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मुआवजे के लिए हाईवे पर शव रख लगाया जाम
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Fri, 23 Jun 2017 12:03 AM IST
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एचटी लाइन के करंट की चपेट में आकर बुधवार को दो युवकों की मौत के मामले में बृहस्पतिवार सुबह नगला बन्नू उर्फ नगरिया गांव के बाहर ग्रामीणों ने हाईवे पर शव रखकर जाम लगा दिया। ग्रामीण मृतकों के आश्रितों को मुआवजा देने की मांग कर रहे थे। कटरा-जलालाबाद स्टेट हाईवे पर जाम लगने से वाहनों की लंबी कतारें लग गई। लगभग चार घंटे बाद एसडीएम सदर ने मौके पर पहुंचकर मृतक आश्रितों को एक-एक लाख रुपये का चेक दिया, तब जाम खोला गया। इसके बाद वाहनों को पास कराने में पुलिस के पसीने छूट गए।
बुधवार रात लगभग डेढ़ बजे मोनू और सत्यवीर के शव का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से शव लेकर घरवाले बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे गांव पहुंचे। हाईवे से गांव को जाने वाले रास्ते के पास जैसे ही ट्रैक्टर-ट्रॉली पहुंची, तभी उन लोगों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी और शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिवार वालों का कहना था कि दो लोगों की मौत पर मुआवजे का केवल आश्वासन दिया गया। जब तक प्रशासन या बिजली विभाग मुआवजा राशि नहीं देता है, जाम नहीं खोला जाएगा। हाईवे जाम के चलते कुछ ही देर में वाहनों की लंबी लाइन लग गई।
सूचना मिलते ही एसओ मदनापुर प्रभुकांत भी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और लोगों से जाम खोलने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों नहीं माने। लगभग साढ़े दस बजे एसडीएम तिलहर मोइनउल इस्लाम और सीओ सदर अखिलेश भदौरिया मौके पर पहुंचे और बिजली विभाग की ओर से एक-एक लाख रुपये की राशि के चेक सौंपकर लोगों को शांत किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मुआवजा राशि दिलवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम खोला गया। मृतक आश्रितों को रेड क्रास सोसाइटी से भी एक-एक लाख की मदद देने का आश्वासन डीएम घटना वाले दिन ही दे चुके हैं।
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इसलिए भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
नगला बन्नू से कुछ दूरी पर स्थित चंदौखा गुरुद्वारा में चार जून को सेवादार गुरुबख्श सिंह की भी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। प्रशासन और बिजली विभाग ने मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक मृतक आश्रित को मुआवजा राशि नहीं दी गई। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी लगी तो उनका गुस्सा भड़क गया।
सीओ सदर से हुई नोकझोंक
चार जून को करंट लगने से मरे सेवादार गुरुबख्श सिंह के घरवालों की जाम स्थल पर सीओ सदर अखिलेश भदौरिया से नोकझोंक हो गई। गुरुबख्श सिंह के घरवालों का कहना था कि प्रशासन केवल जाम या आंदोलन की ही भाषा समझता है। घटना के बाद आज तक उनके परिवार को कोई भी मुआवजा राशि नहीं दी गई है।
दोबारा लाइन चालू करना बना हादसे का सबब
नगला बन्नू उर्फ नगरिया में बुधवार को हाईटेंशन लाइन के करंट से हुईं दो मौतों पर भले ही बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करे, लेकिन गलती घटना के समय मदनापुर बिजली स्टेशन पर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी की थी। जिला अस्पताल में भर्ती दिनेश सिंह ने बताया कि रात में हल्की बारिश के बीच तार टूटकर बटिया पर गिरा तो उस वक्त लाइट चली गई थी, लेकिन खंभे पर लगे इंसुलेटर में कुछ देर तक आग सुलगती रही। दोपहर एक बजे जैसे ही बिजली आई तो तार में प्रवाहित करंट से गीली बटिया धीरे-धीरे सुलगने लगी। दोपहर लगभग दो बजे अचानक तेज लपटें उठने लगीं, तभी गांव के लोग आग बुझाने दौड़ पड़े। गांव के ही अवनीश ने मदनापुर बिजली सब स्टेशन को फोन किया तो लाइन काट दी गई। इसके बाद ग्रामीण बटिया से तार हटाकर पास में ही प्राइवेट ट्यूबवेल से पानी लेकर आ बुझाने में जुट गए। आग बुझाने के दौरान ही अचानक फिर से टूटे तार में करंट प्रवाहित होने लगा। जिस तरफ तार पड़ा था, उस तरफ सोनू, सत्यवीर, सुशील और दिनेश मौजूद थे। पहले सत्यवीर फिर मोनू और उसके बाद दिनेश चपेट में आ गए। दिनेश ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज बेहतर हो रहा है और वह अब सही है, लेकिन कुछ दवाइयां उन्हें बाहर से भी मंगानी पड़ीं।
...तब तो बिछ जातीं दर्जनों लाशें
जीवित बचे दिनेश सिंह ने बताया कि बटिया से हटाकर जिस तरफ तार डाला गया था, उस तरफ केवल वह, मोनू, सत्यवीर और सुशील थे, जबकि गांव के लोगों की भीड़ दूसरी तरफ से आग पर पानी डाल रही थी। यदि तार की तरफ और भी ग्रामीण होते या फिर आग बुझाने से पहले लाइन काटी नहीं जाती तो दर्जनों की संख्या में लाशें बिछ जातीं।
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बुधवार रात लगभग डेढ़ बजे मोनू और सत्यवीर के शव का पोस्टमार्टम हुआ। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्रॉली से शव लेकर घरवाले बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे गांव पहुंचे। हाईवे से गांव को जाने वाले रास्ते के पास जैसे ही ट्रैक्टर-ट्रॉली पहुंची, तभी उन लोगों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली आड़ी-तिरछी खड़ी कर दी और शव सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिवार वालों का कहना था कि दो लोगों की मौत पर मुआवजे का केवल आश्वासन दिया गया। जब तक प्रशासन या बिजली विभाग मुआवजा राशि नहीं देता है, जाम नहीं खोला जाएगा। हाईवे जाम के चलते कुछ ही देर में वाहनों की लंबी लाइन लग गई।
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सूचना मिलते ही एसओ मदनापुर प्रभुकांत भी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए और लोगों से जाम खोलने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों नहीं माने। लगभग साढ़े दस बजे एसडीएम तिलहर मोइनउल इस्लाम और सीओ सदर अखिलेश भदौरिया मौके पर पहुंचे और बिजली विभाग की ओर से एक-एक लाख रुपये की राशि के चेक सौंपकर लोगों को शांत किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी मुआवजा राशि दिलवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम खोला गया। मृतक आश्रितों को रेड क्रास सोसाइटी से भी एक-एक लाख की मदद देने का आश्वासन डीएम घटना वाले दिन ही दे चुके हैं।
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इसलिए भड़का ग्रामीणों का गुस्सा
नगला बन्नू से कुछ दूरी पर स्थित चंदौखा गुरुद्वारा में चार जून को सेवादार गुरुबख्श सिंह की भी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। प्रशासन और बिजली विभाग ने मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक मृतक आश्रित को मुआवजा राशि नहीं दी गई। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी लगी तो उनका गुस्सा भड़क गया।
सीओ सदर से हुई नोकझोंक
चार जून को करंट लगने से मरे सेवादार गुरुबख्श सिंह के घरवालों की जाम स्थल पर सीओ सदर अखिलेश भदौरिया से नोकझोंक हो गई। गुरुबख्श सिंह के घरवालों का कहना था कि प्रशासन केवल जाम या आंदोलन की ही भाषा समझता है। घटना के बाद आज तक उनके परिवार को कोई भी मुआवजा राशि नहीं दी गई है।
दोबारा लाइन चालू करना बना हादसे का सबब
नगला बन्नू उर्फ नगरिया में बुधवार को हाईटेंशन लाइन के करंट से हुईं दो मौतों पर भले ही बिजली विभाग अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करे, लेकिन गलती घटना के समय मदनापुर बिजली स्टेशन पर ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी की थी। जिला अस्पताल में भर्ती दिनेश सिंह ने बताया कि रात में हल्की बारिश के बीच तार टूटकर बटिया पर गिरा तो उस वक्त लाइट चली गई थी, लेकिन खंभे पर लगे इंसुलेटर में कुछ देर तक आग सुलगती रही। दोपहर एक बजे जैसे ही बिजली आई तो तार में प्रवाहित करंट से गीली बटिया धीरे-धीरे सुलगने लगी। दोपहर लगभग दो बजे अचानक तेज लपटें उठने लगीं, तभी गांव के लोग आग बुझाने दौड़ पड़े। गांव के ही अवनीश ने मदनापुर बिजली सब स्टेशन को फोन किया तो लाइन काट दी गई। इसके बाद ग्रामीण बटिया से तार हटाकर पास में ही प्राइवेट ट्यूबवेल से पानी लेकर आ बुझाने में जुट गए। आग बुझाने के दौरान ही अचानक फिर से टूटे तार में करंट प्रवाहित होने लगा। जिस तरफ तार पड़ा था, उस तरफ सोनू, सत्यवीर, सुशील और दिनेश मौजूद थे। पहले सत्यवीर फिर मोनू और उसके बाद दिनेश चपेट में आ गए। दिनेश ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज बेहतर हो रहा है और वह अब सही है, लेकिन कुछ दवाइयां उन्हें बाहर से भी मंगानी पड़ीं।
...तब तो बिछ जातीं दर्जनों लाशें
जीवित बचे दिनेश सिंह ने बताया कि बटिया से हटाकर जिस तरफ तार डाला गया था, उस तरफ केवल वह, मोनू, सत्यवीर और सुशील थे, जबकि गांव के लोगों की भीड़ दूसरी तरफ से आग पर पानी डाल रही थी। यदि तार की तरफ और भी ग्रामीण होते या फिर आग बुझाने से पहले लाइन काटी नहीं जाती तो दर्जनों की संख्या में लाशें बिछ जातीं।