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उर्वरक विक्रेताओं का सिरदर्द बनी पीओएस मशीन
Updated Mon, 19 Jun 2017 05:43 PM IST
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शाहजहांपुर। उर्वरक खरीदने वाले किसानों से अधिक मूल्य लिए जाने की शिकायतों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा फुटकर उर्वरक प्रतिष्ठानों पर अनिवार्य की गई प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन विक्रेताओं के लिए सिरदर्द बन गई है। पीओएस मशीन के साथ कोई गारंटी-वारंटी नहीं दी जा रही और न ही उसका अभी तक सर्विस सेंटर खुला है। यही नहीं, मशीन खराब होने पर उन्हेें बिक्री भी रोकनी पड़ेगी। इन्हीं खामियों के चलते खाद व्यापारी पीओएस मशीन लेने से कतरा रहे हैं।
बिक्री में आएगी पारदर्शिता, लाभान्वित होंगे किसान
पीओएस मशीन लगने से न केवल फर्टिलाइजर बिक्री सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, उर्वरकों की कालाबाजारी और किसानों से अधिक मूल्य लेने की शिकायतें थमेंगी। अभी तक निर्माता कंपनी के स्तर से रेट बढ़ने की संभावना पैदा होते ही विक्रेता खाद का स्टॉक डंप कर उसकी बिक्री रोक देते थे। अब ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि कृषि विभाग के सर्वर से कनेक्ट मशीनों पर दर्ज बिक्री, स्टॉक आदि डेटा विभागीय अधिकारी अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर दफ्तर में बैठकर चेक कर सकेंगे।
कंपनियों के स्तर से सब्सिडी का थमेगा दुरुपयोग
खास यह है कि पीओएस मशीनें लगने के बाद भी किसानों को दुकान पर अनुदानित दरों पर ही उर्वरक मिलेगा, लेकिन कंपनियों को केवल उर्वरकों की उतनी मात्रा पर सब्सिडी रिलीज होगी, जो किसानों में वितरित की गई है। इससे पहले, उर्वरक निर्माता कंपनियां किसी जिले को रेलवे रैक जारी करते ही उस पर देय सब्सिडी प्राप्त कर लेती थीं।
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विक्रेताओं के सवालों से उदासीन हैं अधिकारी
अधिकारी मशीन के कई लाभ गिनाते हैं, लेकिन उससे जुड़े विक्रेताओं के सवालों का उनके पास कोई समाधान परक उत्तर नहीं है। शाहजहांपुर फर्टिलाइजर्स, सीड्स एंड पेस्टीसाइड्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता कहते हैं, मशीन से एक ट्रांजक्शन में करीब दस मिनट का समय लगेगा और ग्राहक अधिक होेने पर समस्या खड़ी होगी। मशीन खराब होने पर स्टॉक में खाद होने पार किसान को देना कठिन होेगा। तमाम मशीनें लो कनेक्टिविटी की वजह से नहीं चल रहीं, लेकिन पीओएस निर्माता गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स कारपोेरेशन ने यहां सर्विस सेेंटर खोलने की जरूरत नहीं समझी।
सिस्टम सुधरने में लग सकता है थोड़ा वक्त
कोई भी नई व्यवस्था लागू होने पर शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आती हैं और यही पीओएस मशीनों के साथ हो रहा है। देश के अन्य कई राज्यों में यह मशीनें एक साथ चालू होने से सर्वर पर लोड बढ़ने से कनेक्टिविटी की दिक्कतें आ रही हैं, जिन्हें ठीक होने में थोड़ा वक्त लगेगा। जिले में सात सौ रिटेलर्स को मशीनें दी जानी हैं। पहले चरण में कंपनी ने विभिन्न ब्लॉकों के 314 फुटकर विक्रेेताओं को मशीनें उपलब्ध करा दी हैं।
-डीएस चौधरी, जिला कृषि अधिकारी
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बिक्री में आएगी पारदर्शिता, लाभान्वित होंगे किसान
पीओएस मशीन लगने से न केवल फर्टिलाइजर बिक्री सिस्टम में पारदर्शिता आएगी, उर्वरकों की कालाबाजारी और किसानों से अधिक मूल्य लेने की शिकायतें थमेंगी। अभी तक निर्माता कंपनी के स्तर से रेट बढ़ने की संभावना पैदा होते ही विक्रेता खाद का स्टॉक डंप कर उसकी बिक्री रोक देते थे। अब ऐसा संभव नहीं होगा क्योंकि कृषि विभाग के सर्वर से कनेक्ट मशीनों पर दर्ज बिक्री, स्टॉक आदि डेटा विभागीय अधिकारी अपने कंप्यूटर स्क्रीन पर दफ्तर में बैठकर चेक कर सकेंगे।
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कंपनियों के स्तर से सब्सिडी का थमेगा दुरुपयोग
खास यह है कि पीओएस मशीनें लगने के बाद भी किसानों को दुकान पर अनुदानित दरों पर ही उर्वरक मिलेगा, लेकिन कंपनियों को केवल उर्वरकों की उतनी मात्रा पर सब्सिडी रिलीज होगी, जो किसानों में वितरित की गई है। इससे पहले, उर्वरक निर्माता कंपनियां किसी जिले को रेलवे रैक जारी करते ही उस पर देय सब्सिडी प्राप्त कर लेती थीं।
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विक्रेताओं के सवालों से उदासीन हैं अधिकारी
अधिकारी मशीन के कई लाभ गिनाते हैं, लेकिन उससे जुड़े विक्रेताओं के सवालों का उनके पास कोई समाधान परक उत्तर नहीं है। शाहजहांपुर फर्टिलाइजर्स, सीड्स एंड पेस्टीसाइड्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता कहते हैं, मशीन से एक ट्रांजक्शन में करीब दस मिनट का समय लगेगा और ग्राहक अधिक होेने पर समस्या खड़ी होगी। मशीन खराब होने पर स्टॉक में खाद होने पार किसान को देना कठिन होेगा। तमाम मशीनें लो कनेक्टिविटी की वजह से नहीं चल रहीं, लेकिन पीओएस निर्माता गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स कारपोेरेशन ने यहां सर्विस सेेंटर खोलने की जरूरत नहीं समझी।
सिस्टम सुधरने में लग सकता है थोड़ा वक्त
कोई भी नई व्यवस्था लागू होने पर शुरुआत में थोड़ी दिक्कतें आती हैं और यही पीओएस मशीनों के साथ हो रहा है। देश के अन्य कई राज्यों में यह मशीनें एक साथ चालू होने से सर्वर पर लोड बढ़ने से कनेक्टिविटी की दिक्कतें आ रही हैं, जिन्हें ठीक होने में थोड़ा वक्त लगेगा। जिले में सात सौ रिटेलर्स को मशीनें दी जानी हैं। पहले चरण में कंपनी ने विभिन्न ब्लॉकों के 314 फुटकर विक्रेेताओं को मशीनें उपलब्ध करा दी हैं।
-डीएस चौधरी, जिला कृषि अधिकारी