{"_id":"583c77064f1c1bc91fde586e","slug":"ado-panchayat-over-control-of-the-bdo","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडीओ पंचायत पर खत्म करें बीडीओ का नियंत्रण ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडीओ पंचायत पर खत्म करें बीडीओ का नियंत्रण
ब्यूरो, अमर उजाला शाहजहांपुर
Updated Mon, 28 Nov 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को ग्राम्य विकास विभाग के अधीन किए जाने के संबंध में प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेश वापस लिए जाने की मांग को लेकर पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों ने विभागीय सेवा परिषद के प्रांतीय आह्वान पर सोमवार को खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड पर प्रदर्शन कर धरना दिया। इस मौके पर हुई सभा में परिषद के पदाधिकारियों ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों को निशाने पर लिया और मुख्यमंत्री के नाम 17 सूत्री मांग पत्र भेजा। धरना-प्रदर्शन में डीपीआरओ दफ्तर और विकास खंड कार्यालयों के पंचायती राज कर्मचारियों समेत ग्राम पंचायतों में तैनात विभागीय सफाई कर्मचारी बड़ी संख्या में सुबह से जीआईसी ग्राउंड पर जमा होने लगे। धरना स्थल पर सभा को संबोधित करते हुए पंचायती राज सेवा परिषद के जिलाध्यक्ष विजय सिंह तोमर ने ब्लॉक स्तर पर एडीओ पंचायत को बीडीओ के नियंत्रण में किए जाने संबंधी शासनादेश को एक पक्षीय और अपमानजनक बताया।
उन्होंने कहा कि एक अगस्त को जारी राजाज्ञा से दोनों विभागों में वैचारिक टकराव बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और पंचायती राज विभाग भी कमजोर हो रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण विकास के लिए पंचायत इंस्पेक्टर अर्थात वर्तमान एडीओ पंचायत की सर्किल को विकास खंड नाम दिया गया। उस समय बीडीओ का पद केवल एडीओ पंचायत के पदोन्नति का पद मान्य किया गया।
जिला महामंत्री रमेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होनेे के बाद से विभाग के कार्य और दायित्वों में अभूतपूर्व वृद्धि हो गई है। इसके बावजूद विभाग को महत्वहीन बनाए जाने के शासकीय प्रयास समझ से परे हैं। राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि परिषद की मांगों पर सकारात्मक विचार कर समाधान नहीं किया गया तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। धरना प्रदर्शन में विनोद कुमार छावला, उमेश भारती, रामकुमार, सत्यपाल, प्रमोद गंगवार, संजय सिंह, अखलाक अहमद आदि ने कर्मचारियों का नेतृत्व किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि एक अगस्त को जारी राजाज्ञा से दोनों विभागों में वैचारिक टकराव बढ़ने के साथ ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और पंचायती राज विभाग भी कमजोर हो रहा है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण विकास के लिए पंचायत इंस्पेक्टर अर्थात वर्तमान एडीओ पंचायत की सर्किल को विकास खंड नाम दिया गया। उस समय बीडीओ का पद केवल एडीओ पंचायत के पदोन्नति का पद मान्य किया गया।
विज्ञापन
जिला महामंत्री रमेश चंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होनेे के बाद से विभाग के कार्य और दायित्वों में अभूतपूर्व वृद्धि हो गई है। इसके बावजूद विभाग को महत्वहीन बनाए जाने के शासकीय प्रयास समझ से परे हैं। राष्ट्रपति के नाम सिटी मजिस्ट्रेट को दिए ज्ञापन में कहा गया है कि परिषद की मांगों पर सकारात्मक विचार कर समाधान नहीं किया गया तो विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सामूहिक हड़ताल पर चले जाएंगे। धरना प्रदर्शन में विनोद कुमार छावला, उमेश भारती, रामकुमार, सत्यपाल, प्रमोद गंगवार, संजय सिंह, अखलाक अहमद आदि ने कर्मचारियों का नेतृत्व किया।
विज्ञापन