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छत्तीसगढ़ में फंसे 30 मजदूर घर आने को तड़प रहे
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जैतीपुर। पेट की भूख मिटाने को रोजी-रोटी की तलाश में छत्तीसगढ़ गए जैतीपुर क्षेत्र के 30 मजदूर वहां फंस गए हैं और अब उनके आगे रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रशासन से मदद की गुहार लगाकर घर वापसी के लिए आवेदन किए लेकिन कोई राहत नहीं मिली। अब इन लोगों ने अपने परिवार वालों से संपर्क करके स्थानीय स्तर से मदद की गुहार लगाई है।
करीब तीन महीने पहले गन्ने के सीजन में जैतीपुर क्षेत्र के सात गांव के 30 मजदूर काम की तलाश में छत्तीसगढ़ गए थे। इनमें गढ़िया रंगीन से 20, केसीनगला से दो, मोहटा से एक, जिगनिया से एक, खिरिया रतन से एक, इमलिया खुर्द से एक और मलरिया मिर्जापुर गांव केे चार मजदूर हैं। यह सभी छत्तीसगढ़ के जिला कबीरधाम ग्राम भगतपुर पोस्ट रूसे थाना पांडा ताराई तहसील पड़रिया में गुड़ कारखाने में काम कर रहे थे। करीब दो महीने काम सही चला और फिर कोविड-19 की महामारी के चलते काम प्रभावित हो गया। कुछ दिन तो उन लोगों ने इंतजार किया लेकिन हालात न सुधरते देख घर वापसी का रास्ता तलाशने लगे। इसी बीच राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने का फैसला लिया तो इन लोगों के मन में भी अपने घर पहुंचने की उम्मीद जगी। छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रशासन ने इन लोगों से घर वापसी का फार्म भरवाया और ऑनलाइन पास के लिए आवेदन कराया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
साहब.. वापस बुला लो, भूख से नहीं लड़ पाएंगे
छत्तीसगढ़ गए सुशील शर्मा ने फोन पर एसडीएम तिलहर वेद सिंह चौहान को बताया कि अब उन लोगों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। जेब में जो रुपये थे, सब खर्च हो चुके हैं और अब खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया हैं। गुड़ कारखाने का मालिक भी उनका हाल जानने नहीं आता। स्थानीय प्रशासन भी ध्यान दे रहा है। एक बार स्थानीय अधिकारी कारखाने पहुंचे भी लेकिन उनकी परेशानी पूछे बिना ही लौट गए। बकौल सुशील, घर वापसी के लिए कोई साधन न होने और पास में पैसे खत्म होने से जीवन संकट में लगने लगा है। तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। किसी को कोई परेशानी भी हो तो वह इतने मजबूर हैं कि उन्हें कोई व्यवस्था दिखाई नहीं पड़ती है। सुशील ने कहा कि वेह अपने राज्य और जिले के अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनके समेत 30 लोगों की जिंदगी संकट में है। उन्हें घर वापस बुलाया जाए, ताकि जिंदगी सलामत रहे। कोरोना से तो लड़ जायेंगे लेकिन भूख से लड़ना मुश्किल है। फंसे लोगों में रामलड़ैते, रूपा, मुस्कान पवन, शिल्पी, दुर्गा, अरमान, शिवशंकर, गुड्डू, अशोक, अंकुल अनिल, सुशील शर्मा, नेक्सू यादव, नन्हें शर्मा, अभिषेक शर्मा, पवन शर्मा, मुलायम यादव, विजय यादव, रिंकू, सूरजपाल, आकाश, कल्लू यादव, गोविंद, रामवीर, मिथुन, सुभाष, रामवीर आदि शामिल हैं। सुशील के मुताबिक एसडीएम ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रशासन से बात करके मदद का आश्वासन दिया है।
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लॉक डाउन के बीच दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूरों को बुलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी ही इसमें मदद कर सकते हैं। वहीं से कोई मदद की जाएगी, स्थानीय स्तर से कुछ नहीं हो सकता। - वेद सिंह चौहान, उप जिला अधिकारी तिलहर
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करीब तीन महीने पहले गन्ने के सीजन में जैतीपुर क्षेत्र के सात गांव के 30 मजदूर काम की तलाश में छत्तीसगढ़ गए थे। इनमें गढ़िया रंगीन से 20, केसीनगला से दो, मोहटा से एक, जिगनिया से एक, खिरिया रतन से एक, इमलिया खुर्द से एक और मलरिया मिर्जापुर गांव केे चार मजदूर हैं। यह सभी छत्तीसगढ़ के जिला कबीरधाम ग्राम भगतपुर पोस्ट रूसे थाना पांडा ताराई तहसील पड़रिया में गुड़ कारखाने में काम कर रहे थे। करीब दो महीने काम सही चला और फिर कोविड-19 की महामारी के चलते काम प्रभावित हो गया। कुछ दिन तो उन लोगों ने इंतजार किया लेकिन हालात न सुधरते देख घर वापसी का रास्ता तलाशने लगे। इसी बीच राज्य सरकारों ने प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने का फैसला लिया तो इन लोगों के मन में भी अपने घर पहुंचने की उम्मीद जगी। छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रशासन ने इन लोगों से घर वापसी का फार्म भरवाया और ऑनलाइन पास के लिए आवेदन कराया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।
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साहब.. वापस बुला लो, भूख से नहीं लड़ पाएंगे
छत्तीसगढ़ गए सुशील शर्मा ने फोन पर एसडीएम तिलहर वेद सिंह चौहान को बताया कि अब उन लोगों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। जेब में जो रुपये थे, सब खर्च हो चुके हैं और अब खाने-पीने का संकट खड़ा हो गया हैं। गुड़ कारखाने का मालिक भी उनका हाल जानने नहीं आता। स्थानीय प्रशासन भी ध्यान दे रहा है। एक बार स्थानीय अधिकारी कारखाने पहुंचे भी लेकिन उनकी परेशानी पूछे बिना ही लौट गए। बकौल सुशील, घर वापसी के लिए कोई साधन न होने और पास में पैसे खत्म होने से जीवन संकट में लगने लगा है। तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। किसी को कोई परेशानी भी हो तो वह इतने मजबूर हैं कि उन्हें कोई व्यवस्था दिखाई नहीं पड़ती है। सुशील ने कहा कि वेह अपने राज्य और जिले के अधिकारियों से गुहार लगाई है कि उनके समेत 30 लोगों की जिंदगी संकट में है। उन्हें घर वापस बुलाया जाए, ताकि जिंदगी सलामत रहे। कोरोना से तो लड़ जायेंगे लेकिन भूख से लड़ना मुश्किल है। फंसे लोगों में रामलड़ैते, रूपा, मुस्कान पवन, शिल्पी, दुर्गा, अरमान, शिवशंकर, गुड्डू, अशोक, अंकुल अनिल, सुशील शर्मा, नेक्सू यादव, नन्हें शर्मा, अभिषेक शर्मा, पवन शर्मा, मुलायम यादव, विजय यादव, रिंकू, सूरजपाल, आकाश, कल्लू यादव, गोविंद, रामवीर, मिथुन, सुभाष, रामवीर आदि शामिल हैं। सुशील के मुताबिक एसडीएम ने छत्तीसगढ़ के स्थानीय प्रशासन से बात करके मदद का आश्वासन दिया है।
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लॉक डाउन के बीच दूसरे प्रदेशों में फंसे मजदूरों को बुलाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक अधिकारी ही इसमें मदद कर सकते हैं। वहीं से कोई मदद की जाएगी, स्थानीय स्तर से कुछ नहीं हो सकता। - वेद सिंह चौहान, उप जिला अधिकारी तिलहर