फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   गुरमीत सिंह से मिलने को रवाना हुईं दलवीर

गुरमीत सिंह से मिलने को रवाना हुईं दलवीर

Mon, 08 Apr 2013 05:30 AM IST
Shahjahanpur
Shahjahanpur Updated Mon, 08 Apr 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
ननद-ननदोई भी इलाहाबाद साथ गए
विज्ञापन

अमर उजाला नेटवर्क
पुवायां/ मकसूदापुर। जेल में फांसी की तिथि तय होने का इंतजार कर रहे गुरमीत सिंह से मिलने को पत्नी दलवीर कौर आज ननद और ननदोई के साथ इलाहाबाद रवाना हो गईं।
दया याचिका खारिज होने के बाद पति को फांसी की सजा तय होने से पत्नी दलवीर कौर काफी परेशान हैं। वह अपने मायके पूरनपुर क्षेत्र के गांव गुलड़िया में रह रही हैं। गुरमीत की बहन बंडा के गांव भांवी निवासी मिंदर कौर और बहनोई जागीर सिंह भी फांसी तय होने से निराश हैं। उनका मानना था कि गुरमीत ने लगभग 27 वर्ष जेल में गुजार लिए हैं। उसे अपने किए का दंड मिल चुका है। उसकी सजा को उम्रकैद में बदला जाना चाहिए था। ननद और ननदोई की ओर से सहानुभूति मिलने के बाद दलवीर कौर बीती शाम उनके घर पहुंची और पति से मिलने जाने की इच्छा जाहिर की। भाभी की इच्छा जानकार बहन भी अपने को भाई से मिलने का लोभ नहीं रोक सकी और पति से इलाहाबाद चलने को कहा। आज जागीर सिंह समेत तीनों शाहजहांपुर रवाना हुए। यहां से वह इलाहाबाद को रवाना हो रहे हैं।
विज्ञापन




यह हो सकती है
उम्मीद की किरण
पुवायां। गुरमीत की दया याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसकी फांसी पर चार सप्ताह को रोक लगा दी है। कानून के जानकारों की राय है कि उसके लिए अभी उम्मीद की एक किरण बाकी है। अधिवक्ता सुधीर त्रिवेदी के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में चंदन तस्कर के साथियों और देवेंद्र पाल सिंह भुल्लर की याचिका लंबित है। इसमें फांसी में देरी को आधार बनाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

गुरमीत के साथ ही हरियाणा के धर्मपाल की याचिका भी खारिज हुई थी। उसने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में उपरोक्त मामले को आधार बनाते हुए याचिका दायर की है कि चंदन तस्कर के साथियों और भुल्लर का याचिका पर फैसला आने तक उसकी फांसी पर रोक लगाने की गुहार की है। कोर्ट ने उसकी फांसी पर 10 अप्रैल तक रोक लगते हुए हरियाणा सरकार और डीजीपी जेल को नोटिस जारी किया है। यदि उसे राहत मिलती है तो गुरमीत को भी इसी आधार पर राहत मिल सकती है।


वाहेगुरुदी मेहर
गुरमीत सिंह की फांसी पर चार सप्ताह की रोक लगने की जानकारी दलवीर कौर को ‘अमर उजाला’ संवाददाता ने दी। खुशी की खबर सुनकर उसके मुंह से वाहेगुरु दी मेहर निकल पड़ा। बोलीं, अब ऊपर वाले के हाथ में है। वह चाहती है कि पति की जान बख्श दी जाए। पति ने अत्यंत जघन्य कृत्य किया है, लेकिन वह इसकी काफी सजा भोग चुका है। उसे अपने किए पर पछतावा भी है। ऐसे में उसे दया याचिका का लाभ मिलना चाहिए था।


दलवीर कौर (गुरमीत की पत्नी)



रास्ता है तो वीरा को बचाने का प्रयास करूंगी
यदि कोई रास्ता बाकी रह गया है तो वीरा (भाई) को बचाने का पूरा प्रयास करूंगी। बाकी रब के हाथ में है। भाई से मिलने जा रही हूं। उसकी राय जानने के बाद ही कुछ किया जा सकेगी।
- मिंदर कौर (गुरमीत की बहन)



बंदे के हाथ में कुछ नहीं
ऊपर वाला ही सब कुछ तय करता है। बंदे के हाथ में कुछ नहीं है। ऊपर वाले को जो मंजूर होगा वहीं होगा। हम लोग सिर्फ प्रयास कर सकते हैं सो कर रहे हैं।
- जागीर सिंह (गुरमीत का बहनोई)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed