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उम्मीद की मशाल : 2170 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ना उगाने का कौशल ने बनाया कीर्तिमान

Mon, 18 Jul 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 18 Jul 2022 12:45 AM IST
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2170 quintal per hectare sugarcane grower 'Skill'
शाहजहांपुर। प्रगतिशील किसान कौशल मिश्रा ने 2170 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गन्ना उत्पादन करने का गन्ना किसानों को आय बढ़ाने का रास्ता दिखाया। इस उपलब्धि के लिए उन्हें राज्य स्तर पर प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया है।
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कांट क्षेत्र के गांव गंगानगर निवासी कौशल मिश्रा कुछ वर्ष पहले उस वक्त चर्चा में आए, जब उन्होंने गेहूं के साथ अन्य फसलों का उत्पादन कर सहफसली खेती की उपयोगिता साबित की। रासायनिक खादों के संतुलित प्रयोग से सभी फसलों में उत्पादन बढ़ाया। अब उनका जैविक खेती में रुझान बढ़ा है। गत वर्ष 25 एकड़ गन्ना के साथ ढैंचा उगाने का उन्होंने प्रदेश में पहला प्रयोग किया, जो सफल रहा। इसी तरह रबी सीजन में गेहूं कटने के बाद खाली हुए खेतों में ढैंचा तैयार कर उसे खेत में पलट दिया, जिसने धान की उपज में हरी खाद का काम किया। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि जिले में गन्ने का प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादन 800 से 1200 क्विंटल होता है लेकिन ढैंचा से नाइट्रोजन और हरी खाद देकर कौशल ने 2170 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार कर वाकई कमाल किया है।
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दोगुने भाव पर बिकी जैविक शिमला मिर्च
कौशल बताते हैं कि जैविक विधि से उगाई गई शिमला मिर्च बाजार में दोगुने भाव पर बिकी। अब उनकी प्रेरणा से जिले की लगभग तीन लाख हेक्टेयर कृषि भूमि के 20 फीसदी हिस्से पर जैविक विधि से धान, गन्ना, गेहूं और सब्जियां आदि उगाई जा रही हैं। जैविक विधि से तैयार अनाज और सब्जियों के बाजार में 50 से 60 फीसदी ज्यादा दाम मिल रहे हैं।
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नीति आयोग से मिला विशेष आमंत्रण
कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे कौशल के पास उपलब्धियों की लंबी सूची है। वह दिल्ली में नीति आयोग और लखनऊ में गन्ना मूल्य निर्धारण समिति की बैठक में विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर बुलाए जाते हैं। दूरदर्शन कृषि चैनल पर वह कई बार देश के किसानों से अपने अनुभव साझा कर चुके हैं। उनके अनुभवों का लाभ लेने दूरदर्शन की टीम उनके कृषि फार्म की कवरेज कर चुकी है। नेपाल, थाईलैंड आदि देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में वह वहां के किसानों को गन्ने में मशीनीकरण का प्रयोग करके फसल की लागत कम करने का मंत्र दे चुके हैं। जनपद और आसपास के गन्ना किसानों को उत्तम प्रजाति का बीज देने के लिए गन्ना शोध परिषद ने हाल ही में उन्हें बीज गन्ना उत्पादक कृषक का प्रमाण पत्र दिया है।

जैविक खेती के लिए ढैंचा से बनने वाली हरी खाद सबसे जरूरी है। मेरा अनुभव है कि ढैंचा खेत में पलट देने से प्राकृतिक खाद मिलने के साथ मिट्टी में ज्यादा समय तक नमी बनी रहती है। सिंचाई की आवश्यकता कम पड़ने के साथ उसमें नाइट्रोजन तत्व भी बढ़ता है। ढैंचा खेत की मिट्टी का तापमान मौसम के अनुकूल रखने में भी मददगार है। - कौशल मिश्रा, गंगानगर (कांट)
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