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Shahjahanpur News: निर्मल मन जन सो मोहि पावा...
Sun, 05 May 2024 02:15 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Sun, 05 May 2024 02:15 AM IST
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पुवायां। गांव नाहिल में बाबा भूमिसेन मंदिर परिसर में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का शनिवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इसके बाद कन्या भोज और भंडारे का आयोजन किया गया।
पूर्णाहुति के बाद स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थानंद सरस्वती महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि विशुद्ध इंद्रियों में ही परमात्मा का प्रकाश होता है इसलिए इंद्रियों को शुद्ध करना और शुद्ध रखना चाहिए। निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा उक्त छंद के अर्थ को बताया। कहा कि निर्मल मन से ही ईश्वर की अनुभूति की जा सकती है।
मुंबई से आए आचार्य सुशील सत्पंथी ने कहा कि ईश्वर तत्व को प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम मार्ग भक्ति का है। भक्ति के लिए सबसे पहले संतों की शरण में व्यक्ति को जाना चाहिए। संतों की शरण में जाने से ही सत्संग रूपी फल की प्राप्ति होती है। इंद्रियों को जीव यदि भक्ति में समाहित करें तो निश्चित रूप से वह जीव भवसागर पार कर सकता है। प्रवचन के बाद आयोजित भंडारे में गांव नाहिल के अलावा आसपास के गांवों के भी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में गांव के तमाम लोगों का सहयोग रहा।
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पूर्णाहुति के बाद स्वामी अनिरुद्धानंद तीर्थानंद सरस्वती महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि विशुद्ध इंद्रियों में ही परमात्मा का प्रकाश होता है इसलिए इंद्रियों को शुद्ध करना और शुद्ध रखना चाहिए। निर्मल मन जन सो मोहि पावा मोहि कपट छल छिद्र न भावा उक्त छंद के अर्थ को बताया। कहा कि निर्मल मन से ही ईश्वर की अनुभूति की जा सकती है।
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मुंबई से आए आचार्य सुशील सत्पंथी ने कहा कि ईश्वर तत्व को प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम मार्ग भक्ति का है। भक्ति के लिए सबसे पहले संतों की शरण में व्यक्ति को जाना चाहिए। संतों की शरण में जाने से ही सत्संग रूपी फल की प्राप्ति होती है। इंद्रियों को जीव यदि भक्ति में समाहित करें तो निश्चित रूप से वह जीव भवसागर पार कर सकता है। प्रवचन के बाद आयोजित भंडारे में गांव नाहिल के अलावा आसपास के गांवों के भी लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में गांव के तमाम लोगों का सहयोग रहा।
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