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खनन पट्टे जारी हुए बगैर छलनी हो रहा नदियों का सीना

Tue, 23 Jan 2018 10:01 AM IST
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:01 AM IST
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खनन पट्टे जारी हुए बगैर छलनी हो रहा नदियों का सीना
खनन पट्टे जारी हुए बगैर छलनी हो रहा नदियों का सीना
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फोटो-22 पीडब्लूएनपी 36
खुटार क्षेत्र में मिट्टी खनन करते श्रमिक
फोटो पीडब्ल्यूएनपी 37
पुवायां में जेसीबी से खोदी जा रही मिट्टी
फोटो 38
खनन संबंधी खबर की पीडीएफ
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विभिन्न तहसीलों में कई ठिकानों पर हो रहा अवैध खनन
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। उच्च न्यायालय द्वारा जिलाधिकारी को जनपद में नदियों से रेता-बालू के अवैध खनन को रोकने का आदेश कोई अचरज की बात नहीं है। जिले की विभिन्न तहसीलों में कई ठिकानों पर प्रशासन से खनन पट्टे जारी हुए बगैर नदियों का सीना छलनी किया जा रहा है। खास बात यह है कि खनन पर कागजी रोक के बावजूद भवन निर्माण के बाजार में रेता-बालू थोड़ी महंगी जरूर है, लेकिन अनुपलब्ध नहीं। इससे जाहिर है कि कहीं न कहीं खनन के स्रोत आसपास ही हैं और उन पर कड़ाई से अंकुश लगाने की जरूरत है।
गंगा-रामगंगा कई नदियों की सौगात समेटे जिले में खनन माफिया बीते कई वर्ष से पुलिस और अन्य प्रशासन की मिलीभगत से सरकारी तंत्र पर हावी रहे हैं। इसका सुबूत यह है कि प्रशासन गिने-चुने स्थानों के लिए खनन के ठेके जारी करता है और उनकी आड़ में दर्जनों स्थानों पर बेखौफ खनन शुरू हो जाता है। गत वर्ष सदर समेत कई तहसीलों में नदियों से रेता-बालू खनन के बमुश्किल एक दर्जन ठेके जारी हुए, लेकिन रेता-बालू निकालने के ठिकाने कई गुना अधिक विकसित हो गए।
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सदर तहसील में पिछले साल करीब आधा दर्जन पट्टे जारी हुए, लेकिन इन ठिकानों पर खनन पहले से जारी रहा। इनमें ककरा काकर कुंड गर्रा घाट भी शामिल है। यहां से रोजाना आधी रात के बाद रेता से भरी टैक्टर-ट्रालियों की निकासी आम बात है। शहर के मुख्य मार्गों पर रेता से भरी ट्रालियां-बुग्गियां कई नाकों से गुजर जाती हैं, लेकिन ट्रैफिक पुलिस और मोबाइल पुलिस टीमों को दिखाई नहीं देतीं। गर्रा के पुराने पुल, अजीजगंज डाम आदि कई जगहों पर नदियों की तलहटी में ट्रैक्टर-ट्रालियों के निशान खनन की गवाही देते हैं।
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बहगुल को गहरा करने वाला रैकेट सक्रिय
जलालाबाद तहसील के कोला गांव में रामगंगा व बहगुल नदी से और इसी तहसील में चितरऊ बहगुल घाट पर खनन सीमित है, लेकिन तिलहर तहसील मेें करीब एक दज्रन ठिकाने बन गए हैं। गर्रा के किनारे घुसगवां समेत बिरसिंगापुर, चक बरैंचा और सफौरा और निगोही क्षेत्र में कठिना नदी के किनारे बसे कुकहा महमूदपुर, ऊन कलां, विक्रमपुर चकौरा और इटौआ में बड़े पैमाने पर नदियों में घाव किए जा रहे हैं। घुसगवां से रेता लेने वालों को कथित ठेकेदार रसीद भी नहीं देता, जबकि खनन का पट्टा अपने नाम बताता है। गत वर्ष अफसरों की सख्ती के बाद खुदागंज क्षेत्र में कुचई घाट पर खनन थम गया, लेकिन जैतीपुर में बहगुल को गहरा करने वाला रैकेट सक्रिय है।
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पुवायां तहसील में दिन-रात हो मिट्टी और रेता की खुदाई
पुवायां तहसील खनन माफिया का गढ़ बन गई है। पुवायां समेत खुटार, सिंधौली और बंडा ब्लाक में तमाम शिकायतों के बावजूद दिन रात मिट्टी और रेत खनन होने के बावजूद अधिकारी खामोश हैं। कार्रवाई के नाम पर कभी-कभार एकाध ट्राली पकड़ ली जाती है। गोमती में पानी की कमी का लाभ उठाकर रेता निकालने का काम जोरों पर है। दिन में नदी से रेता खुदाई कर नदी के किनारे एकत्र करने का काम होता है और रात के अंधेरे में ट्रालियों से रेता भरकर जरूरतमंदों के घर पहुंचाई जा रही है।
खुटार, पुवायां, बंडा में गोमती, झुकना से रेत खनन होता है जब कि सिंधौली में खन्नौत खनन का साधन बन गई है। पुवायां में पन्नघाट, मस्तानशाह घाट, गदाईसांडा, चकलुआ घाट, खुटार पुवायां मार्ग पर गोमती पुल के पास, धियरी घाट, खुटार में गांव पकडिय़ा हकीम के पास गोमती तट, गांव मैनिया, गांव टाह खुर्द कलां के पास, बंडा मार्ग पर झुकना, गोमती के सुनासिर घाट, मंसाराम घाट, मझरिया घाट और सिंधौली में शारदा नहर आदि से रेत खनन हो रहा है।
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खोदी जा रही सरकारी भूमि, रास्ता हुआ बंद
खुटार के गांव चमराबोझी में जेसीबी से सरकारी भूमि से अवैध खनन वर्षों से किया जा रहा है। कई खनन माफिया मिट्टी और रेत बेचकर अपनी किस्मत चमका चुके हैं। चारागाह की भूमि पर काफी समय से खनन की तमाम बार शिकायत भी की गई, लेकिन कार्रवाई तो दूर अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच करने तक की जरूरत नहीं समझी है। उधर, गांव बेला मदारपुर जाने वाले रास्ते पर भैंसी नदी पुल के पास अवैध रूप से रेत खनन से गड्ढेदार रास्ता चलने लायक नहीं बचा।

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वर्तमान में खनन का कोई पट्टा जिले में प्रभावी नहीं है, क्योंकि पूर्व में स्वीकृत किए गए खनन ठेकों की समयवधि बीत चुकी है। नगर क्षेत्र में गर्रा के किनारे ककरा काकर कुंड का एकमात्र खनन पट्टा विराट कांस्ट्रक्शन्स को जारी होना है, लेकिन वह अभी स्वीकृत होने की प्रक्रिया में है।
-सर्वेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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