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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अफसरों ने डेरा डाला, नहीं पहुंची राहत सामग्री
Updated Thu, 30 Aug 2018 12:00 AM IST
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अफसरों ने डेरा डाला, नहीं पहुंची राहत सामग्री
बुधवार को सुबह बैराजों से 2.40 लाख क्यूसक पानी फिर रिलीज
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। उत्तराखंड और यूपी के बैराजों से बीते दिन रिलीज हुए 2.32 लाख क्यूसेेक पानी से जिलेे की अधिकांश नदियों में बुधवार को पांचवें दिन भी उफान जारी रहा। जलालाबाद से लेकर कलान मिर्जापुर तक गंगा, रामगंगा और तिलहर, खुदागंज से लेकर सदर तहसील के भावलखेड़ा एवं ददरौल ब्लॉक तक गर्रा रौद्र रूप ले रही है। बीते 24 घंटे के मुकाबले गंगा पांच सेमी और गर्रा 45 सेमी बढ़ चुकी है। रामगंगा में पानी कम हुआ है, लेकिन इसी के साथ परौर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में भूमि कटान तेज हो गया है। बुधवार सुबह को बैराजों से 2.40 लाख क्यूसेक पानी की निकासी को देखते डीएम के निर्देश पर एसडीएम समेत राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों में डेरा डाले हैं, लेकिन अधिकांश बाढ़ चौकियों पर अभी तक राहत-बचाव सामग्री नहीं पहुंची है।
दोआब के डेढ़ दर्जन गांवों पर पानी का तीन तरफ से हमला
जलालाबाद। खण्डहर क्षेत्र में पश्चिम से उत्तर तक हर तरफ रामगंगा और बहगुल का पानी नजर आ रहा है। आपदा से घिरे इन गांवों में तमाम दिक्कतों के बाद भी कोई अधिकारी वहां तक जाने की जहमत नहीं उठा रहा। सबसे बुरा हाल दोनों नदियों के बीच बसे करीब डेढ़ दर्जन उन गांवों का है, जहां पानी तीन तरफ से ठोकरें मार रहा है। चारों तरफ पानी होने से जानवरों के चारे का संकट पैदा हो गया है। बस्ती से बाहर बनाए गए भूसे के अधिकांश बोंगे (बुर्जी) तथा खेतों का हरा चारा पानी में डूब चुका है। जिन गांवों के मुहाने तक पानी का भराव हुआ, वहां कच्चे मकान धूप निकलने से ढह रहे हैं। चक चंद्रसेन गांव में छप्पर डालकर रह रहे करीब पांच दर्जन परिवारों की दीवारें गिर जाने से उनके छप्पर भी छिन गए। खंडहर इलाके में सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न हो जाने से मक्का, धान, शिवाला (मैंथा) तथा गन्ने की फसल नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
बीघापुर और आजादनगर को मिलीं नावें और राशन
बाढ़ से चौतरफा घिरे मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बीघापुर और आजादनगर गांवों मेें प्रशासन ने गेहूं, चावल और लइया-चना का वितरण कराया। इस बीच, एसडीएम चंद्र प्रकाश सरोज तहसीलदार इरफान उल्ला खां और तहसील कर्मियों के साथ नाव से दोनों गांवों का दौरा किया। एसडीएम ने आवागमन के लिए बीघापुर को तीन और आजादनगर का एक नाव मुहैया कराई। कलान के तहसीलदार रामऔतार वर्मा ने आजादनगर को एक सौ परिवारों के सिर छिपाने के लिए तिरपाल उपलब्ध कराए। इधर, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे की पुलिया से रामगंगा का पानी क्रास कर दक्षिणी इलाके में फैल रहा है। बाढ़ के साथ बारिश होने से क्षेत्र के ग्राम कुनियां, पहरुआ, हरिहरपुर, मौजमपुर, मईखुर्दकलां, मौजमपुर, अतरी निजामपुर, बीघापुर की मढ़ैया, जरीनपुर हरिजन बस्ती, अटा, देवनगर, रामनगर आदि गांव पानी से घिर गए हैं। जरीनपुर-मौजमपुर, जरीनपुर-पहरुआ, बहेरिया-चिकटिया, मिर्जापुर-गुलडिय़ा, चौंरा-भगवानपुर, जलालाबाद-ढाईघाट आदि मार्गों पर पानी आ जाने से दर्जनों गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है।
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परौर क्षेत्र के गांवों में बढ़ा रामगंगा का कटान
रामगंगा में पानी की तेज धारें परौर क्षेत्र के मोहनपुर, बिचपुरी पर पहले से निशाना साधे थीं, अब उनका रुख ग्राम साहनी और नरायननगर पश्चिमी की ओर मुड़ गया है। ग्राम वासी कटरी क्षेत्र में अपनी खेती की जमीन कटने से काफी परेशान हैं। अब परौर के लोगों के सामने भूमिहीन होने का खतरा मंडरा रहा है। रामगंगा का पानी इसी तरीके से बढ़ता रहा तो बृहस्पतिवार सुबह तक नदी का बहाव रामताल में मिलने की आशंका हैै। उधर कटान और बाढ़ के कारण गांव में मकान ढहने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रभावित गांवों के भारत सिंह, महेश सक्सेना, बंदू, सुखवीर प्रजापति, मुनीश्वर, नन्हें सिंह, रामकिशोर कश्यप, मुकेश आदि के मकान गिर जाने से उनके परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
जान-माल का नुकसान होने से बाढ़ पीड़ित दुखी
मिर्जापुर क्षेत्र में आई बाढ़ से जान माल को व्यापक क्षति से प्रभावित गांवों के लोग बेहद दुखी हैं। किसानों का चौतरफा नुकसान हो रहा है। बीते दिनों रामगंगा से उफनाए सहायक नाले में डूबकर कालिकागंज के छात्र रुचित तथा पापरि गांव के सलमान की मृत्यु हो चुकी है। इधर बुखार से पीड़ित होकर दवा लेने आए बाढ़ ग़्रस्त ग्राम मौजमपुर के संतोष कुमार की साइकिल सीएचसी जरीनपुर से चोरी हो गई। पहरूआ गांव के उदयवीर गुर्जर की भैंस रामगंगा के नाले में गिरकर मर गई। उदयवीर के अनुसार नाला गहरा होने के कारण भैंस निकल नहीं पाई।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अफसरों ने डेरा डाला, नहीं पहुंची राहत सामग्री
बुधवार को सुबह बैराजों से 2.40 लाख क्यूसक पानी फिर रिलीज
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। उत्तराखंड और यूपी के बैराजों से बीते दिन रिलीज हुए 2.32 लाख क्यूसेेक पानी से जिलेे की अधिकांश नदियों में बुधवार को पांचवें दिन भी उफान जारी रहा। जलालाबाद से लेकर कलान मिर्जापुर तक गंगा, रामगंगा और तिलहर, खुदागंज से लेकर सदर तहसील के भावलखेड़ा एवं ददरौल ब्लॉक तक गर्रा रौद्र रूप ले रही है। बीते 24 घंटे के मुकाबले गंगा पांच सेमी और गर्रा 45 सेमी बढ़ चुकी है। रामगंगा में पानी कम हुआ है, लेकिन इसी के साथ परौर क्षेत्र के तटवर्ती गांवों में भूमि कटान तेज हो गया है। बुधवार सुबह को बैराजों से 2.40 लाख क्यूसेक पानी की निकासी को देखते डीएम के निर्देश पर एसडीएम समेत राजस्व और सिंचाई विभाग के अधिकारी बाढ़ प्रभावित इलाकों में डेरा डाले हैं, लेकिन अधिकांश बाढ़ चौकियों पर अभी तक राहत-बचाव सामग्री नहीं पहुंची है।
दोआब के डेढ़ दर्जन गांवों पर पानी का तीन तरफ से हमला
जलालाबाद। खण्डहर क्षेत्र में पश्चिम से उत्तर तक हर तरफ रामगंगा और बहगुल का पानी नजर आ रहा है। आपदा से घिरे इन गांवों में तमाम दिक्कतों के बाद भी कोई अधिकारी वहां तक जाने की जहमत नहीं उठा रहा। सबसे बुरा हाल दोनों नदियों के बीच बसे करीब डेढ़ दर्जन उन गांवों का है, जहां पानी तीन तरफ से ठोकरें मार रहा है। चारों तरफ पानी होने से जानवरों के चारे का संकट पैदा हो गया है। बस्ती से बाहर बनाए गए भूसे के अधिकांश बोंगे (बुर्जी) तथा खेतों का हरा चारा पानी में डूब चुका है। जिन गांवों के मुहाने तक पानी का भराव हुआ, वहां कच्चे मकान धूप निकलने से ढह रहे हैं। चक चंद्रसेन गांव में छप्पर डालकर रह रहे करीब पांच दर्जन परिवारों की दीवारें गिर जाने से उनके छप्पर भी छिन गए। खंडहर इलाके में सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन जलमग्न हो जाने से मक्का, धान, शिवाला (मैंथा) तथा गन्ने की फसल नष्ट होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
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बीघापुर और आजादनगर को मिलीं नावें और राशन
बाढ़ से चौतरफा घिरे मिर्जापुर क्षेत्र के गांव बीघापुर और आजादनगर गांवों मेें प्रशासन ने गेहूं, चावल और लइया-चना का वितरण कराया। इस बीच, एसडीएम चंद्र प्रकाश सरोज तहसीलदार इरफान उल्ला खां और तहसील कर्मियों के साथ नाव से दोनों गांवों का दौरा किया। एसडीएम ने आवागमन के लिए बीघापुर को तीन और आजादनगर का एक नाव मुहैया कराई। कलान के तहसीलदार रामऔतार वर्मा ने आजादनगर को एक सौ परिवारों के सिर छिपाने के लिए तिरपाल उपलब्ध कराए। इधर, मुरादाबाद-फर्रुखाबाद स्टेट हाईवे की पुलिया से रामगंगा का पानी क्रास कर दक्षिणी इलाके में फैल रहा है। बाढ़ के साथ बारिश होने से क्षेत्र के ग्राम कुनियां, पहरुआ, हरिहरपुर, मौजमपुर, मईखुर्दकलां, मौजमपुर, अतरी निजामपुर, बीघापुर की मढ़ैया, जरीनपुर हरिजन बस्ती, अटा, देवनगर, रामनगर आदि गांव पानी से घिर गए हैं। जरीनपुर-मौजमपुर, जरीनपुर-पहरुआ, बहेरिया-चिकटिया, मिर्जापुर-गुलडिय़ा, चौंरा-भगवानपुर, जलालाबाद-ढाईघाट आदि मार्गों पर पानी आ जाने से दर्जनों गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है।
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परौर क्षेत्र के गांवों में बढ़ा रामगंगा का कटान
रामगंगा में पानी की तेज धारें परौर क्षेत्र के मोहनपुर, बिचपुरी पर पहले से निशाना साधे थीं, अब उनका रुख ग्राम साहनी और नरायननगर पश्चिमी की ओर मुड़ गया है। ग्राम वासी कटरी क्षेत्र में अपनी खेती की जमीन कटने से काफी परेशान हैं। अब परौर के लोगों के सामने भूमिहीन होने का खतरा मंडरा रहा है। रामगंगा का पानी इसी तरीके से बढ़ता रहा तो बृहस्पतिवार सुबह तक नदी का बहाव रामताल में मिलने की आशंका हैै। उधर कटान और बाढ़ के कारण गांव में मकान ढहने का सिलसिला शुरू हो गया है। प्रभावित गांवों के भारत सिंह, महेश सक्सेना, बंदू, सुखवीर प्रजापति, मुनीश्वर, नन्हें सिंह, रामकिशोर कश्यप, मुकेश आदि के मकान गिर जाने से उनके परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए हैं।
जान-माल का नुकसान होने से बाढ़ पीड़ित दुखी
मिर्जापुर क्षेत्र में आई बाढ़ से जान माल को व्यापक क्षति से प्रभावित गांवों के लोग बेहद दुखी हैं। किसानों का चौतरफा नुकसान हो रहा है। बीते दिनों रामगंगा से उफनाए सहायक नाले में डूबकर कालिकागंज के छात्र रुचित तथा पापरि गांव के सलमान की मृत्यु हो चुकी है। इधर बुखार से पीड़ित होकर दवा लेने आए बाढ़ ग़्रस्त ग्राम मौजमपुर के संतोष कुमार की साइकिल सीएचसी जरीनपुर से चोरी हो गई। पहरूआ गांव के उदयवीर गुर्जर की भैंस रामगंगा के नाले में गिरकर मर गई। उदयवीर के अनुसार नाला गहरा होने के कारण भैंस निकल नहीं पाई।