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रामगंगा के तटवर्ती गांवों में नहीं थमा कटान का कहर, गंगा स्थिर
Updated Thu, 23 Aug 2018 12:26 AM IST
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रामगंगा के तटवर्ती गांवों में कटान का कहर
क्षति आकलन के प्रति राजस्व विभाग उदासीन
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। नरौरा समेत उत्तराखंड और यूपी के बैराजों से रिलीज पानी की मात्रा लगातार चार दिन से घटने के कारण कटरी क्षेत्र की गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों में उफान कम हो गया है लेकिन तटवर्ती गावों में कृषि भूमि के कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कलान तहसील के भैंसार बांध पर गंगा पांच सेमी की मामूली कमी के साथ 142.85 मीटर पर स्थिर है। तिलहर के खुदागंज से लेकर सदर तहसील के ददरौल, भावलखेड़ा विकास खंडों के कई गांवों में गर्रा की बाढ़ से तमाम किसानों की फसलें डूबी हैं या फिर तबाह हो चुकी हैं। हालांकि, गर्रा 35 सेमी घटकर 145.50 मीटर पर आ गई है, लेकिन कटान नहीं थमा है।
भुंडी घाट से जुड़े दो दर्जन गांवों को सिर्फ नाव का सहारा
गर्रा नदी में आई बाढ़ के वेग से पांच दिन पहले भुंडी घाट से पैंटून पुल बह गया था। पुल के पैंटून करीब आठ किमी आगे कुचई घाट के पक्के पुल से टकराकर वहीं ठहर गए, लेकिन नदी में पानी का वेग अभी तक बढ़ा होने से पानी में बहे पैंटून दोबारा यथा स्थान नहीं लगाए जा सके। भुंडी घाट से खुदागंज आने-जाने वाले करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए सिर्फ एक निजी नाव का सहारा बचा है क्योंकि तहसील प्रशासन ने वहां मोटर बोट अथवा सरकारी नाव की व्यवस्था कराने की जरूरत नहीं समझी। हालांकि, बीते 48 घंटेे के मुकाबले गर्रा 1.25 मीटर घट गई, लेकिन नदी का जल स्तर 145.50 मीटर बना है जो कि सामान्य से अधिक है। प्रभावित गांवों के लोगों को गर्रा में पानी अधिक होने के कारण नाव में क्षमता से अधिक सवारियां बैठने पर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
परौर क्षेत्र में रामगंगा से हो रहा दोनों तरफ भूमि कटान
परौर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी मदद का बनाई गईं चौकियों से उन्हें कोई तात्कालिक सहायता नहीं मिल रही है। एक तरफ रामगंगा परौर को निशाना बनाए हुए लगातार कटान कर रही है। जिस जमीन को काटकर रामगंगा परौर की तरफ बढ़ रही है, उसकी वर्तमान कीमत दो लाख रुपये बीघा है। इसी जमीन के सहारे ग्रामवासियों का पालन पोषण होता है। ग्रामीण आस लगाए थे कि रामगंगा इस पार की जमीन काट देगी तो खेती के लिए कटरी की जमीन बची रहेगी, लेकिन परौर के मजरा साहनी के पास रामगंगा कटरी की जमीन काटती हुई शमसीपुर की तरफ जा रही है। कटान के साथ मकान गिरने का क्रम जारी हो गया है। ग्राम कुंडरिया निवासी खेमकरन व अवधेश का मकान बरसात में गिर जाने से दोनों परिवार खुले आसमान के नीचे आ गये हैं। परौर निवासी सतीश शर्मा, नत्थू लाल, मजरा बिचपुरी निवासी पहलवान उर्फ संतराम, रामसरन कुशवाहा, निसार खां, मोहनपुर के मुकेश कुमार कश्यप के मकान गिर गए हैं।
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रामगंगा के तटवर्ती गांवों में कटान का कहर
क्षति आकलन के प्रति राजस्व विभाग उदासीन
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। नरौरा समेत उत्तराखंड और यूपी के बैराजों से रिलीज पानी की मात्रा लगातार चार दिन से घटने के कारण कटरी क्षेत्र की गंगा, रामगंगा, बहगुल आदि नदियों में उफान कम हो गया है लेकिन तटवर्ती गावों में कृषि भूमि के कटान का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कलान तहसील के भैंसार बांध पर गंगा पांच सेमी की मामूली कमी के साथ 142.85 मीटर पर स्थिर है। तिलहर के खुदागंज से लेकर सदर तहसील के ददरौल, भावलखेड़ा विकास खंडों के कई गांवों में गर्रा की बाढ़ से तमाम किसानों की फसलें डूबी हैं या फिर तबाह हो चुकी हैं। हालांकि, गर्रा 35 सेमी घटकर 145.50 मीटर पर आ गई है, लेकिन कटान नहीं थमा है।
भुंडी घाट से जुड़े दो दर्जन गांवों को सिर्फ नाव का सहारा
गर्रा नदी में आई बाढ़ के वेग से पांच दिन पहले भुंडी घाट से पैंटून पुल बह गया था। पुल के पैंटून करीब आठ किमी आगे कुचई घाट के पक्के पुल से टकराकर वहीं ठहर गए, लेकिन नदी में पानी का वेग अभी तक बढ़ा होने से पानी में बहे पैंटून दोबारा यथा स्थान नहीं लगाए जा सके। भुंडी घाट से खुदागंज आने-जाने वाले करीब दो दर्जन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए सिर्फ एक निजी नाव का सहारा बचा है क्योंकि तहसील प्रशासन ने वहां मोटर बोट अथवा सरकारी नाव की व्यवस्था कराने की जरूरत नहीं समझी। हालांकि, बीते 48 घंटेे के मुकाबले गर्रा 1.25 मीटर घट गई, लेकिन नदी का जल स्तर 145.50 मीटर बना है जो कि सामान्य से अधिक है। प्रभावित गांवों के लोगों को गर्रा में पानी अधिक होने के कारण नाव में क्षमता से अधिक सवारियां बैठने पर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
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परौर क्षेत्र में रामगंगा से हो रहा दोनों तरफ भूमि कटान
परौर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन उनकी मदद का बनाई गईं चौकियों से उन्हें कोई तात्कालिक सहायता नहीं मिल रही है। एक तरफ रामगंगा परौर को निशाना बनाए हुए लगातार कटान कर रही है। जिस जमीन को काटकर रामगंगा परौर की तरफ बढ़ रही है, उसकी वर्तमान कीमत दो लाख रुपये बीघा है। इसी जमीन के सहारे ग्रामवासियों का पालन पोषण होता है। ग्रामीण आस लगाए थे कि रामगंगा इस पार की जमीन काट देगी तो खेती के लिए कटरी की जमीन बची रहेगी, लेकिन परौर के मजरा साहनी के पास रामगंगा कटरी की जमीन काटती हुई शमसीपुर की तरफ जा रही है। कटान के साथ मकान गिरने का क्रम जारी हो गया है। ग्राम कुंडरिया निवासी खेमकरन व अवधेश का मकान बरसात में गिर जाने से दोनों परिवार खुले आसमान के नीचे आ गये हैं। परौर निवासी सतीश शर्मा, नत्थू लाल, मजरा बिचपुरी निवासी पहलवान उर्फ संतराम, रामसरन कुशवाहा, निसार खां, मोहनपुर के मुकेश कुमार कश्यप के मकान गिर गए हैं।
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