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मेडिकल कॉलेजः कम पड़े बेड, स्ट्रेचर पर किया जा रहा है मरीजों का उपचार
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। उल्टी-दस्त, बुखार, पेट दर्द जैसे रोगों का इलाज पीएचसी-सीएचसी पर नहीं मिल रहा है। इसलिए मरीजों को वहां से राजकीय मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जा रहा। इसके चलते यहां के बेड तक फुल हो गए हैं। मरीजों के लिए अतिरिक्त बेड डालकर उनका इलाज किया जा रहा। हाल यह है कि इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर मरीजों का उपचार चल रहा। हालत यह है कि 330 बेड के अस्पताल में 380 मरीजों का इजाज हो रहा है।
तापमान में चढ़ाव-उतार के कारण उल्टी-दस्त ने लोगों को घेरना शुरू कर दिया। शहर से लेकर देहात तक डायरिया के कई मरीज सामने आ रहे हैं। सीएचसी-पीएचसी पर डायरिया और बुखार तक का इलाज नहीं किया जा रहा। उन्हें ग्रामीण इलाकों से सीधे राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा।
ग्रामीण इलाकों से रेफर मरीजों के कारण अस्पताल के सारे बेड फुल हो गए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए 47 अतिरिक्त बेड वार्ड में डालकर उनका उपचार किया जा रहा। दूसरी तरफ राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की हालत भी पटरी से उतर गई। इमरजेंसी में मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा। बड़ी संख्या में मरीज होने के कारण इमरजेंसी भी छोटी पड़ गई। वहां पर स्ट्रेचर तक डालने की जगह नहीं बची है।
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-मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। उनके लिए अतिरिक्त बेड डलवाए गए हैं। प्रयास है कि सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बुधवार शाम तक 380 मरीज भर्ती थे। 330 बेड के अस्पताल के कारण अतिरिक्त व्यवस्थाएं करना पड़ रही हैं। -डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
-सीएचसी-पीएचसी पर 200 से 250 की ओपीडी हो रही है। गंभीर रोगियों को ही रेफर किया जा रहा। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज न होने की बात गलत है। -डॉ. एसपी गौतम, सीएमओ
ऐसे करें बचाव
-बाहर जाते समय टोपी, गमछा और छाते का इस्तेमाल करें।
-गीले कपड़े को अपने चेहरे, सिर व गर्दन पर रखते रहें।
-हल्के रंग के सूती व ढीले कपड़े पहने, पानी साथ में रखें।
-धूप में खड़े वाहनों को बच्चों व पालतू जानवरों को बिल्कुल नहीं छोड़े।
(जैसा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजिशियनडॉ एमएल अग्रवाल ने बताया।)
इन बातों का रखें ध्यान
- घर में बने पेय पदार्थ लस्सी, छाछ, बेल व फलों के जूस को पीयें।
- नमक-चीनी का घोल, पना व दही का सेवन करें।
- भारी भोजन खाने से बचें, हल्का खाना ही खाएं।
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तापमान में चढ़ाव-उतार के कारण उल्टी-दस्त ने लोगों को घेरना शुरू कर दिया। शहर से लेकर देहात तक डायरिया के कई मरीज सामने आ रहे हैं। सीएचसी-पीएचसी पर डायरिया और बुखार तक का इलाज नहीं किया जा रहा। उन्हें ग्रामीण इलाकों से सीधे राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा।
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ग्रामीण इलाकों से रेफर मरीजों के कारण अस्पताल के सारे बेड फुल हो गए हैं। मरीजों को भर्ती करने के लिए 47 अतिरिक्त बेड वार्ड में डालकर उनका उपचार किया जा रहा। दूसरी तरफ राजकीय मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी की हालत भी पटरी से उतर गई। इमरजेंसी में मरीजों का स्ट्रेचर पर इलाज किया जा रहा। बड़ी संख्या में मरीज होने के कारण इमरजेंसी भी छोटी पड़ गई। वहां पर स्ट्रेचर तक डालने की जगह नहीं बची है।
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-मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है। उनके लिए अतिरिक्त बेड डलवाए गए हैं। प्रयास है कि सभी को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। बुधवार शाम तक 380 मरीज भर्ती थे। 330 बेड के अस्पताल के कारण अतिरिक्त व्यवस्थाएं करना पड़ रही हैं। -डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
-सीएचसी-पीएचसी पर 200 से 250 की ओपीडी हो रही है। गंभीर रोगियों को ही रेफर किया जा रहा। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज न होने की बात गलत है। -डॉ. एसपी गौतम, सीएमओ
ऐसे करें बचाव
-बाहर जाते समय टोपी, गमछा और छाते का इस्तेमाल करें।
-गीले कपड़े को अपने चेहरे, सिर व गर्दन पर रखते रहें।
-हल्के रंग के सूती व ढीले कपड़े पहने, पानी साथ में रखें।
-धूप में खड़े वाहनों को बच्चों व पालतू जानवरों को बिल्कुल नहीं छोड़े।
(जैसा कि राजकीय मेडिकल कॉलेज के फिजिशियनडॉ एमएल अग्रवाल ने बताया।)
इन बातों का रखें ध्यान
- घर में बने पेय पदार्थ लस्सी, छाछ, बेल व फलों के जूस को पीयें।
- नमक-चीनी का घोल, पना व दही का सेवन करें।
- भारी भोजन खाने से बचें, हल्का खाना ही खाएं।