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सरकारी कॉलेज में पढ़ा रहे प्राइवेट टीचर
Updated Wed, 06 Sep 2017 06:19 PM IST
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कलान (शाहजहांपुर)। सूबे में बेेहतर शिक्षा का सरकार भले ही दावा करे, लेकिन हकीकत यह है कि अधिकांश सरकारी कालेजों में स्थिति बदहाल है। कहीं शिक्षक नहीं तो कहीं पर संसाधनों का अभाव है। नगर में स्थित राजकीय इंटर कालेज की स्थिति और भी बदतर है। यहां बच्चों से सालाना 300 रुपये लेकर कॉलेज में प्राइवेट टीचरों को लगाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। हैरत कि बात तो यह है कि विज्ञान की प्रयोगशाला का अर्से से ताला नहीं खोला गया। इस कारण यहां रखे उपकरण और केमिकल पर गंदगी की पर्ते जमी हैं।
कटरी क्षेत्र में वर्ष 1985 में लाखों रुपये की लागत से राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना कराई गई थी। बताते हैं शुरू में सब कुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन जो स्टाफ के सेवानिवृत्त अथवा स्थानांतरण पर यहां से जो गया उसके स्थान पर नई नियुक्ति नहीं हुई। आज आलम यह है कि कालेज में प्रवक्ता के नौ पदों में सभी खाली हैं वहीं एलटी के 12 पदों में मात्र चार पद पर तैनाती है शेष पद खाली पड़े हैं। कार्यालय स्टाफ भी मानक से काफी कम है। स्टाफ की कमी और पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 700 पर पहुंचने के कारण कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य ने शिक्षक अभिभावक संघ की बैठक में चर्चा की और आम सहमति से प्रति छात्र 300 रुपये वार्षिक का शुल्क लेकर नौ प्राइवेट टीचर रख लिए हैं यही टीचर बच्चों को पढ़ा रहे। कॉलेज के विद्यार्थियों की माने तो विज्ञान की प्रयोगशालाएं अर्से से नहीं खुली इस कारण वह लोग प्रैक्टीकल भी नहीं कर पाते।
प्रयोगशाला में कूड़ा और जाला
विज्ञान के प्रवक्ता न होने के कारण भौतिक और रसायन की प्रयोगशाला काफी समय से बंद है। ऐसे में प्रयोगशाला में रखे एसिड और उपकरण तो बर्वाद हो ही रहे है वहीं लैब में कूड़ा कचरा भर गया है। प्रैक्टीकल न कर पाने के कारण छात्र परीक्षा में भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते।
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चोरी गए कंप्यूटर का भी नहीं लगा सुराग
दो माह पहले कंप्यूटर लैब से आठ कंप्यूटर चोरी हो गए थे लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी आज तक उनका सुराग नहीं लगा। ऐसे में जो कंप्यूटर रह गए हैं छात्र उसी से काम चला रहे हैं।
जनरेटर है पर डीजल के लिए बजट नहीं
कॉलेज के कमरों में पंखे लगे हैं जनरेटर भी है, लेकिन डीजल के लिए बजट न होने के बिजली न आने पर गर्मी में बैठना पड़ता है। 700 विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर भी कम पड़ता है।
बोले जिम्मेदार
अभी दो माह पहले चार्ज मिला है अपने प्रयास से कुछ काम कराया है लेकिन फंड न होने के कारण दिक्कत आ रही हैं। सीमित संसाधनों से बेहतर व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा हूं।
-रामशरन मौर्या, प्रभारी प्रधानाचार्य
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कटरी क्षेत्र में वर्ष 1985 में लाखों रुपये की लागत से राजकीय इंटर कॉलेज की स्थापना कराई गई थी। बताते हैं शुरू में सब कुछ ठीक ठाक रहा, लेकिन जो स्टाफ के सेवानिवृत्त अथवा स्थानांतरण पर यहां से जो गया उसके स्थान पर नई नियुक्ति नहीं हुई। आज आलम यह है कि कालेज में प्रवक्ता के नौ पदों में सभी खाली हैं वहीं एलटी के 12 पदों में मात्र चार पद पर तैनाती है शेष पद खाली पड़े हैं। कार्यालय स्टाफ भी मानक से काफी कम है। स्टाफ की कमी और पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब 700 पर पहुंचने के कारण कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य ने शिक्षक अभिभावक संघ की बैठक में चर्चा की और आम सहमति से प्रति छात्र 300 रुपये वार्षिक का शुल्क लेकर नौ प्राइवेट टीचर रख लिए हैं यही टीचर बच्चों को पढ़ा रहे। कॉलेज के विद्यार्थियों की माने तो विज्ञान की प्रयोगशालाएं अर्से से नहीं खुली इस कारण वह लोग प्रैक्टीकल भी नहीं कर पाते।
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प्रयोगशाला में कूड़ा और जाला
विज्ञान के प्रवक्ता न होने के कारण भौतिक और रसायन की प्रयोगशाला काफी समय से बंद है। ऐसे में प्रयोगशाला में रखे एसिड और उपकरण तो बर्वाद हो ही रहे है वहीं लैब में कूड़ा कचरा भर गया है। प्रैक्टीकल न कर पाने के कारण छात्र परीक्षा में भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते।
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चोरी गए कंप्यूटर का भी नहीं लगा सुराग
दो माह पहले कंप्यूटर लैब से आठ कंप्यूटर चोरी हो गए थे लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी आज तक उनका सुराग नहीं लगा। ऐसे में जो कंप्यूटर रह गए हैं छात्र उसी से काम चला रहे हैं।
जनरेटर है पर डीजल के लिए बजट नहीं
कॉलेज के कमरों में पंखे लगे हैं जनरेटर भी है, लेकिन डीजल के लिए बजट न होने के बिजली न आने पर गर्मी में बैठना पड़ता है। 700 विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर भी कम पड़ता है।
बोले जिम्मेदार
अभी दो माह पहले चार्ज मिला है अपने प्रयास से कुछ काम कराया है लेकिन फंड न होने के कारण दिक्कत आ रही हैं। सीमित संसाधनों से बेहतर व्यवस्था करने का प्रयास कर रहा हूं।
-रामशरन मौर्या, प्रभारी प्रधानाचार्य