौजूद रहे। संवाद
गंगा की बाढ़ में डूबे हेतमपुर-ढाई मार्ग समेत कई रास्ते
कलान। गंगा में उफान बढ़ जाने से बुधवार को करीब दर्जन तटवर्ती गांवों में आने-जाने के सभी रास्ते जलमग्न हो गए हैं। जलालाबाद-शमशाबाद स्टेट हाईवे और मिर्जापुर-जरियनपुर-ढाई मार्ग पर तीसरे दिन भी यातायात प्रतिबंधित रहा। हाईवे पर फर्रुखाबाद के चौरा गांव से लेकर बसोला गांव तक तीन किमी दायरे मेंं तीन फुट से ज्यादा पानी बह रहा है।
बुधवार को हेतमपुर-ढाई मार्ग पर पानी भर जाने से उसे भी बंद कर दिया गया। बाढ़ से घिरे गांवों के ग्रामीणों को रोजमर्रा की चीजें लाने में कठिनाई हो रही है। पैलानी उत्तर, बीघापुर सिठौली, मोती नगला, मोहकमपुर, महोलिया, लोहार नगला, पंखिया नगला, पकड़िया नगला, धोबीनगला, भरतपुर आदि गांवों के आसपास पानी भर जाने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस बीच, एसडीएम अभिषेक कुमार सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कई गांवों में अस्थायी बाढ़ चौकियां बनाने के निर्देश दिए हैं। संवाद
बाढ़ से 27 गांव प्रभावित
प्रशासन के अनुसार, गंगा और रामगंगा की बाढ़ से 27 गांव प्रभावित हैं। इसमें 12 गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है। बाकी गांवों में कृषि क्षेत्र प्रभावित है। बाढ़ राहत बचाव के लिए तीन मोटर बोट, 12 नाव, एक एसडीआरएफ की टीम और 12 बाढ़ चौकियां बनाई गईं हैं।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने लिया जायजा
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता नवीन जैन ने गंगा नदी पर भैसार बांध का निरीक्षण किया। इसके अलावा रामगंगा नदी में बाढ़ग्रस्त क्षेत्राें का जायजा लिया। एक्सईएन सुनील भास्कर ने बताया कि अधीक्षण अभियंता ने बाढ़ से सुरक्षा के लिए आवश्यक दिशानिर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने शहर में अजीजगंज में गर्रा नदी की स्थिति को देखा नदी किनारे साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए।
बाढ़ क्षेत्र में निगरानी के लिए टीमें लगी हुईं हैं। लोगों से राहत शिविर में आने के लिए अपील की जा रही है। गांव में नाव और मोटर बोट भेजकर उनको निकाला जा रहा है। शरणालय में खाने की व्यवस्था कर दी गई है। बृहस्पतिवार से राहत किट का वितरण किया जाएगा। - अरविंद कुमार, एडीएम एफआर

जलालाबाद में खेत में भरे पानी को देखता बेबस ग्रामीण। संवाद- फोटो : संवाद

जलालाबाद में खेत में भरे पानी को देखता बेबस ग्रामीण। संवाद- फोटो : संवाद

जलालाबाद में खेत में भरे पानी को देखता बेबस ग्रामीण। संवाद- फोटो : संवाद