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रिकार्ड तोड़ बारिश से खरीफ फसलें चौपट, सब्जियों की घटी आवक

Fri, 31 Aug 2018 12:01 AM IST
Updated Fri, 31 Aug 2018 12:01 AM IST
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रिकार्ड तोड़ बारिश से खरीफ फसलें चौपट, सब्जियों की घटी आवक
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रिकार्ड तोड़ बारिश से खरीफ फसलें चौपट, सब्जियों की घटी आवक
धान और गन्ना छोड़कर मूंगफली, उड़द और तिल को भारी नुकसान
फोटो 06 में।
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर। जिले में बाढ़ और बारिश से खरीफ सीजन में धान और गन्ने को छोड़कर अन्य फसलें चौपट होने लगी हैं। मानसून की लेटलतीफी के चलते खरीफ सीजन में बुआई लक्ष्य 2.43 लाख हेक्टेयर के सापेक्ष काफी कम रकबा में फसलें बोई जा सकीं, लेकिन उन्हें भी अब प्राकृतिक आपदा का ग्रहण लगने लगा है। धान के विकल्प के तौर पर जलालाबाद, कलान की कटरी में बोई गईं मूंगफली, उड़द, तिल आदि फसलें खेतों में बाढ़ का पानी भर जाने से नष्ट हो गईं। तिलहर, सदर तहसील के विभिन्न ब्लॉकों में भी व्यापक फसली क्षति होने का अनुमान है। जल प्लावित खेतों में लतावर्गीय सब्जियां भी नष्ट हो रही हैं और इस वजह से बाजारों में भिंडी, तोरई, करेला, खीरा, परवल, टमाटर, अरबी, बैंगन आदि सीजनल सब्जियों की आवक को ब्रेक लग गया है।
खरीफ सीजन 2018-19 में 2.43 लाख हेक्टेयर में विभिन्न फसलों की बुआई लक्ष्य तय किया गया था। इनमें धान की विभिन्न किस्मों के लिए 207332 हेक्टेयर, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि शस्य फसलों के लिए 6848 हेक्टेयर, दलहन के लिए 370 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों के लिए 13244 हेक्टेयर रकबा सुरक्षित किया गया, लेकिन मानसून की लेटलतीफी से जून माह में अपर्याप्त बारिश होने पर धान से बमुश्किल 73 हजार हेक्टेयर रकबा आच्छादित हो सका। कृषि वैज्ञानिकों के सुझाव पर किसानों ने धान के विकल्प तौर पर करीब 25 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि की बुवाई की गई, लेकिन बारिश की अधिकता से इन्हीं फसलों को व्यापक क्षति पहुंची है।
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बाजारों में ड्यौढ़े दामों पर बिक रहीं सीजनल सब्जियां
लगातार बारिश से खेतों में जलभराव की समस्या पैदा होने पर लगभग 20 हजार हेक्टेयर में बोई गईं सब्जियां भी खराब होने लगी हैं। जमीन पर फैलने वाली लौकी, तोरई, कद्दू, करेला, परवल, खीरा आदि लतावर्गीय सब्जियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। हालांकि, तमाम किसानों ने खेतों में बांस-बल्लियों पर तार लगाकर लताओं को उनके ऊपर डाला, जिससे कि यह सब्जियां सीधे जमीन के संपर्क में नहीं आएं, लेकिन लगातार बारिश से खेतों की गीली मिट्टी में बांस-बल्लियां लताओं समेत धराशायी हो गईं। नतीजा यह हुआ कि गत सप्ताह तक 20 रुपये केे भाव बिकने वाली यह सभी सब्जियां 30 रुपये किलो के रेट पर पहुंच गई हैं। यही नहीं, आवक घटने और मांग बरकरार रहने से सब्जी मंडियों में अरबी, भिंडी, बैंगन, टिंडा, टमाटर भी महंगे हो गए हैं।
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खरीफ फसलों का बुवाई क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
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फसल क्षेत्रफल
0 सामान्य धान 45873
0 सुगंधित/बासमती धान 22458
0 संकर धान 5476
0 मक्का 3391
0 ज्वार 1127
0 बाजरा 2333
0 उड़द 8467
0 मूंग 39
0 अरहर 371
0 मूंगफली 4206
0 तिल 5476
0 सोयाबीन 25
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एक दशक में अगस्त माह में हुई बारिश (मिमी में)
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वर्ष बारिश
2008 476.5
2009 343.4
2010 223.2
2011 706.6
2012 479.0
2013 274.0
2014 426.0
2015 259.6
2016 168.8
2017 246.4
2018 325.0
0000000000000000000000000000000000000000000फोटो 07 में।
फसली नुकसान का आकलन करने को सर्वे टीमें सक्रिय
बारिश से फसलों को हुई क्षति का आकलन करने के लिए विभाग स्तर पर चार टीमें गठित कर सर्वेक्षण कराया जा रहा है। सर्वे कार्य की मॉनीटरिंग मैं कर रहा हूं। जलालाबाद और कलान तहसील में फसली सर्वे पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि वहां के बाढ़ प्रभावित कुछ गांवों के किसानों से दस-12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में मूंगफली खराब होने की सूचना मिली है। धान और गन्ना की फसल के लिए बारिश लाभकारी साबित हो रही है।
-डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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