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Shahjahanpur News: डीएपी के बाद अब यूरिया का संकट, किसान परेशान
Sun, 01 Dec 2024 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 01 Dec 2024 01:13 AM IST
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इमरान बेग
शाहजहांपुर। गेहूं की बोआई के दौरान डीएपी के लिए परेशान रहे अन्नदाता अब अंकुरित फसल में यूरिया लगाने के लिए समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। मीरानपुर कटरा, सिंधौली और परौर में सबसे ज्यादा किसान परेशान हैं। हालांकि, सचिवों ने एक-दो दिन में यूरिया के वितरण का दावा किया है।
गेहूं की बोआई शुरू होते ही हर वर्ष खाद के लिए मारामारी शुरू हो जाती हैं। पहले डीएपी की एक बोरी पाने के लिए किसानों को कई दिन तक घंटों कतार में लगना पड़ा। अब करीब 90 प्रतिशत बोआई पूरी हो चुकी है। अब समितियों समेत खाद की निजी दुकानों पर डीएपी की मांग घट गई है। जिन किसानों ने बोआई पहले कर दी, उनके खेतों में गेहूं के पौधे बढ़ने लगे हैं। इस समय फसल को यूरिया देने की जरूरत पड़ती है। मांग बढ़ने पर किसान अब यूरिया की किल्लत से जूझ रहे हैं।
मीरानपुर कटरा में बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति में किसानों को आलू, गेहूं व सरसों आदि फसलों के लिए डीएपी दी जा रही है, लेकिन यूरिया उपलब्ध नहीं है।शुक्रवार को समिति के अकाउंटेंट प्रांजल सक्सेना ने करीब सवा सौ किसानों को 200 कट्टे डीएपी खाद बांटी। इसके बाद 200 कट्टे डीएपी खाद गोदाम पर बची थी, जबकि किसान यूरिया की मांग रहे हैं। एडीओ पंचायत महावीर सिंह ने बताया कि यूरिया के लिए चेक लगा दिया गया है। एक-दो दिन में उसका वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
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जलालाबाद में शुक्रवार को फरीदापुर, गुलड़िया व पिटारमऊ समितियों पर डीएपी का वितरण होता रहा, लेकिन किसान कम पहुंचे। एडीओ कोऑपरेटिव संजय दीक्षित ने बताया कि यूरिया की जरूरत के मुताबिक उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। भटा देवर समिति में 350 बोरी, गुरुगवां में 275 बोरी और निबऊ नगला समिति में करीब 250 बोरी यूरिया उपलब्ध हैं।
सिंधौली की सहकारी संघ के गोदाम में डीएपी के अलावा यूरिया खाद पर्याप्त मात्रा में मंगा ली गई है, क्योंकि किसानों में यूरिया की मांग एकाएक बढ़ गई है। डीएपी वही किसान मांग रहे हैं, जिनकी बोआई पिछड़ गई है। समिति के सचिव नरेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि यूरिया की 1800 बोरी और डीएपी की 360 बोरी खाद स्टॉक में उपलब्ध है।
परौर में दी जा रही एनपीके
परौर। चौकिया साधन सहकारी समिति पर इन दिनों डीएपी और यूरिया खाद नहीं होने से किसान परेशान घूम रहे हैं। शुक्रवार को चौकिया समिति पर डीएपी और यूरिया खाद लेने गए तमाम किसानों को एनपीके लेकर संतोष करना पड़ा। समिति के गोदाम पर गत सप्ताह एक ट्रक डीएपी (450 बोरी) आई थी। उसका वितरण होने के बाद अब डीएपी भी नहीं बची। हालांकि, डीएपी मांगने वाले किसान अब कम हैं। बगरा निवासी डोरी लाल ने बताया कि वह कई बार समिति के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिली। नारायणनगर के संजीव कुमार और नयागांव के सत्यवीर सिंह भी यूरिया नहीं मिलने से परेशान हैं। संवाद
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बहु उद्देश्यीय प्राथमिक सहकारी समिति से तीन कट्टे डीएपी खाद मिल गई, लेकिन सुबह से बैठने के बाद भी यूरिया नहीं मिली। सचिव का कहना है कि यूरिया का नया स्टाॅक अभी आया नहीं है।
-नरेंद्र गंगवार, नौगवां, मीरानपुर कटरा
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हमने गेंहू की बोआई कर ली है। अब फसल बढ़ने पर यूरिया लगानी है। समिति पर अभी यूरिया आई नहीं है। इसलिए बाजार से मजबूरी में महंगी खाद खरीदनी होगी।
-इमरान बेग, बैवहा, मीरानपुर कटरा
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जिले में वर्तमान में चार हजार टन डीएपी और 40 हजार टन यूरिया का भंडार उपलब्ध है। सभी सहकारी साधन समितियों पर खाद का वितरण किया गया है। सभी जगह आसानी से खाद उपलब्ध हो रही है।
- विकास किशोर शर्मा, जिला कृषि अधिकारी
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गेहूं की बोआई शुरू होते ही हर वर्ष खाद के लिए मारामारी शुरू हो जाती हैं। पहले डीएपी की एक बोरी पाने के लिए किसानों को कई दिन तक घंटों कतार में लगना पड़ा। अब करीब 90 प्रतिशत बोआई पूरी हो चुकी है। अब समितियों समेत खाद की निजी दुकानों पर डीएपी की मांग घट गई है। जिन किसानों ने बोआई पहले कर दी, उनके खेतों में गेहूं के पौधे बढ़ने लगे हैं। इस समय फसल को यूरिया देने की जरूरत पड़ती है। मांग बढ़ने पर किसान अब यूरिया की किल्लत से जूझ रहे हैं।
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मीरानपुर कटरा में बहुउद्देशीय प्राथमिक सहकारी समिति में किसानों को आलू, गेहूं व सरसों आदि फसलों के लिए डीएपी दी जा रही है, लेकिन यूरिया उपलब्ध नहीं है।शुक्रवार को समिति के अकाउंटेंट प्रांजल सक्सेना ने करीब सवा सौ किसानों को 200 कट्टे डीएपी खाद बांटी। इसके बाद 200 कट्टे डीएपी खाद गोदाम पर बची थी, जबकि किसान यूरिया की मांग रहे हैं। एडीओ पंचायत महावीर सिंह ने बताया कि यूरिया के लिए चेक लगा दिया गया है। एक-दो दिन में उसका वितरण शुरू करा दिया जाएगा।
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जलालाबाद में शुक्रवार को फरीदापुर, गुलड़िया व पिटारमऊ समितियों पर डीएपी का वितरण होता रहा, लेकिन किसान कम पहुंचे। एडीओ कोऑपरेटिव संजय दीक्षित ने बताया कि यूरिया की जरूरत के मुताबिक उपलब्धता बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। भटा देवर समिति में 350 बोरी, गुरुगवां में 275 बोरी और निबऊ नगला समिति में करीब 250 बोरी यूरिया उपलब्ध हैं।
सिंधौली की सहकारी संघ के गोदाम में डीएपी के अलावा यूरिया खाद पर्याप्त मात्रा में मंगा ली गई है, क्योंकि किसानों में यूरिया की मांग एकाएक बढ़ गई है। डीएपी वही किसान मांग रहे हैं, जिनकी बोआई पिछड़ गई है। समिति के सचिव नरेंद्र कुमार सक्सेना ने बताया कि यूरिया की 1800 बोरी और डीएपी की 360 बोरी खाद स्टॉक में उपलब्ध है।
परौर में दी जा रही एनपीके
परौर। चौकिया साधन सहकारी समिति पर इन दिनों डीएपी और यूरिया खाद नहीं होने से किसान परेशान घूम रहे हैं। शुक्रवार को चौकिया समिति पर डीएपी और यूरिया खाद लेने गए तमाम किसानों को एनपीके लेकर संतोष करना पड़ा। समिति के गोदाम पर गत सप्ताह एक ट्रक डीएपी (450 बोरी) आई थी। उसका वितरण होने के बाद अब डीएपी भी नहीं बची। हालांकि, डीएपी मांगने वाले किसान अब कम हैं। बगरा निवासी डोरी लाल ने बताया कि वह कई बार समिति के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन यूरिया नहीं मिली। नारायणनगर के संजीव कुमार और नयागांव के सत्यवीर सिंह भी यूरिया नहीं मिलने से परेशान हैं। संवाद
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बहु उद्देश्यीय प्राथमिक सहकारी समिति से तीन कट्टे डीएपी खाद मिल गई, लेकिन सुबह से बैठने के बाद भी यूरिया नहीं मिली। सचिव का कहना है कि यूरिया का नया स्टाॅक अभी आया नहीं है।
-नरेंद्र गंगवार, नौगवां, मीरानपुर कटरा
हमने गेंहू की बोआई कर ली है। अब फसल बढ़ने पर यूरिया लगानी है। समिति पर अभी यूरिया आई नहीं है। इसलिए बाजार से मजबूरी में महंगी खाद खरीदनी होगी।
-इमरान बेग, बैवहा, मीरानपुर कटरा
जिले में वर्तमान में चार हजार टन डीएपी और 40 हजार टन यूरिया का भंडार उपलब्ध है। सभी सहकारी साधन समितियों पर खाद का वितरण किया गया है। सभी जगह आसानी से खाद उपलब्ध हो रही है।
- विकास किशोर शर्मा, जिला कृषि अधिकारी

इमरान बेग