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कैकयी ने दशरथ से मांगे अपने दो बरदान
Updated Tue, 13 Jun 2017 06:51 PM IST
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खेड़ा बझेड़ा (शाहजहांपुर)। क्षेत्र के गांव बरुआझाला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार को पंडित संजय कुमार ने श्रीराम वनगमन का प्रसंग सुनाया। कहा, श्रीराम के राज्याभिषेक की घोषणा के बाद कैकेयी ने राजा दशरथ से दो वरदान मांग कर उन्हें धर्म संकट में डाल दिया, लेकिन प्रभु श्रीराम ने पिता के दिए वचन पर अमल करते हुए वन गमन किया।
आचार्य ने कहा कि देवासुर संग्राम में कैकेयी राजा दशरथ की सारथी थीं। तब उन्होंने दशरथ की प्राणरक्षा की थी। उस समय प्रसन्न होकर दशरथ ने कैकेयी से दो वरदान मांगने को कहा था लेकिन कैकयी ने समय आने पर वरदान मांगने की बात कह दी। जब राम के राज्याभिषेक का समय आया तो मंथरा के उकसाने पर कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राज्य और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया। कथा प्रसंग सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष मोहन पांडेय, नन्हे शर्मा, हरिओम मिश्र, शिवम मिश्र, मुन्नेदर शर्मा, शिवपाल, रामबहादुर आदि मौजूद रहे।
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आचार्य ने कहा कि देवासुर संग्राम में कैकेयी राजा दशरथ की सारथी थीं। तब उन्होंने दशरथ की प्राणरक्षा की थी। उस समय प्रसन्न होकर दशरथ ने कैकेयी से दो वरदान मांगने को कहा था लेकिन कैकयी ने समय आने पर वरदान मांगने की बात कह दी। जब राम के राज्याभिषेक का समय आया तो मंथरा के उकसाने पर कैकेयी ने अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राज्य और राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया। कथा प्रसंग सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए। इस मौके पर कमेटी अध्यक्ष मोहन पांडेय, नन्हे शर्मा, हरिओम मिश्र, शिवम मिश्र, मुन्नेदर शर्मा, शिवपाल, रामबहादुर आदि मौजूद रहे।
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