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चकपरमाली मामले में विधायक से एसओ की नोकझोक
Updated Sat, 22 Sep 2018 12:00 AM IST
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फोटो-21,थाने में मौजूद पीड़ित ग्रामीण व मौजूद विधायक रोशन लाल वर्मा
फोटो-22, सड़क पर बैठी पीड़ित महिलाएं
चकपरमाली मामले में विधायक से एसओ की नोकझोंक
घायल महिलाओं ने थाने के सामने लगाया जाम, नारेबाजी
महिलाओं के मेडिकल की मांग को लेकर पहुंचे थे विधायक
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/भावलखेड़ा। आरसी मिशन थाने के गांव चकपरमाली में दबिश के दौरान ग्रामीणों पर ज्यादती के मामले ने शुक्रवार को और तूल पकड़ लिया। पुलिस मारपीट में घायल महिलाओं को मेडिकल कराने के लिए थाने लेकर पहुंचे विधायक रोशन लाल वर्मा से एसओ की तकरार हो गई। गुस्साई महिलाओं ने थाने के सामने जाम लगा दिया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। इस दौरान विधायक मानवेंद्र सिंह के पुत्र अरविंद सिंह भी ग्रामीणों के पक्ष में काफी देर तक थाने में जमे रहे।
अवैध शराब की सूचना पर मंगलवार रात पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने चकपरमाली गांव में दबिश दी थी। संयुक्त टीम सादे कपड़ों में थे। ऐसे ग्रामीणों की टीम से झड़प हो गई। हालांकि, गांव से 91 पेटी अरुणाचल प्रदेश और हरियाणा की शराब के साथ 30 लीटर स्प्रिट भी बरामद हुई। पुलिस ने 40 नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने ज्यादती की। कई घरों में तोड़फोड़ के साथ लूटपाट की, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। कई लोग पुलिस ज्यादती में घायल हुए।
ग्रामीणों पर पुलिस ज्यादती के विरोध में भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल वर्मा ने डीएम अमृत त्रिपाठी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की तो पुलिस-प्रशासन असमंजस में आ गया। डीएम ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इधर, शुक्रवार को विधायक रोशन लाल वर्मा और मानवेंद्र सिंह के पुत्र अरविंद सिंह गांव की घायल करीब दो दर्जन महिलाओं के साथ थाने पहुंचे। घायलों का मेडिकल कराने के लिए पुलिस से चिट्ठी बनाने की बात कही। इससे एसओ प्रवेश सिंह ने इंकार कर दिया। इस पर विधायक और एसओ के बीच नोकझोंक हो गई। पुलिस के विरोध में महिलाएं थाने के सामने रोड पर बैठ गईं। थाने का घेराव भी किया। करीब तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। बाद में जिले के एक बड़े अधिकारी ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
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एसओ का नोकझोंक की बात से इंकार
- एसओ आरसी मिशन प्रवेश सिंह का कहना है कि विधायक रोशन लाल वर्मा कुछ महिलाओं को लाए थे। उनका मेडिकल कराने की बात कह रहे थे। महिलाओं के जाहिरा चोटें नहीं थीं। जो चोटें थीं वह पुरानी थीं। ऐसे में मेडिकल से इंकार कर दिया गया। विधायक ने नाराजगी जरूर जताई, लेकिन नोकझोंक की बात गलत है। चकपरमाली मामले में मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। पुलिस पर ज्यादती के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।
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पुलिस ज्यादती: अपनी ही सरकार के प्रति मुखर हुए विधायक
शाहजहांपुर। विधायक मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल वर्मा के चकपरमाली मामले में रुख को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी असमंजस में है। दरअसल दोनों ही सत्तारूढ़ पार्टी के जनाधार वाले नेता हैं। मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल को जमीनी और लोगों से जुड़ा हुआ नेता कहा जाता है। ऐसे में दोनों विधायकों का अपनी की सरकार के सिस्टम में पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाना चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायकों के सख्त रुख को देखते हुए कई पुलिस कर्मी भी अपनी गर्दन बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। विधायकों के रुख को देखते हुए ही इस मामले में डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि चकपरमाली में पुलिस ज्यादती का यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच सकता है।
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फोटो-22, सड़क पर बैठी पीड़ित महिलाएं
चकपरमाली मामले में विधायक से एसओ की नोकझोंक
घायल महिलाओं ने थाने के सामने लगाया जाम, नारेबाजी
महिलाओं के मेडिकल की मांग को लेकर पहुंचे थे विधायक
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर/भावलखेड़ा। आरसी मिशन थाने के गांव चकपरमाली में दबिश के दौरान ग्रामीणों पर ज्यादती के मामले ने शुक्रवार को और तूल पकड़ लिया। पुलिस मारपीट में घायल महिलाओं को मेडिकल कराने के लिए थाने लेकर पहुंचे विधायक रोशन लाल वर्मा से एसओ की तकरार हो गई। गुस्साई महिलाओं ने थाने के सामने जाम लगा दिया। पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। इस दौरान विधायक मानवेंद्र सिंह के पुत्र अरविंद सिंह भी ग्रामीणों के पक्ष में काफी देर तक थाने में जमे रहे।
अवैध शराब की सूचना पर मंगलवार रात पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने चकपरमाली गांव में दबिश दी थी। संयुक्त टीम सादे कपड़ों में थे। ऐसे ग्रामीणों की टीम से झड़प हो गई। हालांकि, गांव से 91 पेटी अरुणाचल प्रदेश और हरियाणा की शराब के साथ 30 लीटर स्प्रिट भी बरामद हुई। पुलिस ने 40 नामजद और 50 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने ज्यादती की। कई घरों में तोड़फोड़ के साथ लूटपाट की, महिलाओं और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। कई लोग पुलिस ज्यादती में घायल हुए।
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ग्रामीणों पर पुलिस ज्यादती के विरोध में भाजपा विधायक मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल वर्मा ने डीएम अमृत त्रिपाठी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की तो पुलिस-प्रशासन असमंजस में आ गया। डीएम ने मामले में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। इधर, शुक्रवार को विधायक रोशन लाल वर्मा और मानवेंद्र सिंह के पुत्र अरविंद सिंह गांव की घायल करीब दो दर्जन महिलाओं के साथ थाने पहुंचे। घायलों का मेडिकल कराने के लिए पुलिस से चिट्ठी बनाने की बात कही। इससे एसओ प्रवेश सिंह ने इंकार कर दिया। इस पर विधायक और एसओ के बीच नोकझोंक हो गई। पुलिस के विरोध में महिलाएं थाने के सामने रोड पर बैठ गईं। थाने का घेराव भी किया। करीब तीन घंटे तक हंगामा चलता रहा। बाद में जिले के एक बड़े अधिकारी ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया।
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एसओ का नोकझोंक की बात से इंकार
- एसओ आरसी मिशन प्रवेश सिंह का कहना है कि विधायक रोशन लाल वर्मा कुछ महिलाओं को लाए थे। उनका मेडिकल कराने की बात कह रहे थे। महिलाओं के जाहिरा चोटें नहीं थीं। जो चोटें थीं वह पुरानी थीं। ऐसे में मेडिकल से इंकार कर दिया गया। विधायक ने नाराजगी जरूर जताई, लेकिन नोकझोंक की बात गलत है। चकपरमाली मामले में मजिस्ट्रेट जांच चल रही है। पुलिस पर ज्यादती के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।
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पुलिस ज्यादती: अपनी ही सरकार के प्रति मुखर हुए विधायक
शाहजहांपुर। विधायक मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल वर्मा के चकपरमाली मामले में रुख को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी असमंजस में है। दरअसल दोनों ही सत्तारूढ़ पार्टी के जनाधार वाले नेता हैं। मानवेंद्र सिंह और रोशन लाल को जमीनी और लोगों से जुड़ा हुआ नेता कहा जाता है। ऐसे में दोनों विधायकों का अपनी की सरकार के सिस्टम में पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाना चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायकों के सख्त रुख को देखते हुए कई पुलिस कर्मी भी अपनी गर्दन बचाने की जुगत में लगे हुए हैं। विधायकों के रुख को देखते हुए ही इस मामले में डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। माना जा रहा है कि चकपरमाली में पुलिस ज्यादती का यह मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच सकता है।