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मनोज्ञा की मौत पर नगर निगम को दो लाख की क्षतिपूर्ति के निर्देश
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शाहजहांपुर। शहर के मोहल्ला माधवनगर में वर्ष 2012 में वर्षा के दौरान नाले में डूबने से छात्रा की हुई मौत के मामले में स्थायी लोक अदालत ने सुनवाई पूरी करने के बाद नगर निगम को दोषी पाते हुए नगर आयुक्त को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति मृतका के माता-पिता को दिलाए जाने का आदेश दिया है।
रोजा स्थित रेलवे कॉलोनी निवासी कुमुद मुरारी शुक्ल की बेटी 16 वर्षीय मनोज्ञा शुक्ला आर्य कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। 25 जुलाई 2012 को दोपहर करीब एक बजे अनुज्ञा अपने पड़ोसी विकास सिंह की स्कूटी से घर लौट रहीं थी। उस समय बरसात के कारण अंटा चौराहे पर जलभराव हो गया था। दोनों माधवनगर की ओर नाले के किनारे वाली सड़क से होकर गुजरे, यहां भी जलभराव होने की वजह से यह पता ही नहीं चल रहा था कि नाला का किनारा कहां हैं और गली कहां है और पानी का बहाव भी तेज था, इसी बहाव की वजह से स्कूटी माधवनगर में एसएसबी कोचिंग के पास गिर गई। इसमें मनोज्ञा और विकास मय स्कूटी के नाले के अंदर गिर गए। लोगों ने विकास और उसकी स्कूटी को तो निकाल लिया लेकिन मनोज्ञा बहाव में नाले के अंदर चली गई। नाले के ऊपर स्लेप पड़ी हुई थी। दो दिन बाद उसका शव खन्नौत नदी के बंका घाट के पास मिला। इस मामले की रिपोर्ट सदर कोतवाली में 31 जुलाई 2012 को दर्ज कराई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर मनोज्ञा के पिता कुमुद मुरारी व मां साधना शुक्ला ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि नाले-नालियों व सड़कों की सफाई, रखरखाव का दायित्व नगर निगम का है और अवैध निर्माण रोकने का काम विनियमित क्षेत्र का है। दोनों की लापरवाही की वजह से उसकी बेटी मनोज्ञा को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उन्हें बेटी की मौत से शारीरिक व मानसिक आघात पहुुंचा है। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष कमल चौधरी, सदस्य तसनीम कौसर, मनोज कृष्ण मिश्र ने सुनवाई के दौरान नगर निगम को दोषी पाते हुए नगर आयुक्त को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति वाद दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के रूप में निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर नियमानुसार न्यायालय में जमाकर वादी गण को दिलाए जाने का आदेश दिया है। वहीं विनियमित क्षेत्र को दोषी नहीं पाया गया, इसलिए उसके खिलाफ वाद निरस्त कर दिया गया।
मृतका की मां के नाम फिक्स डिपाजिट की जाएगी क्षतिपूर्ति की धनराशि
स्थायी लोक अदालत ने नगर निगम को आदेशित करते हुए कहा है कि दो लाख की क्षतिपूर्ति की धनराशि व ब्याज में से 50 हजार रुपये मृतका के पिता कुमुद मुरारी शुक्ला को नकद प्रदान किए जाएं और शेष क्षतिपूर्ति की धनराशि एक लाख पचास हजार रुपये मृतका की मां साधना शुक्ला के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अत्यधिक ब्याज देने वाली योजना में दस वर्ष, पांच वर्ष लिए फिक्स डिपोजिट की जाए और उस पर वाजिब ब्याज संबंधित बैंक नियमानुसार साधना शुक्ला को नकद प्रदान करेगी।
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रोजा स्थित रेलवे कॉलोनी निवासी कुमुद मुरारी शुक्ल की बेटी 16 वर्षीय मनोज्ञा शुक्ला आर्य कन्या इंटर कॉलेज में पढ़ती थी। 25 जुलाई 2012 को दोपहर करीब एक बजे अनुज्ञा अपने पड़ोसी विकास सिंह की स्कूटी से घर लौट रहीं थी। उस समय बरसात के कारण अंटा चौराहे पर जलभराव हो गया था। दोनों माधवनगर की ओर नाले के किनारे वाली सड़क से होकर गुजरे, यहां भी जलभराव होने की वजह से यह पता ही नहीं चल रहा था कि नाला का किनारा कहां हैं और गली कहां है और पानी का बहाव भी तेज था, इसी बहाव की वजह से स्कूटी माधवनगर में एसएसबी कोचिंग के पास गिर गई। इसमें मनोज्ञा और विकास मय स्कूटी के नाले के अंदर गिर गए। लोगों ने विकास और उसकी स्कूटी को तो निकाल लिया लेकिन मनोज्ञा बहाव में नाले के अंदर चली गई। नाले के ऊपर स्लेप पड़ी हुई थी। दो दिन बाद उसका शव खन्नौत नदी के बंका घाट के पास मिला। इस मामले की रिपोर्ट सदर कोतवाली में 31 जुलाई 2012 को दर्ज कराई गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर मनोज्ञा के पिता कुमुद मुरारी व मां साधना शुक्ला ने स्थायी लोक अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि नाले-नालियों व सड़कों की सफाई, रखरखाव का दायित्व नगर निगम का है और अवैध निर्माण रोकने का काम विनियमित क्षेत्र का है। दोनों की लापरवाही की वजह से उसकी बेटी मनोज्ञा को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। उन्हें बेटी की मौत से शारीरिक व मानसिक आघात पहुुंचा है। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष कमल चौधरी, सदस्य तसनीम कौसर, मनोज कृष्ण मिश्र ने सुनवाई के दौरान नगर निगम को दोषी पाते हुए नगर आयुक्त को दो लाख रुपये क्षतिपूर्ति वाद दायर करने की तिथि से सात प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के रूप में निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर नियमानुसार न्यायालय में जमाकर वादी गण को दिलाए जाने का आदेश दिया है। वहीं विनियमित क्षेत्र को दोषी नहीं पाया गया, इसलिए उसके खिलाफ वाद निरस्त कर दिया गया।
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मृतका की मां के नाम फिक्स डिपाजिट की जाएगी क्षतिपूर्ति की धनराशि
स्थायी लोक अदालत ने नगर निगम को आदेशित करते हुए कहा है कि दो लाख की क्षतिपूर्ति की धनराशि व ब्याज में से 50 हजार रुपये मृतका के पिता कुमुद मुरारी शुक्ला को नकद प्रदान किए जाएं और शेष क्षतिपूर्ति की धनराशि एक लाख पचास हजार रुपये मृतका की मां साधना शुक्ला के नाम किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अत्यधिक ब्याज देने वाली योजना में दस वर्ष, पांच वर्ष लिए फिक्स डिपोजिट की जाए और उस पर वाजिब ब्याज संबंधित बैंक नियमानुसार साधना शुक्ला को नकद प्रदान करेगी।
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