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कलान को तहसील बनाने में वकील दो गुटों में बंटे
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Thu, 01 Sep 2016 11:57 PM IST
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कलान को तहसील बनाए जाने की चल रही प्रक्रिया को लेकर तहसील पर जारी हड़ताल के मुद्दे पर अधिवक्ता दो गुटों में बंट गए हैं। बार संघ से जुड़े अधिवक्ता जहां इस मुद्दे पर बीते कई दिनों से न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर विरोध जता रहे हैं वहीं सिविल बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों ने बृहस्पतिवार को सिविल जज से मुलाकात कर हड़ताल का विरोध करते हुए न्यायिक कार्य शुरू किए जाने की मांग की है।
मालूम हो कि कलान की नवसृजित तहसील में ब्लाक मिर्जापुर को शामिल किए जाने का बार संघ से जुड़े अधिवक्ता बराबर विरोध करते आ रहे हैं। इनका कहना है कि ब्लाक मिर्जापुर की जगह उक्त तहसील में उसावां क्षेत्र के गांवों को शामिल किया जाए। इसको लेकर बार संघ अधिवक्ताओं के शिष्टमंडल ने तीन दिन पहले राजस्व परिषद के अध्यक्ष तथा मंडलायुक्त से मुलाकात कर उनके समक्ष न केवल अपनी मांग को रखा बल्कि मिर्जापुर क्षेत्र के करीब 40 ग्राम पंचायतों के प्रधानों की ओर से इस निर्णय के विरोध में पारित किए गए प्रस्तावों को भी उन्हें सौंपा। इसी मांग को लेकर बार संघ के अधिवक्ता बीते 15 दिनों से न्यायिक कार्यो का बहिष्कार भी करते आ रहे हैं।
उधर, इस मामले में तहसील का सिविल बार भी अब शामिल हो गया है और इससे जुड़े अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य ठप कर रखने के बार संघ के फैसले को गलत ठहराते हुए सिविल जज से मुलाकात की और उनसे डायस पर बैठकर मुकदमों की सुनवाई करने की अपील की। इन वकीलों का कहना था वे लोग मुकदमा संबंधी कार्य करना चाहते हैं।
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मालूम हो कि कलान की नवसृजित तहसील में ब्लाक मिर्जापुर को शामिल किए जाने का बार संघ से जुड़े अधिवक्ता बराबर विरोध करते आ रहे हैं। इनका कहना है कि ब्लाक मिर्जापुर की जगह उक्त तहसील में उसावां क्षेत्र के गांवों को शामिल किया जाए। इसको लेकर बार संघ अधिवक्ताओं के शिष्टमंडल ने तीन दिन पहले राजस्व परिषद के अध्यक्ष तथा मंडलायुक्त से मुलाकात कर उनके समक्ष न केवल अपनी मांग को रखा बल्कि मिर्जापुर क्षेत्र के करीब 40 ग्राम पंचायतों के प्रधानों की ओर से इस निर्णय के विरोध में पारित किए गए प्रस्तावों को भी उन्हें सौंपा। इसी मांग को लेकर बार संघ के अधिवक्ता बीते 15 दिनों से न्यायिक कार्यो का बहिष्कार भी करते आ रहे हैं।
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उधर, इस मामले में तहसील का सिविल बार भी अब शामिल हो गया है और इससे जुड़े अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य ठप कर रखने के बार संघ के फैसले को गलत ठहराते हुए सिविल जज से मुलाकात की और उनसे डायस पर बैठकर मुकदमों की सुनवाई करने की अपील की। इन वकीलों का कहना था वे लोग मुकदमा संबंधी कार्य करना चाहते हैं।
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